Tirupati Laddu Ghee Scam 2026: तिरुपति के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद से जुड़े मिलावट मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की जांच अब बड़े मोड़ पर पहुंच गई है। एजेंसी ने धन शोधन के आरोप में घी बनाने वाली कंपनी सुकृति फूड्स के प्रवर्तक कैलाश चंद मंगला को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई शुक्रवार को हैदराबाद स्थित ED कार्यालय द्वारा की गई, जिसके बाद मंगला को विशाखापत्तनम की धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम यानी टीटीडी को आपूर्ति किया गया घी असली गाय का घी नहीं था, बल्कि इसे रिफाइंड पाम ऑयल, पामोलीन और कई तरह के रसायनों को मिलाकर तैयार किया गया था। इस पूरे मामले ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े प्रसाद की शुद्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह मिलावट कैसे हुई, कितने रुपये का यह घोटाला है और अब तक जांच में क्या-क्या सामने आया है।
क्या है तिरुपति लड्डू मिलावट मामला
तिरुपति के बालाजी मंदिर में हर दिन लाखों श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दिया जाने वाला लड्डू पूरे देश में अपनी खास पहचान रखता है। इस लड्डू को बनाने में इस्तेमाल होने वाला घी हमेशा से शुद्धता और गुणवत्ता के उच्च मानकों पर आधारित माना जाता रहा है। लेकिन हाल के महीनों में सामने आए खुलासों ने इस भरोसे को गहरा झटका दिया। जांच में यह बात उभरकर आई कि तिरुपति लड्डू प्रसाद तैयार करने में इस्तेमाल किया गया घी असल में मिलावटी था। इसके बाद से ही ED इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए धन शोधन के एंगल से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मिलावट के पीछे कौन-कौन सी कंपनियां और लोग शामिल थे।
कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी से जांच को मिली रफ्तार
ED की जांच में सुकृति फूड्स के प्रवर्तक कैलाश चंद मंगला का नाम सामने आने के बाद उसे 17 सितंबर को हिरासत में लिया गया। एजेंसी के मुताबिक मंगला इस पूरे नेटवर्क में एक अहम सह-साजिशकर्ता के तौर पर काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि उसने मिलावट में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की खरीद में सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी ही फैक्टरी परिसर में मिलावटी घी तैयार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे विशाखापत्तनम की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इस गिरफ्तारी को जांच एजेंसियों की तरफ से इस मामले में एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है।
किन-किन चीजों से तैयार होता था नकली घी
ED की जांच में यह भी सामने आया कि असली घी की जगह इस्तेमाल किया जाने वाला मिलावटी उत्पाद किस तरह तैयार किया जाता था। एजेंसी के अनुसार इसमें रिफाइंड पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलीन का इस्तेमाल किया गया, साथ ही इसमें एमजी-90, मोनोग्लिसराइड्स, मायवेसिट सॉफ्ट 400 और एसिटिक एसिड एस्टर जैसे रसायन भी मिलाए गए। इन सभी चीजों को मिलाकर तैयार किए गए उत्पाद को फिर एगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय घी के नाम से टीटीडी को आपूर्ति के लिए भेजा गया। यानी असली और शुद्ध घी की जगह रसायनों और सस्ते तेलों से बना नकली उत्पाद मंदिर तक पहुंचाया जाता रहा, जो सीधे तौर पर श्रद्धालुओं की सेहत और आस्था दोनों से खिलवाड़ था।
230 करोड़ की आपूर्ति में 96 करोड़ का मिलावटी माल
इस पूरे मामले में सामने आए आंकड़े इसकी गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। ED के दावे के अनुसार साल 2019 से 2024 के बीच टीटीडी को घी की जितनी आपूर्ति की गई, उसका कुल मूल्य लगभग 230 करोड़ रुपये आंका गया है। इसमें से करीब 96 करोड़ रुपये मूल्य का घी अकेले कैलाश चंद मंगला द्वारा तैयार किया गया मिलावटी उत्पाद था। यह आंकड़ा बताता है कि यह कोई छोटी-मोटी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा एक बड़ा वित्तीय और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा घोटाला था, जो सालों तक बिना किसी रोकटोक के जारी रहा।
फर्जी कंपनियों के जरिए हुआ पूरा खेल
जांच एजेंसी के मुताबिक मंगला ने अकेले यह पूरा काम नहीं किया, बल्कि इसके लिए उसने कई छद्म कंपनियों का सहारा लिया। ED ने अपने बयान में श्री वैष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और ए.आर. डेयरी फूड्स जैसी कंपनियों का जिक्र किया है, जिनके माध्यम से मिलावटी घी की आपूर्ति का पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया था। इन कंपनियों के जरिए न सिर्फ माल की सप्लाई की जाती थी, बल्कि पूरे लेन-देन को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए। यह तरीका सुनियोजित वित्तीय अनियमितता और धन शोधन की आशंका को और मजबूत करता है।
फर्जी रिकॉर्ड बनाकर छिपाई गई असलियत
ED का यह भी आरोप है कि मंगला ने अपनी गतिविधियों को वैध दिखाने के लिए घी और रिफाइंड पाम ऑयल की खरीद-बिक्री से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके पीछे मकसद यही था कि मिलावट वाले पदार्थों के असली इस्तेमाल पर पर्दा डाला जा सके और यह दिखाया जा सके कि पूरी प्रक्रिया शुद्ध गाय के घी के उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी है। इस तरह के फर्जी कागजी दस्तावेज तैयार करना बताता है कि यह गड़बड़ी काफी सोच-समझकर और लंबे समय तक चलाने की योजना के तहत की गई थी, ताकि किसी भी जांच में आसानी से पकड़ में न आए।
पहले भी हो चुकी है इसी तरह की गिरफ्तारी
यह पहली बार नहीं है जब इस मामले में ED ने किसी को गिरफ्तार किया हो। इससे पहले भी एजेंसी इसी तरह के आरोपों में भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क नामक कंपनी के प्रवर्तक और निदेशक विपिन जैन को गिरफ्तार कर चुकी है। इससे यह साफ होता है कि तिरुपति लड्डू घी मिलावट का मामला किसी एक व्यक्ति या कंपनी तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें कई कंपनियां और लोग शामिल रहे हैं। ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरी सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और कितने बड़े स्तर पर यह वित्तीय अनियमितता फैली हुई है।
आगे की जांच पर टिकी हैं निगाहें
फिलहाल कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी के बाद ED की जांच और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। एजेंसी अब उन तमाम फर्जी कंपनियों और व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है, जिनके जरिए यह मिलावटी घी टीटीडी तक पहुंचाया गया। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरे घोटाले से जुड़े पैसों का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है। श्रद्धालुओं और आम जनता दोनों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
तिरुपति लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल का मामला न सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भरोसे से जुड़ा गंभीर विषय भी है। ED की जांच में कैलाश चंद मंगला की गिरफ्तारी इस मामले में एक अहम कड़ी साबित हुई है, जिसने पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। छद्म कंपनियों के जरिए फैलाया गया यह घोटाला बताता है कि किस तरह मुनाफे के लालच में धार्मिक आस्था को भी दांव पर लगा दिया गया। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि जांच एजेंसी इस मामले में और कितने लोगों तक पहुंचती है और दोषियों को कब तक कानूनी सजा मिलती है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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