AAP Donations 2025-26: आम आदमी पार्टी के चंदे में इस बार बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में AAP को 12.10 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 38.10 करोड़ रुपये था। यानी पार्टी को मिलने वाला चंदा 68 फीसदी कम हो गया। दूसरी ओर, विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को कांग्रेस की तुलना में सात गुना ज्यादा चंदा मिला। भाजपा को 1472.8 करोड़ रुपये मिले, जबकि कांग्रेस के खाते में 207.17 करोड़ रुपये आए। तेलुगु देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के चंदे में भी गिरावट आई है।
AAP के चंदे में 68 फीसदी की गिरावट
आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है, उसके अनुसार 2025-26 में पार्टी को कुल 12.10 करोड़ रुपये का चंदा मिला। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह रकम 38.10 करोड़ रुपये थी। इस लिहाज से पार्टी की आमदनी में करीब दो-तिहाई की कमी आई है।
यह गिरावट इसलिए भी ध्यान खींचती है कि 2024-25 में पार्टी को मिला चंदा 2023-24 के 11.03 करोड़ रुपये से तीन गुना ज्यादा था। यानी एक साल की तेज बढ़त के बाद अगले ही साल आंकड़ा काफी नीचे आ गया।
दो स्रोतों से आया 83 फीसदी पैसा
AAP ने आयोग को बताया है कि चंदे की 83 फीसदी रकम प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और ट्राइडेंट लिमिटेड से आई है। ट्राइडेंट कंपनी पार्टी के पूर्व सांसद राजेंद्र गुप्ता की है। प्रुडेंट और ट्राइडेंट ने मिलाकर पार्टी को पांच करोड़ रुपये का चंदा दिया।
दिलचस्प बात यह है कि यह चंदा तब मिला, जब गुप्ता आम आदमी पार्टी में थे। अप्रैल में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इस तरह पार्टी के चंदे का बड़ा हिस्सा कुछ ही स्रोतों पर टिका रहा।
नेताओं ने भी दिया चंदा
आयोग के साथ साझा की गई जानकारी में पार्टी के कई नेताओं के नाम भी शामिल हैं। राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तीन बार 10-10 हजार रुपये का चंदा दिया। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने 12 बार 3500 रुपये जमा किए।
पंजाब में पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने भी 12 बार दस-दस हजार रुपये दिए। इसके अलावा पार्टी के पूर्व प्रवक्ता आशुतोष रांका ने 21 हजार रुपये का चंदा दिया। रांका अब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़ चुके हैं।
टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस का चंदा भी घटा
आंध्र प्रदेश की तेलुगु देशम पार्टी को 2025-26 में 58.25 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह पिछले साल की तुलना में 83.03 करोड़ रुपये कम है। इसमें प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने 45 करोड़ रुपये दिए, जबकि 2024-25 में ट्रस्ट का योगदान 40 करोड़ रुपये था।
वाईएसआर कांग्रेस के लिए गिरावट और तेज रही। पार्टी को 2024-25 में 140.04 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन 2025-26 में यह घटकर 24.31 करोड़ रुपये रह गया। वहीं बीजू जनता दल को 60 करोड़ रुपये का चंदा हासिल हुआ।
भाजपा को कांग्रेस से सात गुना ज्यादा चंदा
असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को 1472.8 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसके मुकाबले कांग्रेस को सिर्फ 207.17 करोड़ रुपये मिले।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 15 मार्च से चार मई के बीच भाजपा को कांग्रेस से सात गुना अधिक चंदा मिला। आयोग के मुताबिक भाजपा ने सबसे ज्यादा 96 करोड़ रुपये असम में खर्च किए। पार्टी को वहां 82 सीटें मिलीं, जो 2021 की तुलना में 22 सीट ज्यादा हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े
चंदे के ये आंकड़े राजनीतिक दलों की वित्तीय स्थिति में बड़े अंतर को दिखाते हैं। एक ओर भाजपा को चुनावी दौर में हजार करोड़ से ऊपर की रकम मिली, दूसरी ओर AAP जैसी पार्टी का सालाना चंदा 12 करोड़ रुपये पर सिमट गया।
हालांकि उपलब्ध जानकारी में AAP के चंदे में गिरावट के कारणों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस बारे में कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। पार्टी की ओर से भी अभी इस पर कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं है।
AAP Donations 2025-26: आगे क्या
चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के अनुसार 2025-26 में आम आदमी पार्टी का चंदा 38.10 करोड़ रुपये से घटकर 12.10 करोड़ रुपये रह गया, जिसका बड़ा हिस्सा प्रुडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और ट्राइडेंट लिमिटेड से आया। टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के चंदे में भी कमी दर्ज हुई, जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा को कांग्रेस से सात गुना अधिक फंड मिला। अब देखना होगा कि आने वाले समय में राजनीतिक दलों के चंदे का यह रुझान क्या मोड़ लेता है और AAP अपनी आर्थिक स्थिति को कैसे संभालती है।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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