TMC Bank Account Freeze: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें लेन-देन पर रोक वाले चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी गई थी। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये बताए गए हैं। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने पहले ही ऐसी अंतरिम अनुमति देने से मना कर दिया था। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह मामले के गुण-दोष पर विचार नहीं कर रही है। साथ ही उसने हाईकोर्ट से मामले की सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया।
TMC Bank Account Freeze: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
पीठ ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इच्छुक नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर विचार करने से परहेज कर रही है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न पर रोक लगाई है। इसलिए इन खातों में मौजूद रकम पर अधिकार किसका है, यह बड़ा सवाल अभी न्यायिक फैसले के लिए लंबित है। इसी कारण पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में दखल देना उचित नहीं समझा।
हाईकोर्ट से जल्द सुनवाई का अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करने के साथ कलकत्ता हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह मामले की सुनवाई तेज करे। यानी मूल विवाद का निपटारा अब हाईकोर्ट में होना है।
हाईकोर्ट कब तक सुनवाई पूरी करेगा और अगली तारीख क्या होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध सूचना में नहीं है। इसलिए खातों पर रोक कब तक जारी रहेगी, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
27 अगस्त को हाईकोर्ट ने किया था इनकार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट को चार बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये हैं और इनमें लेन-देन पर रोक लगी है।
हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसी राहत उसके पहले के उस आदेश को कमजोर कर देगी, जिसके तहत राजनीतिक दल से जुड़ा मामला चल रहा है। इस टिप्पणी का पूरा ब्योरा उपलब्ध रिपोर्ट में अधूरा है, इसलिए इसका विस्तार यहां नहीं दिया जा रहा।
कंचन गुप्ता की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि ममता बनर्जी फ्रीज किए गए खातों को दोबारा चालू कराने के लिए इतनी बेताब क्यों हैं।
गुप्ता ने कहा कि अगर पैसों की इतनी तंगी है, तो वह पेंटिंग बनाकर या कविताएं लिखकर बड़ी रकम जुटा सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी ने अपनी पेंटिंग भारी कीमत पर बेची थीं। यह टिप्पणी गुप्ता की निजी राय है और इसकी पुष्टि के लिए रिपोर्ट में कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया। टीएमसी की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।
आगे क्या
अब सबकी नजर कलकत्ता हाईकोर्ट पर रहेगी, जहां चुनाव चिह्न विवाद और खातों पर अधिकार का मामला तय होना है। सुप्रीम कोर्ट के अनुरोध के बाद सुनवाई में तेजी की उम्मीद है।
तब तक चार खातों में जमा करीब 804 करोड़ रुपये पर रोक बनी रहेगी। इस फैसले के राजनीतिक असर और टीएमसी की आगे की कानूनी रणनीति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के ममता बनर्जी गुट की याचिका खारिज कर दी, जिसमें करीब 804 करोड़ रुपये वाले चार फ्रीज खाते चलाने की अनुमति मांगी गई थी। पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 27 अगस्त के आदेश में दखल से इनकार किया और गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की। चुनाव चिह्न पर रोक के कारण खातों पर अधिकार का सवाल लंबित है। अदालत ने हाईकोर्ट से सुनवाई तेज करने को कहा है। कंचन गुप्ता की टिप्पणी पर राजनीतिक चर्चा जारी है।
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Sanjana Gupta
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