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टाटा स्टील कलर्स को मिला 18 फीसदी बोनस, कर्मचारियों में खुशी की लहर, यूनियन और प्रबंधन के बीच बनी सहमति

Jamshedpur News: जमशेदपुर से कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। टाटा स्टील की सहयोगी कंपनी टाटा स्टील कलर्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसे पहले टाटा ब्लूस्कोप के नाम से जाना जाता था, ने इस साल अपने कर्मचारियों को 18 प्रतिशत बोनस देने का ऐलान किया है। यह फैसला कंपनी प्रबंधन और टाटा स्टील कलर्स एम्प्लॉयी यूनियन के बीच बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बातचीत के बाद लिया गया। नए फॉर्मूले के तहत अधिकतम बोनस 95,771 रुपये, न्यूनतम बोनस 34,722 रुपये और औसत बोनस 66,752 रुपये तय किया गया है। खास बात यह रही कि यह बोनस समझौता उस नए फॉर्मूले पर आधारित है, जो पिछले दो वर्षों से लंबित पड़ा हुआ था। यूनियन अध्यक्ष के विशेष अनुरोध पर प्रबंधन ने बोनस की दर 16 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की, जिससे कुल राशि करीब 64 लाख रुपये तक पहुंच गई। समझौते के दौरान प्लांट क्षमता, सुरक्षा मानकों और उत्पाद गुणवत्ता जैसे अहम मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

दो साल से लंबित था नया बोनस फॉर्मूला

टाटा स्टील कलर्स में कर्मचारियों के बोनस को लेकर नया फॉर्मूला पिछले दो वर्षों से लटका हुआ था, जिसकी वजह से कर्मचारियों के बीच एक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। इस बार प्रबंधन और यूनियन के बीच हुई बातचीत में इस लंबित मुद्दे को अंततः सुलझा लिया गया। समझौते के अनुसार अगर पुराने 16 प्रतिशत के हिसाब से गणना की जाती, तो कुल बोनस राशि लगभग 60 लाख रुपये बनती। यूनियन की ओर से इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए प्रबंधन से बोनस दर बढ़ाने का अनुरोध किया गया, जिस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कंपनी ने इसे स्वीकार कर लिया।

यूनियन अध्यक्ष के अनुरोध पर बढ़ा बोनस प्रतिशत

टाटा स्टील कलर्स एम्प्लॉयी यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पाण्डेय ने प्रबंधन के सामने बोनस प्रतिशत बढ़ाने का विशेष अनुरोध रखा था। उनके इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन ने बोनस दर को 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया। इस बढ़ोतरी के चलते कुल बोनस राशि लगभग 60 लाख रुपये से बढ़कर करीब 64 लाख रुपये हो गई। यह वृद्धि भले ही आंकड़ों में छोटी लगे, लेकिन कर्मचारियों के लिए इसका सीधा और सकारात्मक असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ने वाला है। यूनियन अध्यक्ष ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने साथी पदाधिकारियों को भी दिया।

न्यूनतम, अधिकतम और औसत बोनस की पूरी जानकारी

नए फॉर्मूले के तहत तय किए गए बोनस ढांचे में स्पष्टता रखी गई है, ताकि हर स्तर के कर्मचारी को इसका लाभ मिल सके। इस समझौते के अनुसार सबसे अधिक बोनस पाने वाले कर्मचारियों को 95,771 रुपये मिलेंगे, जबकि न्यूनतम बोनस की सीमा 34,722 रुपये तय की गई है। वहीं औसत बोनस की बात करें तो यह 66,752 रुपये निर्धारित किया गया है। इस तरह की स्पष्ट संरचना से न केवल पारदर्शिता बनी रहती है, बल्कि विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के बीच भी संतुलन बना रहता है।

समझौते के दौरान प्लांट क्षमता और सुरक्षा पर हुई चर्चा

बोनस समझौते के दौरान केवल आर्थिक पहलुओं पर ही बात नहीं हुई, बल्कि कंपनी के भविष्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इसमें प्लांट की उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने, सुरक्षा मानकों को पहले से अधिक सुदृढ़ करने तथा उत्पाद की गुणवत्ता पर विशेष फोकस बनाए रखने जैसे विषय शामिल रहे। इस तरह की चर्चा से यह साफ जाहिर होता है कि प्रबंधन और यूनियन दोनों केवल तात्कालिक फायदे तक सीमित न रहकर कंपनी के दीर्घकालिक विकास को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। सुरक्षा और गुणवत्ता जैसे विषयों पर लगातार ध्यान देना किसी भी औद्योगिक इकाई के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

प्रबंधन की ओर से रही इन अधिकारियों की मौजूदगी

इस समझौते के अवसर पर टाटा स्टील कलर्स प्रबंधन की ओर से कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रबंध निदेशक प्रवीण वी थम्पी, सीएचआरओ अनिशा प्रमाणिक, प्लांट हेड इंद्रनील बिस्वास, वीपी सेल्स एंड मार्केटिंग प्रखर अग्रवाल, एचआर डीजीएम राजेश त्रिपाठी और एचआर डिप्टी हेड मनीष कुमार शामिल थे। इन सभी अधिकारियों की मौजूदगी इस बात को दर्शाती है कि कंपनी ने इस समझौते को कितनी गंभीरता से लिया और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए फैसला किया।

यूनियन पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका रही अहम

समझौते को अंतिम रूप देने में यूनियन के तमाम पदाधिकारियों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। अध्यक्ष राकेश्वर पाण्डेय के साथ-साथ कार्यकारी अध्यक्ष विजय खान, उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार श्रीवास्तव, महामंत्री संजय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष हुसैनुल ओला कादरी, उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रवि उपाध्याय, संयुक्त सचिव आदित्य राज एवं सृष्टिधर महतो तथा असंगठित सचिव प्रवीण राय, प्रियंका कुमारी, जितेंद्र कुमार, संतोष कुमार साहू और कृष्णा यादव भी इस मौके पर उपस्थित रहे। यूनियन अध्यक्ष ने इस उपलब्धि के लिए महामंत्री संजय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष अभिषेक कुमार श्रीवास्तव और उपाध्यक्ष हुसैनुल ओला कादरी के प्रयासों की खास तौर पर सराहना की।

प्रबंध निदेशक ने की सुरक्षा और उत्पादकता पर अपील

समझौते के बाद प्रबंध निदेशक प्रवीण वी. थम्पी ने कंपनी के सभी कर्मचारियों को संबोधित करते हुए एक अहम अपील की। उन्होंने कहा कि हर कर्मचारी को सुरक्षा और उत्पादकता पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि कंपनी लगातार आगे बढ़ती रहे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनी के समग्र विकास के लिए सभी कर्मचारियों का सहयोग बेहद जरूरी है। इस तरह की अपील से यह संकेत मिलता है कि प्रबंधन बोनस जैसे आर्थिक लाभ देने के साथ-साथ कर्मचारियों से भी जिम्मेदारी और सक्रियता की अपेक्षा रखता है।

कर्मचारियों में उत्साह, औद्योगिक संबंधों को मिली मजबूती

बोनस समझौते के फाइनल होने के बाद कंपनी के कर्मचारियों में स्वाभाविक रूप से उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। दो साल से लंबित मुद्दे का हल निकलना और बोनस प्रतिशत में बढ़ोतरी होना, दोनों ही बातें कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने वाली साबित हो रही हैं। इसके साथ ही यह समझौता प्रबंधन और यूनियन के बीच के औद्योगिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करता है। जब कोई भी संगठन अपने कर्मचारियों की मांगों को सुनते हुए सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान निकालता है, तो इसका सीधा असर कार्यस्थल के माहौल और उत्पादकता पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है।

टाटा स्टील कलर्स प्राइवेट लिमिटेड में हुआ यह बोनस समझौता कर्मचारियों और प्रबंधन, दोनों के लिए संतोषजनक परिणाम लेकर आया है। दो वर्षों से लंबित नए फॉर्मूले का समाधान निकलना और बोनस दर का 16 से बढ़कर 18 प्रतिशत होना, यह दिखाता है कि आपसी बातचीत और सहयोग से किसी भी जटिल मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। प्लांट क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा और गुणवत्ता पर हुई चर्चा यह भी संकेत देती है कि कंपनी भविष्य को लेकर गंभीर योजनाएं बना रही है। कुल मिलाकर यह समझौता जमशेदपुर के औद्योगिक क्षेत्र में सकारात्मक श्रम संबंधों की एक अच्छी मिसाल के रूप में सामने आया है।

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Author: Sanjna Gupta

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