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Odisha News: ओडिशा में तैयार हो रही हॉकी की नई पौध, 17 जिलों में 33 ग्रासरूट सेंटरों से संवर रहा भविष्य

4 नवंबर 2026
Odisha News
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Odisha News: ओडिशा में हॉकी को नई ऊंचाई देने के लिए जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को तराशने की व्यवस्थित पहल अब रंग ला रही है। राज्य में बच्चों को शुरुआती प्रशिक्षण देने से लेकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने और रोजगार उपलब्ध कराने तक का मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया गया है।

इस व्यवस्था में ओडिशा नोवल टाटा हॉकी हाई परफॉर्मेंस सेंटर (ओएनटीएचएचपीसी) अहम भूमिका निभा रहा है। टाटा स्टील और टाटा ट्रस्ट्स के संयुक्त उपक्रम हॉकी ऐस फाउंडेशन के तत्वावधान में संचालित यह केंद्र लड़के और लड़कियों दोनों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दे रहा है।

ग्रासरूट सेंटरों का विस्तार कैसे हुआ?

वर्ष 2019 में लड़कियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ इस केंद्र की शुरुआत हुई थी। 2020 में सुंदरगढ़ में आठ ग्रासरूट प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर प्रतिभाओं की तलाश शुरू की गई। 2021 में लड़कों का प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह पहल सुंदरगढ़, संबलपुर, छत्रपुर और जाजपुर समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैली। वर्तमान में 17 जिलों में 33 ग्रासरूट सेंटर और 11 ग्रास पिच सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी हॉकी का प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

आवासीय प्रशिक्षण में कितने बच्चे शामिल हैं?

केंद्र में फिलहाल करीब 70 बच्चों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें 35 लड़के और 35 लड़कियां आवासीय व्यवस्था के तहत शामिल हैं। खिलाड़ियों को रहने, खाने, शिक्षा, खेल सामग्री और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रशिक्षण व्यवस्था में एक हेड कोच, चार सहायक कोच और एक गोलकीपर कोच समेत छह प्रशिक्षक तैनात हैं। इसके अलावा करीब 30 सदस्यीय सहयोगी स्टाफ खिलाड़ियों की देखभाल और व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में जुटा है।

प्रशिक्षण कितने साल तक चलता है?

खिलाड़ियों को उनकी उम्र और क्षमता के अनुसार चार से पांच साल तक प्रशिक्षण दिया जाता है। आठ से 16 वर्ष के बच्चों को ग्रासरूट स्तर पर तैयार किया जाता है, जबकि 16 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को आवासीय उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है। इस दौरान तकनीक, रणनीति, शारीरिक क्षमता और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके बाद खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय शिविर, सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं और खेल कोटे से रोजगार के रास्ते खुलते हैं।

खिलाड़ियों की उपलब्धियां क्या हैं?

वर्ष 2019 से अब तक केंद्र के 22 कैडेट का जूनियर हॉकी इंडिया कैंप के लिए चयन हो चुका है। इनमें 11 लड़के और 11 लड़कियां शामिल हैं। वर्ष 2024 में दो, 2025 में पांच और 2026 में सात खिलाड़ियों को भारतीय शिविर में जगह मिली। हॉकी इंडिया लीग की वापसी के बाद पिछले दो वर्षों में 15 लड़कों और छह लड़कियों को विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों की ओर से खेलने का अवसर मिला है। वहीं, 23 खिलाड़ियों को विभिन्न विभागों में रोजगार मिल चुका है।

टूर्नामेंट में क्या सफलता मिली है?

ग्रासरूट स्तर पर भी ओडिशा के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा साबित की है। अंडर-14 लड़कों की टीम ने 2025 और 2026 में लगातार दो बार अखिल भारतीय केडी सिंह बाबू टूर्नामेंट का खिताब जीता। अंडर-16 टीम 2025 में एसएनबीपी टूर्नामेंट की उपविजेता रही। जूनियर महिला एकेडमी टीम ने भी 2025 और 2026 में लगातार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 2020 से अब तक 290 खिलाड़ियों का चयन विभिन्न खेल छात्रावासों में हो चुका है।

ओडिशा में हॉकी विकास की यह पहल केवल खिलाड़ियों को तैयार करने तक सीमित नहीं है। यह उन्हें राष्ट्रीय पहचान, पेशेवर करियर और रोजगार से भी जोड़ रही है। ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर देकर राज्य भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ियों की नई पौध तैयार कर रहा है। जमीनी स्तर से उच्च प्रदर्शन तक की यह व्यवस्था राज्य की हॉकी परंपरा को और मजबूत बना रही है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

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News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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