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UP Flood: कुशीनगर में नारायणी तटबंध टूटा, श्रावस्ती में 27 लोगों का रेस्क्यू

UP Flood: उत्तर प्रदेश में सितंबर के अंतिम दिनों की बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा, यमुना, सरयू और राप्ती समेत प्रमुख नदियों में पानी चढ़ने से किनारे बसे गांव और निचले इलाके दबाव में हैं। कहीं तटबंध टूटा है, कहीं लोगों को पानी से निकालना पड़ा है।

यूपी बाढ़ खतरा इसलिए गंभीर दिख रहा है क्योंकि समस्या एक जिले तक सीमित नहीं रही। कुशीनगर में नारायणी के तेज बहाव ने ततवा टोला के पास तटबंध तोड़ दिया और आसपास के गांवों में पानी घुस गया। श्रावस्ती के इकौना क्षेत्र में राप्ती चढ़ी तो मझौवा सुमाल और मध्यनगर में 27 लोग फंस गए। एसडीआरएफ की दो टीमों ने सभी को सुरक्षित निकाला।

केन्द्रीय जल आयोग की निगरानी के अनुसार प्रदेश के कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। प्रयागराज समेत नदी किनारे के जिलों में प्रशासन नजर रखे हुए है। बाढ़ संभावित इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं।

किन नदियों का जलस्तर बढ़ा है?

प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में नदियों का पानी चढ़ा दर्ज किया जा रहा है। गंगा और यमुना के साथ सरयू तथा राप्ती का बढ़ता प्रवाह नदी किनारे की बस्तियों के लिए चुनौती बना है। निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बना हुआ है। जहां नदी पहले से पूर्णता के करीब बह रही हो, वहां थोड़ी और बढ़ोतरी भी घरों, खेतों और सड़कों तक पहुंच जाती है।

केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़ों का हवाला देकर यही बताया गया है कि उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। खतरे का निशान पार होना चेतावनी है कि किनारे की सामान्य गतिविधियां जोखिम में आ सकती हैं। स्रोत में हर स्टेशन का अलग आंकड़ा नहीं दिया गया, इसलिए जिलेवार सेंटीमीटर का दावा नहीं किया जा सकता। कुल तस्वीर यही है कि निगरानी वाले कई बिंदु लाल दायरे में हैं।

बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी का संयुक्त असर सितंबर के आखिरी पड़ाव में दिख रहा है। ऐसी स्थिति में प्रशासन का जोर लोगों को समय रहते सचेत करने और फंसने की सूचना पर तुरंत रेस्क्यू भेजने पर है।

कुशीनगर में तटबंध कहां टूटा और क्या असर हुआ?

कुशीनगर में नारायणी नदी का तेज बहाव सामने आया। ततवा टोला के पास तटबंध टूट गया। इसके बाद आसपास के कई गांवों में पानी पहुंच गया। तटबंध नदी के पानी को बस्ती से अलग रखने वाला ढांचा होता है। उसके टूटते ही धार सीधे आबादी की ओर मुड़ सकती है। यही क्रम यहां दर्ज हुआ।

प्रशासन ने राहत और बचाव तेज किया। मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं। टूटे तटबंध वाले इलाके में काम दोतरफा होता है। एक तरफ फंसे लोगों और प्रभावित परिवारों तक पहुंचना, दूसरी तरफ पानी की दिशा और आगे फैलाव पर नजर रखना। स्रोत में कितने गांव पूरी तरह डूबे, कितने घर प्रभावित हुए या कितना कृषि क्षेत्र जलमग्न हुआ, यह संख्या उपलब्ध नहीं है। पुष्ट बात इतनी है कि कई गांवों में पानी घुस चुका है और बचाव दल मौजूद हैं।

नारायणी पूर्वी उत्तर प्रदेश की संवेदनशील नदी प्रणालियों से जुड़ी है। तेज बहाव के समय तटबंध पर दबाव बढ़ जाता है। एक बिंदु के कमजोर पड़ते ही आसपास की बस्तियां सबसे पहले प्रभावित होती हैं। ततवा टोला इसी वजह से चर्चा में आया।

श्रावस्ती में 27 लोग कैसे फंसे और कौन बचा लाया?

यूपी में नदियों के उतार-चढ़ाव के बीच जनजीवन अस्त-व्यस्त, कच्चा मकान और  दीवारें ढहने से कई लोगों ने गंवाई जान - up floods rivers fluctuate lives  disrupted deaths reportedश्रावस्ती के इकौना क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा और बाढ़ जैसे हालात बने। मझौवा सुमाल तथा मध्यनगर में कुल 27 लोग पानी में फंस गए। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की दो टीमों ने रेस्क्यू किया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

यह विवरण राहत कार्य की स्पष्ट तस्वीर देता है। फंसने की खबर आई, दो टीमें गईं और 27 लोगों को निकाल लिया गया। स्रोत में चोटिलों या लापता लोगों का उल्लेख नहीं है। इसलिए अतिरिक्त दावा नहीं किया जा सकता। कामयाब रेस्क्यू बताता है कि स्थानीय सूचना तंत्र और एसडीआरएफ की उपलब्धता काम आई।

राप्ती तराई के जिलों में बार बार चर्चा में रहती है क्योंकि मैदानी ढाल कम होने पर पानी फैलता है। इकौना क्षेत्र में जलस्तर बढ़ने से सामान्य आवाजाही मुश्किल हो सकती है। ऐसे में नाव या विशेष दल के बिना बाहर निकलना जोखिम भरा होता है। प्रशासन का संदेश यही है कि पानी बढ़ने पर स्वयं जोखिम न लिया जाए और आधिकारिक टीम का इंतजार किया जाए।

प्रयागराज और अन्य किनारे वाले जिलों में क्या स्थिति है?

गंगा और यमुना के जलस्तर को लेकर प्रयागराज समेत नदी किनारे के जिलों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। इससे पहले बढ़ते जलस्तर का असर शहर के निचले इलाकों और नदी किनारे के क्षेत्रों में दिख चुका है। संगम नगरी में दोनों बड़ी नदियां मिलती हैं, इसलिए किसी एक नदी की बढ़ोतरी भी निचले मोहल्लों तक पहुंच सकती है।

यह खंड चेतावनी और निगरानी वाला है, कुशीनगर जैसी तटबंध दुर्घटना का नया ब्योरा प्रयागराज के लिए स्रोत में नहीं है। मतलब शहर में फिलहाल वही सावधानी लागू है जो बढ़ते गेज के समय रहती है। किनारे की बस्तियां, घाट वाले इलाके और निचली कॉलोनियां सबसे संवेदनशील मानी जाती हैं।

प्रदेश स्तर पर तस्वीर तीन परत की है। पहली परत नदियों का सामान्य से अधिक प्रवाह और कई स्थानों पर खतरे का निशान पार करना। दूसरी परत कुशीनगर में तटबंध टूटना और गांवों में पानी घुसना। तीसरी परत श्रावस्ती में फंसे 27 लोगों का सफल रेस्क्यू। तीनों परतें मिलाकर यूपी बाढ़ खतरा एक जिले की खबर नहीं रह जाती।

प्रशासन क्या कर रहा है और लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रखा गया है। जहां पानी बढ़ने से लोगों के फंसने की सूचना मिल रही है, वहां एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू कर रही हैं। नदी किनारे बसे लोगों से कहा जा रहा है कि वे सतर्क रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

निर्देश आमतौर पर ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान, अनावश्यक आवाजाही से परहेज और आधिकारिक चेतावनी पर ध्यान देने से जुड़े होते हैं। स्रोत में राहत शिविरों की संख्या, राशन वितरण या मुआवजे की घोषणा नहीं है। इसलिए राहत पैकेज का उल्लेख नहीं किया जा सकता। पुष्ट कार्रवाई बचाव दलों की तैनाती, कुशीनगर में टीमों की मौजूदगी और श्रावस्ती का रेस्क्यू है।

यूपी बाढ़ खतरा उन परिवारों के लिए सबसे व्यावहारिक है जो नदी के पास रहते हैं या निचले खेतों पर निर्भर हैं। तटबंध टूटने के बाद पानी की दिशा बदल सकती है। राप्ती जैसी नदी में अचानक फैलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में देर से निकलना नुकसान बढ़ाता है। श्रावस्ती का उदाहरण दिखाता है कि समय पर सूचना और दो टीमों के पहुंचने से 27 लोग सुरक्षित निकाले जा सके।

आने वाले घंटों और दिनों में जलस्तर की निगरानी जारी रहेगी। केन्द्रीय जल आयोग के गेज और जिला प्रशासन की स्थानीय रिपोर्ट ही आगे की तस्वीर तय करेंगी। फिलहाल तय तथ्य ये हैं कि कई नदियां उफान पर हैं, कुशीनगर में नारायणी का तटबंध ततवा टोला के पास टूटा है, गांवों में पानी घुसा है, श्रावस्ती में 27 लोगों को एसडीआरएफ ने बचाया है और प्रयागराज समेत किनारे वाले जिले निगरानी में हैं।

यूपी बाढ़ खतरा अभी चेतावनी और सक्रिय बचाव के चरण में है। जो परिवार किनारे पर हैं उन्हें आधिकारिक अपडेट पर टिके रहना चाहिए। पानी घटने या और बढ़ने का अंतिम हिसाब अगली आधिकारिक रिपोर्ट से ही आएगा।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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