Mumbai: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बाजार दबाव में रहा। एक समय सेंसेक्स करीब 1,200 अंक टूटकर 71,292 के स्तर तक पहुंच गया, जो उसका नया 52-सप्ताह का निचला स्तर है। वहीं, निफ्टी 50 करीब 400 अंक गिरकर 22,300 के नीचे चला गया।
हालांकि बाद में बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की, लेकिन दोपहर 3:12 बजे सेंसेक्स 700 से अधिक अंक नीचे 71,800 के आसपास, जबकि निफ्टी करीब 260 अंक गिरकर 22,400 के नीचे कारोबार कर रहा था।
इस तेज गिरावट से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक समय करीब ₹10 लाख करोड़ घट गया था। बाद में नुकसान कुछ कम हुआ और बाजार पूंजीकरण में गिरावट करीब ₹6 लाख करोड़ रही।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
बाजार की गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में करीब 2% की गिरावट आई। वहीं, बाजार में डर का स्तर दिखाने वाला India VIX 12% से ज्यादा बढ़कर 15.15 पर पहुंच गया।
ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निफ्टी ऑटो में 4% से ज्यादा की गिरावट आई। इसके अलावा मेटल, रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स समेत कई सेक्टर इंडेक्स 2-3% तक टूटे।
एमएंडएम, मारुति सुजुकी, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईटीसी, एचयूएल और BEL जैसे शेयर दबाव में रहे। वहीं एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक करीब 1% की बढ़त के साथ बाजार की गिरावट के बीच मजबूती दिखाने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।
आखिर बाजार क्यों गिरा? ये 5 बड़े कारण
1. FII की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की लगातार बिकवाली बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बना रही है।
NSE के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को एक ही कारोबारी सत्र में भारतीय शेयरों से ₹10,148 करोड़ की शुद्ध निकासी की। इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी उन्होंने करीब ₹10,743 करोड़ की बिकवाली की थी।
इस तरह इस सप्ताह बुधवार तक FII की कुल बिकवाली करीब ₹26,000 करोड़ पहुंच गई। विदेशी निवेशकों की इतनी बड़ी बिकवाली से बाजार में सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।
2. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी दुनियाभर के इक्विटी बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।
अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 5.31% तक पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्च स्तर बताया जा रहा है। सितंबर तिमाही में इसमें 87 बेसिस पॉइंट से ज्यादा की वृद्धि हुई।
जब अमेरिकी बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट एसेट अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे उभरते बाजारों जैसे भारत से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है।

3. रुपये में कमजोरी
डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा।
रुपया करीब 0.16% कमजोर होकर 95.9850 प्रति डॉलर पर पहुंच गया और 96 के स्तर के ऊपर बना रहा।
कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार में निवेश के रिटर्न पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। बाजार विशेषज्ञों ने भी निकट अवधि में रुपये को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।
4. ऑटो शेयरों में जोरदार गिरावट
आज बाजार की गिरावट को ऑटो सेक्टर की बिकवाली ने और बढ़ाया।
सितंबर के ऑटो बिक्री आंकड़े बाजार की उम्मीदों के मुताबिक मजबूत नहीं रहे। कम बेस के बावजूद कई कंपनियों के बिक्री आंकड़े निवेशकों को प्रभावित नहीं कर सके।
एमएंडएम और मारुति सुजुकी जैसे बड़े ऑटो शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। सितंबर 2025 में GST सुधारों से पहले खरीदारी टलने के कारण बेस पहले ही कमजोर था, इसलिए इस साल की बिक्री में बढ़ोतरी के बावजूद बाजार की उम्मीदें पूरी नहीं हुईं।
5. निफ्टी के अहम टेक्निकल स्तर टूटे
बाजार में बिकवाली बढ़ने के साथ निफ्टी ने कई महत्वपूर्ण तकनीकी सपोर्ट स्तर तोड़ दिए।
बुधवार को निफ्टी 22,620 पर बंद हुआ था। तकनीकी विश्लेषकों ने 22,500 को पहला अहम सपोर्ट बताया था। इसके नीचे जाने के बाद इंडेक्स के 22,400 और फिर 22,300 की तरफ जाने का जोखिम बताया गया था।
गुरुवार को निफ्टी इन स्तरों के नीचे चला गया, जिससे तकनीकी आधार पर भी बिकवाली बढ़ी और बाजार में कमजोरी गहरी हुई।
आगे बाजार का क्या रुख रह सकता है?
लगातार बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार लगातार आठवें सप्ताह नुकसान की ओर बढ़ रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह 2001 के डॉट-कॉम क्रैश के बाद पहली बार होगा जब बाजार में इतनी लंबी अवधि तक साप्ताहिक गिरावट देखने को मिलेगी।
मार्केट रणनीतिकारों के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, FII की बिकवाली, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतें आगे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।
कुछ बाजार विशेषज्ञ मौजूदा कमजोरी को अल्पकालिक चरण मान रहे हैं और उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट तथा वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से बाजार को राहत मिल सकती है।
नोट: यह खबर बाजार की मौजूदा गतिविधियों और विभिन्न बाजार विशेषज्ञों के बयानों पर आधारित है। इसे निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।
