Protest Against Gyanesh Kumar: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस और भारतीय युवा कांग्रेस प्रदर्शन करने वाली हैं। भारत निर्वाचन आयोग के दफ्तर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है।
दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ता आयोग कार्यालय के बाहर विरोध करेंगे। युवा कांग्रेस 5, रायसीना रोड से जंतर मंतर तक मार्च निकालेगी। संगठन ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है। बृहस्पतिवार को युवा कांग्रेस ने ऑनलाइन याचिका भी शुरू की थी। अभियान का नाम ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो रखा गया है।
विवाद उन खबरों के बाद और बढ़ा जिन्हें आयोग के आंतरिक मतभेद से जोड़ा गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा है कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। आयोग कहता है कि विचार विमर्श में अलग राय सामान्य है और फैसले सर्वसम्मति तथा वैधानिक प्रक्रिया से लिए गए।
दिल्ली में प्रदर्शन की योजना क्या है?
शुक्रवार का कार्यक्रम दो हिस्सों में बंटा है। दिल्ली कांग्रेस चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर विरोध करेगी। युवा कांग्रेस रायसीना रोड के पते 5 से जंतर मंतर तक मार्च करेगी। इस्तीफे की मांग दोनों मोर्चों पर एक जैसी है। सुरक्षा बढ़ाए जाने का कारण यही Mobilization बताया गया है।
जंतर मंतर दिल्ली में विरोध का पारंपरिक स्थल है। रायसीना रोड से वहां तक मार्च सत्ता केंद्र के पास से सार्वजनिक मंच तक संदेश ले जाने वाला रूट है। कार्यालय के बाहर का प्रदर्शन सीधे संस्था के द्वार पर दबाव बनाने वाला कदम है। पुलिस तैनाती सामान्य भीड़ नियंत्रण से आगे बढ़ी सुरक्षा दिखाती है। कितनी टुकड़ियां हैं, स्रोत में संख्या नहीं है।
प्रदर्शन इस्तीफा मांगने तक सीमित बताया गया है। गिरफ्तारी या अभियोजन वाली भाषा याचिका की मांगों में है, सड़क कार्यक्रम के ब्योरे में अलग से नहीं खोली गई। दोनों को मिलाकर पढ़ना चाहिए, एक ही दृश्य न मानना चाहिए।
युवा कांग्रेस की याचिका में कौन सी पांच मांगें हैं?
बृहस्पतिवार को शुरू याचिका ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने पर केंद्रित है। संगठन के अनुसार उसमें पांच प्रमुख मांगें हैं। ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटाना। उनकी गिरफ्तारी और अभियोजन की कार्रवाई। चुनावी प्रक्रिया की व्यापक जांच। मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच। पांचवीं मांग का अलग वाक्य स्रोत में नहीं टूटा, चार बिंदु स्पष्ट गिनाए गए हैं और कुल संख्या पांच बताई गई है।
अभियान को सिर्फ सोशल मीडिया तक न रखकर युवाओं और नागरिकों की व्यापक भागीदारी वाला आंदोलन बनाने की बात कही गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि इसे कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, युवा संगठनों और समुदायों तक ले जाया जाएगा। नाम ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो युवा लहजे वाला है। मांगें संस्थागत हैं। इस्तीफा, कानूनी कार्रवाई और दो तरह की जांच एक साथ रखी गई हैं।
याचिका ऑनलाइन है, मार्च सड़क पर है। दोनों एक दूसरे को बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे हैं। कॉलेज कैंपस वाला विस्तार अभी घोषणा है, नतीजा बाद का विषय है।
युवा कांग्रेस नेताओं ने क्या कहा?
राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग किसी सरकार या व्यक्ति की संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की संस्था है और इसकी जवाबदेही होनी चाहिए। यह बयान आयोग को सत्ता से अलग रखने और जवाबदेही मांगने वाला है।
उदय भानु चिब का जोर अभियान के फैलाव पर है। कॉलेज, विश्वविद्यालय, युवा संगठन और समुदाय चार حلقे बताए गए। नेता इस्तीफे को कानूनी मांग और जन अभियान दोनों से जोड़ रहे हैं। संबंधित लिंक में राहुल गांधी के इस्तीफा वाले हमले और प्रियंका गांधी की महाभियोग तथा आपराधिक मुकदमे वाली मांग का संकेत है। इस रिपोर्ट के मुख्य पाठ में वे उद्धरण पूरे नहीं हैं। इसलिए यहां उन्हीं दो नेताओं के दर्ज वाक्य रखे गए हैं।
कांग्रेस का तर्क यह है कि मतदाता सूची और एसआईआर पर सवाल इतने गंभीर हैं कि CEC पद पर नहीं रह सकते। आयोग का तर्क यह है कि आंतरिक असहमति प्रक्रिया का हिस्सा है। दोनों दावे आमने सामने हैं।
आयोग के अंदर मतभेद वाली खबर पर आधिकारिक जवाब क्या है?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के दावे के अनुसार दो निर्वाचन आयुक्तों ने 10 महीनों में मतदाता सूची और एसआईआर से जुड़े कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति की। यह समाचार पत्र का दावा है। आयुक्तों के नाम इस अंश में नहीं हैं। आपत्तियों का पूरा पाठ भी यहां नहीं है।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि आंतरिक विचार विमर्श के दौरान अलग राय और सुझाव देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। उसके मुताबिक फैसले सर्वसम्मति से और स्थापित वैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए। यानी आयोग असहमति को संकट नहीं, चर्चा मान रहा है। सर्वसम्मति वाला वाक्य 14 आपत्तियों वाले दावे के विपरीत पढ़ा जाएगा। विपक्ष उसी रिपोर्ट को इस्तीफे का आधार बना रहा है।
एसआईआर और मतदाता सूची पहले से राजनीतिक बहस में हैं। गोवा समेत राज्यों में विपक्ष ने कटौती के आरोप लगाए हैं। दिल्ली का प्रदर्शन उसी राष्ट्रीय बहस का राजधानी वाला अध्याय है। सुरक्षा बढ़ना दर्शाता है कि प्रशासन भीड़ की आशंका को गंभीर मान रहा है।
इस विरोध का अगला पड़ाव क्या हो सकता है?
शुक्रवार को कार्यालय बाहर प्रदर्शन और रायसीना से जंतर मंतर मार्च निर्धारित हैं। ऑनलाइन याचिका पहले दिन से चल रही है। चिब ने कैंपस तक ले जाने की योजना बताई। मनीष शर्मा ने जवाबदेही का सिद्धांत रखा। आयोग ने सर्वसम्मति और वैधानिक प्रक्रिया दोहराई।
इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। सड़क मांग उसे तुरंत लागू नहीं करती। गिरफ्तारी और अभियोजन वाली मांग और भी कानूनी पड़ाव मांगती है। जांच की मांग संसद, अदालत या स्वयं आयोग के दायरे में जा सकती है। स्रोत इनमें से किसी मंच का नया फैसला दर्ज नहीं करता। दर्ज है विरोध का कार्यक्रम, याचिका की रूपरेखा, दो ने ताओं के बयान, एक समाचार पत्र का दावा और आयोग की सफाई।
ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग अब दिल्ली की सड़क और युवा कांग्रेस के हैशटैग दोनों पर है। सुरक्षा घेरा कार्यालय के बाहर खड़ा है। अंदर आयोग कहता है फैसले नियम से हुए। बाहर कांग्रेस कहती है संस्था जनता की है, व्यक्ति की नहीं। दोनों वाक्य एक ही सुबह राजधानी में टकरा रहे हैं। नतीजा मार्च की भीड़, याचिका के हस्ताक्षर और आगे की कानूनी राजनीतिक चाल पर निर्भर करेगा। फिलहाल सार्वजनिक तस्वीर प्रदर्शन, बढ़ाई गई सुरक्षा और पांच सूत्री ऑनलाइन मांग तक है।
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