Main Door Vastu Tips: घर बनाते या सजाते समय ज्यादातर लोग रंग, फर्नीचर और इंटीरियर पर ध्यान देते हैं, लेकिन वास्तुशास्त्र में सबसे ज्यादा अहमियत मुख्यद्वार को दी गई है। मुख्यद्वार वास्तु टिप्स के मुताबिक घर की एंट्री से ही ऊर्जा अंदर और बाहर आती-जाती है। इसलिए इस हिस्से से जुड़ी छोटी-छोटी बातों को अनदेखा करना ठीक नहीं माना जाता।
वास्तुशास्त्र में मुख्यद्वार से जुड़ी पांच बातें खास तौर पर गिनाई गई हैं। इनमें दरवाजे के सामने कूड़ा न रखना, दरवाजे से आवाज न आना, आसपास जूते-चप्पल न बिखरे होना, दरवाजे का अंदर की ओर खुलना और शाम के बाद पर्याप्त रोशनी रखना शामिल है। मान्यता है कि इनकी अनदेखी से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है। हालांकि ये बातें वास्तु की मान्यताओं पर आधारित हैं।
Main Door Vastu Tips: मुख्यद्वार को क्यों माना जाता है इतना अहम
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का मुख्यद्वार केवल आने-जाने का रास्ता नहीं है। इसे वह जगह माना गया है, जहां से ऊर्जा घर में प्रवेश करती है और बाहर निकलती है। इसी वजह से इस हिस्से के लिए अलग से कई नियम तय किए गए हैं।
इन नियमों का मकसद एंट्री को साफ, व्यवस्थित और सुखद बनाए रखना बताया जाता है। जानकारों का कहना है कि जब प्रवेश द्वार सलीके से रखा जाता है, तो घर में आने वाले व्यक्ति पर भी अच्छा असर पड़ता है। आइए एक-एक करके उन पांच बातों को समझते हैं।
मुख्यद्वार के सामने न रखें कूड़ा
वास्तु नियमों में सबसे पहले सफाई पर जोर दिया गया है। घर के मुख्यद्वार के ठीक सामने किसी भी तरह का कूड़ा नहीं रखना चाहिए। इसके आसपास गंदगी जमा होने देना भी सही नहीं माना जाता।
वजह यह बताई जाती है कि ऊर्जा इसी द्वार से अंदर और बाहर जाती है। ऐसे में यह जगह हमेशा साफ-सुथरी रहनी चाहिए। रोजमर्रा के स्तर पर भी देखें तो गंदा प्रवेश द्वार घर की पहली छवि बिगाड़ देता है।
दरवाजे से न आए तेज आवाज
अगर मुख्यद्वार का गेट या दरवाजा खोलते समय तेज आवाज आती है, तो वास्तु में इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं बताया गया है। मान्यता है कि आवाज करने वाले दरवाजों को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।
इसका समाधान भी सरल है। दरवाजे को ठीक करवाया जा सकता है। चाहें तो कब्जों में खुद तेल डालकर भी आवाज को दूर किया जा सकता है। यह उपाय घर के रखरखाव के लिहाज से भी फायदेमंद है।
दरवाजे के पास बिखरे न हों जूते-चप्पल
वास्तुशास्त्र के नियम के हिसाब से मुख्यद्वार पर जूते-चप्पल बिखरे हुए नहीं होने चाहिए। ऐसा होने पर प्रवेश द्वार अच्छा नहीं दिखता। साथ ही माना जाता है कि इससे घर में अच्छी ऊर्जा का प्रवाह भी बाधित होता है।
इसके लिए शू-रैक का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। रैक को दरवाजे से थोड़ी दूरी पर रखना बेहतर बताया जाता है। इस तरह जूते-चप्पल करीने से रखे रहते हैं और एंट्री भी साफ दिखती है।
किस दिशा में खुले मुख्यद्वार का दरवाजा
मुख्यद्वार का दरवाजा किस ओर खुलता है, इस पर वास्तु में विशेष ध्यान देने को कहा गया है। नियम के अनुसार घर के मुख्यद्वार का दरवाजा हमेशा अंदर की ओर खुलना चाहिए। इसे शुभ माना जाता है।
इसके उलट जो दरवाजा या गेट बाहर की ओर खुलता है, उसे वास्तु में शुभ नहीं माना गया है। नया घर लेने या बनवाने वाले लोग अक्सर इस नियम को ध्यान में रखकर दरवाजे की बनावट तय करते हैं।
शाम के बाद मुख्यद्वार पर हो पर्याप्त रोशनी
वास्तुशास्त्र के अनुसार शाम के बाद मुख्यद्वार पर अच्छी रोशनी होनी चाहिए। अगर मेनगेट पर अंधेरा रहता है या बहुत कम रोशनी वाली लाइट लगी है, तो इसे सही नहीं माना जाता।
साफ और पर्याप्त रोशनी वाली लाइट घर के एंट्रेंस को सकारात्मक बनाती है, ऐसा वास्तु की मान्यता है। व्यावहारिक नजरिए से देखें तो रोशन प्रवेश द्वार सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से भी बेहतर रहता है।
मान्यता और सावधानी
ये सभी बातें वास्तुशास्त्र की परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके असर को लेकर कोई वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। इसलिए इन्हें सलाह के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
वास्तु से जुड़ी जानकारियों के साथ आमतौर पर यह डिस्क्लेमर भी दिया जाता है कि इन्हें पूरी तरह सटीक मानने का दावा नहीं किया जा सकता। घर में कोई बड़ा बदलाव कराने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
छोटे बदलाव, बड़ा फर्क
इन पांच नियमों की खास बात यह है कि इन्हें अपनाने के लिए किसी बड़े खर्च या तोड़फोड़ की जरूरत नहीं पड़ती। कूड़ा हटाना, कब्जों में तेल डालना, शू-रैक लगाना और बल्ब बदलना जैसे काम आसानी से हो जाते हैं।
अगर किसी घर में दरवाजा बाहर की ओर खुलता है, तो उसे बदलवाने का फैसला जरूर सोच-समझकर और विशेषज्ञ की सलाह से लेना चाहिए। बाकी बातें रोजमर्रा की आदतों में शामिल करके घर के प्रवेश द्वार को साफ और व्यवस्थित रखा जा सकता है।
वास्तुशास्त्र में घर के मुख्यद्वार को ऊर्जा के आने-जाने का रास्ता माना गया है। इसी कारण पांच बातों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। द्वार के सामने कूड़ा और आसपास गंदगी न हो, दरवाजा आवाज न करे, जूते-चप्पल बिखरे न हों, दरवाजा अंदर की ओर खुले और शाम के बाद पर्याप्त रोशनी रहे। ये नियम मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की राय लेना उचित रहेगा। फिर भी सफाई, रखरखाव और रोशनी जैसी बातें हर घर के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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