Students Suicide in Indiaआईआईटी बॉम्बे में एक छात्र की आत्महत्या की घटना ने फिर से पढ़ाई परीक्षा और करियर के दबाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिष्ठित संस्थानों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद अक्सर मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती दिखती है। यह मामला अब सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि व्यापक आंकड़ों से जुड़ा विषय बन गया है।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2020 से 2023 तक देश में दर्ज आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी हुई। 2024 में कुल मामलों और दर में मामूली कमी दर्ज की गई। 2024 में छात्रों से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी 8.5 प्रतिशत बताई गई है।
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने छात्रों को संदेश दिया कि परीक्षा किसी एक दिन की लिखाई मापती है व्यक्तित्व या भविष्य नहीं। दबाव महसूस होने पर अकेले न समझने की बात कही गई।
NCRB रिपोर्ट में 2020 से 2024 तक क्या आंकड़े हैं?
एनसीआरबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में कुल 153052 आत्महत्या के मामले दर्ज हुए। उस समय अनुमानित आबादी 13533.9 लाख थी और दर 11.3 प्रति लाख रही। 2021 में मामले बढ़कर 164033 हो गए आबादी 13671.8 लाख और दर 12.0 रही।
2022 में कुल मामले 170924 दर्ज हुए आबादी 13797.5 लाख और दर 12.4 रही। 2023 में कुल आंकड़ा 171418 तक पहुंचा जो इन वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर था। आबादी 13923.3 लाख होने पर दर थोड़ी गिरकर 12.3 हो गई।
2024 में कुल मामले घटकर 170746 रह गए। अनुमानित आबादी 14049.1 लाख के साथ दर 12.2 दर्ज हुई। कुल संख्या और दर दोनों में 2023 की तुलना में मामूली कमी आई। ये आंकड़े पूरे देश के दर्ज मामलों पर आधारित हैं।
किस उम्र और लिंग में मामले अधिक दर्ज हुए?
2024 के आंकड़ों में 30 से 45 वर्ष के समूह में सबसे अधिक मामले दिखे। इस वर्ग में पुरुषों के 43351 और महिलाओं के 11564 मामले दर्ज हैं। 18 से 30 वर्ष के युवाओं में पुरुष 38231 और महिलाएं 18236 रही।
45 से 60 वर्ष में पुरुष 26285 और महिलाएं 5808 दर्ज हुए। 60 वर्ष से अधिक आयु में पुरुष 12431 और महिलाएं 3605 रहे। 18 वर्ष से कम आयु वर्ग में लड़कियों के 6032 और लड़कों के 5151 मामले दर्ज हुए। नाबालिग वर्ग में लड़कियों की संख्या लड़कों से अधिक बताई गई है।
ट्रांसजेंडर समुदाय के आंकड़े भी रिपोर्ट में हैं। 18 से 30 वर्ष में 28 मामले 30 से 45 में 16 मामले 45 से 60 में 6 मामले तथा 18 से कम और 60 से अधिक में एक एक मामला दर्ज हुआ।
छात्रों से जुड़े आंकड़े कितने गंभीर हैं?
2024 में कुल दर्ज आत्महत्याओं में छात्रों की हिस्सेदारी 8.5 प्रतिशत बताई गई है। आईआईटी जैसे संस्थानों में हुई घटनाओं के बाद पढ़ाई और करियर के दबाव को लेकर चर्चा बढ़ी है। आंकड़े दिखाते हैं कि युवा वर्ग खासकर 18 से 30 वर्ष में मामले काफी हैं।
संस्थानों से बेहतर परिणाम की अपेक्षा और लगातार प्रदर्शन का दबाव मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय माना जा रहा है। एनसीआरबी के आंकड़े पूरे देश की तस्वीर देते हैं न कि केवल एक संस्थान की। फिर भी प्रतिष्ठित संस्थानों की घटनाएं इस चर्चा को सामने लाती हैं।
18 वर्ष से कम आयु में लड़कियों के अधिक मामले भी ध्यान देने योग्य हैं। ये आंकड़े परिवार स्कूल और संस्थानों में सहायता व्यवस्था की जरूरत रेखांकित करते हैं।
आईआईटी खड़गपुर निदेशक ने छात्रों से क्या कहा?
आईआईटी बॉम्बे की घटना के बाद आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने सोशल मीडिया पर छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि परीक्षा हॉल में यह याद रखें कि परीक्षा केवल यह मापती है कि आपने एक दिन में क्या लिखा। यह यह नहीं मापती कि आप कौन हैं या भविष्य में क्या बनेंगे।
उन्होंने तैयारी पर भरोसा रखने गहरी सांस लेने और विश्वास के साथ उत्तर लिखने को कहा। दबाव ज्यादा महसूस होने पर याद रखने को कहा गया कि आप अकेले नहीं हैं। निदेशक ने लिखा कि मेरा हाथ आपके कंधे पर है आज भी और हमेशा रहेगा।
यह संदेश परीक्षा के दबाव को कम करने और सहारा देने वाला माना गया। आंकड़ों के साथ यह बात छात्रों अभिभावकों और संस्थानों के लिए प्रासंगिक है।
इन आंकड़ों से क्या समझना चाहिए?
2020 से 2023 तक मामलों में वृद्धि और 2024 में मामूली गिरावट का मतलब यह नहीं कि विषय हल हो गया। दर अभी भी 12 प्रति लाख के आसपास बनी हुई है। छात्र वर्ग की 8.5 प्रतिशत हिस्सेदारी पढ़ाई करियर और प्रदर्शन के दबाव से जुड़ी चिंता बढ़ाती है।
आयुवार आंकड़े दिखाते हैं कि युवा और मध्यम आयु दोनों वर्ग प्रभावित हैं। नाबालिग लड़कियों के आंकड़े स्कूल और घर दोनों स्तर पर ध्यान मांगते हैं। आंकड़े दर्ज मामलों पर आधारित हैं इसलिए वास्तविक स्थिति इससे भिन्न भी हो सकती है लेकिन उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े यही हैं।
संस्थानों परिवारों और समाज के लिए ये आंकड़े सहायता और बातचीत की जरूरत रेखांकित करते हैं। निदेशक का संदेश याद दिलाता है कि एक परीक्षा व्यक्ति की पूरी पहचान नहीं होती। दबाव महसूस करने वाले छात्रों को भरोसेमंद लोगों से बात करनी चाहिए और पेशेवर मदद लेनी चाहिए।
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