UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अमरोहा की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। क्रिकेटर मोहम्मद शमी के संभावित चुनावी कदम की चर्चाओं के बीच उनकी पत्नी हसीन जहां ने साफ कह दिया है कि शमी या उनके भाई हसीब जिस सीट से चुनाव लड़ेंगे, वह भी उसी सीट से उनके सामने मैदान में उतरेंगी।
हसीन जहां ने फोन पर बात करते हुए यह रुख जाहिर किया। उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी राजनीतिक दल से टिकट नहीं मिलता तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकती हैं। फिलहाल किसी पार्टी में उनके शामिल होने या किसी सीट से आधिकारिक प्रत्याशी बनने की घोषणा नहीं हुई है।
हसीन जहां ने क्या कहा और चुनौती किसको दी?
हसीन जहां का बयान सीधे मोहम्मद शमी और उनके भाई हसीब दोनों को संबोधित करता है। उन्होंने कहा कि शमी या हसीब जिस जगह से चुनाव लड़ेंगे, वह भी उसी जगह से चुनाव लड़ेंगी। यह बयान उस समय आया है जब शमी के राजनीतिक पदार्पण की अटकलें तेज हो रही हैं।
उन्होंने निर्दलीय लड़ने की संभावना भी रखी। इससे साफ है कि वह किसी पार्टी के टिकट का इंतजार किए बिना भी मैदान में उतरने को तैयार दिख रही हैं। अभी तक न तो शमी ने और न ही हसीब ने आधिकारिक तौर पर चुनाव लड़ने की पुष्टि की है।
यह बयान अमरोहा की स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि दोनों पक्ष एक ही क्षेत्र से जुड़े माने जाते हैं।
शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
20 सितंबर को मोहम्मद शमी और राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी की मुलाकात की तस्वीरें सार्वजनिक हुई थीं। उसी के बाद शमी के 2027 के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज हो गईं। शमी के साथ उनके भाई हसीब के नाम की भी संभावित दावेदार के रूप में चर्चा हो रही है।
अभी तक किसी भी तरफ से आधिकारिक घोषणा नहीं आई है। मुलाकात की तस्वीरें ही चर्चा का आधार बनीं। इसके बाद हसीन जहां का बयान आने से अमरोहा की सियासत में एक और परत जुड़ गई है।
चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह विषय पहले ही सुर्खियों में आ गया है। शमी की क्रिकेट पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय पहचान के कारण उनकी संभावित उम्मीदवारी पर नजरें टिकी हुई हैं।
अमरोहा सदर सीट पर क्या है मौजूदा राजनीतिक स्थिति?
अमरोहा सदर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के महबूब अली 2002 से लगातार चुनाव जीतते आए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे। भाजपा के राम सिंह को उसी चुनाव में 57,699 वोट प्राप्त हुए थे।
इस आंकड़े से साफ है कि सीट पर सपा का लंबे समय से मजबूत पकड़ रहा है। अगर शमी, हसीब या हसीन जहां इस सीट से चुनाव लड़ते हैं तो मौजूदा समीकरणों में बदलाव की संभावना पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
अभी किसी ने भी इस सीट से लड़ने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। चर्चा मुख्य रूप से संभावित दावेदारी और हसीन जहां के बयान पर केंद्रित है।
शमी और हसीन जहां के पुराने विवाद का क्या संबंध है?
मोहम्मद शमी और हसीन जहां लंबे समय से अलग रह रहे हैं। वर्ष 2018 में दोनों के बीच विवाद सार्वजनिक हुआ था। हसीन जहां ने शमी और उनके परिवार पर कई आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद भी सामने आए।
अब शमी के संभावित राजनीतिक कदम की चर्चाओं के बीच हसीन जहां का चुनाव लड़ने का बयान फिर से सुर्खियों में आ गया है। यह बयान पुराने विवाद के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालांकि वर्तमान बयान मुख्य रूप से चुनावी चुनौती पर केंद्रित है।
दोनों पक्षों के बीच व्यक्तिगत और कानूनी मामले पहले से सार्वजनिक रहे हैं। वर्तमान चर्चा चुनाव लड़ने के इरादे से जुड़ी है।
आगे की स्थिति क्या हो सकती है?
फिलहाल न तो शमी ने और न ही हसीब ने चुनाव लड़ने की पुष्टि की है। हसीन जहां ने भी किसी पार्टी से टिकट मिलने या किसी खास सीट से नामांकन भरने की घोषणा नहीं की है। उन्होंने सिर्फ यह कहा है कि शमी या हसीब जिस सीट से लड़ेंगे, वह भी उसी सीट से लड़ेंगी। निर्दलीय लड़ने की संभावना उन्होंने खुली रखी है।
2027 के विधानसभा चुनाव अभी कुछ समय दूर हैं। अमरोहा सदर जैसी सीट पर लंबे समय से एक ही दल का दबदबा रहा है। ऐसे में नए चेहरों की संभावित एंट्री स्थानीय चर्चाओं को बढ़ावा दे रही है।
हसीन जहां के बयान ने इस चर्चा को और ठोस रूप दे दिया है। अब देखना यह होगा कि आगे कोई आधिकारिक दावेदारी सामने आती है या नहीं। फिलहाल स्थिति बयानों और अटकलों तक सीमित है।
अमरोहा की राजनीति में यह नया अध्याय स्थानीय मतदाताओं और राजनीतिक दलों दोनों के लिए दिलचस्पी का विषय बन गया है। शमी की सार्वजनिक छवि और हसीन जहां का सीधा बयान इस चर्चा को बनाए हुए हैं। चुनाव नजदीक आने पर स्थिति और साफ हो सकती है।
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