Rajya Sabha Election 2026: देश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर एक बड़ी हलचल शुरू हो गई है, जब भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया। कोलकाता से सामने आई इस अहम जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा, जबकि उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट के लिए नियमित द्विवार्षिक चुनाव होगा। आयोग के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है, जबकि पश्चिम बंगाल की सीट किसी सदस्य के इस्तीफे के चलते खाली हुई है। तीनों राज्यों में मतदान की तारीख 16 अक्टूबर 2026 तय की गई है, और इसी दिन शाम को मतगणना भी संपन्न होगी। पश्चिम बंगाल की यह सीट इसलिए भी खास चर्चा में है क्योंकि विधानसभा में मौजूदा दलगत संख्या इस चुनाव के नतीजे को दिलचस्प बना रही है।
Rajya Sabha Election 2026: रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे से खाली हुई सीट
पश्चिम बंगाल में जिस राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है, वह रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थी। उन्होंने 16 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली पड़ी हुई थी। गौरतलब है कि इस सीट का कार्यकाल मूल रूप से 2 अप्रैल 2032 तक तय था, यानी यह सीट अभी लंबे समय तक के लिए आवंटित थी। इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट को भरने के लिए निर्वाचन आयोग ने अब 16 अक्टूबर को उपचुनाव कराने का फैसला लिया है, ताकि सीट लंबे समय तक रिक्त न रहे और राज्य को पूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सके।
29 सितंबर को जारी होगी अधिसूचना
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल की इस सीट सहित तीनों राज्यों की सीटों के लिए अधिसूचना 29 सितंबर 2026 को जारी की जाएगी। इच्छुक उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर रखी गई है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया 7 अक्टूबर को पूरी की जाएगी। इसके बाद उम्मीदवारों के पास 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस लेने का विकल्प रहेगा। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, और पूरी चुनावी प्रक्रिया 19 अक्टूबर 2026 तक संपन्न कर ली जाएगी।
मतदान और मतगणना का तय समय
आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तीनों राज्यों में संबंधित राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर 2026 को एक साथ कराया जाएगा। मतदान की प्रक्रिया सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसके बाद मतगणना का कार्य उसी दिन शाम 5 बजे से आरंभ हो जाएगा। एक साथ तीन राज्यों में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराए जाने से यह स्पष्ट है कि आयोग इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि किसी भी सीट के प्रतिनिधित्व में देरी न हो।
बैलेट पेपर और वोटिंग को लेकर सख्त निर्देश
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने मतदान से जुड़े कुछ सख्त निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग के अनुसार मतपत्र पर वरीयता दर्ज करने के लिए केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से उपलब्ध कराए गए निर्धारित बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही इस्तेमाल किया जाएगा। किसी अन्य पेन से वरीयता अंकित किए जाने की स्थिति में वह मतपत्र अमान्य माना जा सकता है। इसके साथ ही आयोग ने पूरी चुनाव प्रक्रिया की करीबी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए विशेष ऑब्जर्वर नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।
बंगाल विधानसभा में बीजेपी की मजबूत स्थिति
पश्चिम बंगाल विधानसभा की मौजूदा दलगत संख्या को देखें तो इस उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार की जीत की संभावना मजबूत नजर आ रही है। विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 208 विधायक मौजूद हैं, जो किसी भी विपक्षी उम्मीदवार को हराने के लिए पर्याप्त संख्या से कहीं अधिक है। आयोग के अनुमानित गणित के अनुसार भाजपा उम्मीदवार को हराने के लिए विपक्ष को कम से कम 70 वोटों की जरूरत होगी, जो मौजूदा राजनीतिक समीकरण को देखते हुए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
तृणमूल कांग्रेस में दिख रही आंतरिक फूट
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि पार्टी के भीतर मौजूदा राजनीतिक स्थिति उतनी सीधी नहीं दिख रही, जितनी आंकड़ों में नजर आती है। आधिकारिक तौर पर तृणमूल कांग्रेस के पास विधानसभा में 80 विधायक दर्ज हैं, लेकिन इनमें से 60 विधायक निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले एक अलग गुट का हिस्सा बताए जा रहे हैं, जिसे ‘बागी लेकिन बहुमत’ गुट कहा जा रहा है। वहीं शेष 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का समर्थन करते बताए जा रहे हैं। इस आंतरिक बंटवारे की वजह से तृणमूल के लिए इस उपचुनाव में अपनी एकजुट ताकत दिखाना आसान नहीं होगा।
यूपी और उत्तराखंड में भी होगा साथ-साथ चुनाव
पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर भी इसी कार्यक्रम के तहत चुनाव होगा, क्योंकि इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। तीनों राज्यों में एक साथ चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग सभी रिक्त और खाली होने वाली सीटों को एक तयशुदा समयसीमा के भीतर भरने की तैयारी में है। इस तरह अक्टूबर का महीना राज्यसभा की राजनीति के लिहाज से देशभर में काफी सरगर्मी भरा रहने वाला है।
आंतरिक कलह के बीच उपचुनाव बना अहम राजनीतिक परीक्षा
पश्चिम बंगाल के लिए यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट भरने की औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं है, बल्कि यह राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और सत्तारूढ़ दल के भीतर चल रही खींचतान को भी उजागर करता है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर दिख रहे गुटबंदी के संकेत आने वाले समय में राज्य की सियासत पर व्यापक असर डाल सकते हैं। दूसरी ओर भाजपा के लिए यह उपचुनाव अपनी विधानसभा में मौजूदा मजबूती को राज्यसभा की सीट में तब्दील करने का एक और मौका साबित हो सकता है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों की गहरी नजर रहेगी।
कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल की खाली राज्यसभा सीट पर होने वाला यह उपचुनाव आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई इस सीट को भरने के लिए निर्वाचन आयोग ने पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है। भाजपा की मजबूत स्थिति और तृणमूल कांग्रेस के भीतर दिख रही आंतरिक फूट के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान का अंतिम नतीजा क्या निकलता है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस सीट के लिए कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं।
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Sanjana Gupta
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