Delhi Metro: राजधानी में शुक्रवार को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने बताया कि यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी। इसमें राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, पटेल चौक और नई दिल्ली जैसे व्यस्त स्टेशन शामिल हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया है और नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। इलाके में पुलिस, अर्द्धसैनिक बलों और दंगा नियंत्रण वाहनों की तैनाती की गई है। दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद होने से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को दिक्कत हो सकती है।
Delhi Metro: डीएमआरसी ने किन स्टेशनों पर रोकी एंट्री और एग्जिट
डीएमआरसी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की है। इसके मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए नई दिल्ली जिले के 11 स्टेशनों पर यात्रियों का प्रवेश और निकास आज अगले आदेश तक बंद रहेगा।
जिन स्टेशनों पर यह पाबंदी लगी है, उनमें जनपथ, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और राजीव चौक शामिल हैं। इनके अलावा सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली स्टेशन भी सूची में हैं। यानी मध्य दिल्ली के लगभग सभी अहम मेट्रो स्टेशनों पर आम यात्री न तो उतर पाएंगे और न ही चढ़ पाएंगे।
इंटरचेंज की सुविधा बरकरार, पर सीमित राहत
डीएमआरसी ने साफ किया है कि राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इसका मतलब है कि इन स्टेशनों पर ट्रेन बदलने वाले यात्री एक लाइन से दूसरी लाइन पर जा सकेंगे।
हालांकि यह राहत सीमित है। जिन यात्रियों को इन स्टेशनों पर उतरकर बाहर निकलना है या यहां से मेट्रो में सवार होना है, उन्हें दूसरे विकल्प तलाशने होंगे। दफ्तर, कोचिंग, अस्पताल या बाजार जाने वाले लोगों को आसपास के खुले स्टेशनों का सहारा लेना पड़ सकता है। ऐसे में यात्रा का समय बढ़ना तय माना जा रहा है।
किस मांग को लेकर बुलाया गया है प्रदर्शन
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा आम आदमी पार्टी, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और इंडियन यूथ कांग्रेस ने की है। इन संगठनों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य मुद्दों को भी उठाया जा रहा है। ये दल इन्हीं आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग के प्रमुख से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं। अब तक उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का ब्योरा सामने नहीं आया है।
गांधी जयंती पर प्रस्तावित कार्यक्रम और आयोजक
यह प्रदर्शन गांधी जयंती के दिन रखा गया है। आइसा, राज्यसभा सदस्य मनोज झा और सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी इस विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। कार्यक्रम शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू होना प्रस्तावित है।
जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में धरना-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी अनुमान के आधार पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
पुलिस ने नहीं दी अनुमति, बढ़ाई गई सुरक्षा
दिल्ली पुलिस ने गांधी जयंती पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही नई दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
राजधानी में पुलिस के साथ केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के जवान भी मौजूद हैं। जंतर-मंतर के आसपास दंगा नियंत्रण वाहन खड़े किए गए हैं। सुरक्षा बढ़ाने का मकसद किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकना बताया जा रहा है। यही वजह है कि मध्य दिल्ली के मेट्रो स्टेशनों पर भी आवाजाही रोकी गई है।
धारा 163 के तहत क्या-क्या है प्रतिबंधित
एक अधिकारी के मुताबिक प्रदर्शन से पहले पूरे नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई है। यह प्रावधान पहले की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 की जगह लेने वाला माना जाता है।
इस आदेश के तहत पूर्व लिखित अनुमति के बिना पांच या उससे अधिक लोग सार्वजनिक स्थान पर इकट्ठा नहीं हो सकते। सभा, जुलूस, प्रदर्शन, घेराव और धरने पर भी रोक है। नारे लगाने और भाषण देने की भी मनाही है। इसके अलावा हथियार, बैनर, तख्तियां, लाठियां, तलवारें, छड़ें, ईंट-पत्थर या इसी तरह की अन्य वस्तुएं साथ ले जाने पर पाबंदी लगाई गई है।
यात्रियों के लिए क्या है सलाह और आगे क्या
फिलहाल डीएमआरसी ने स्टेशन खुलने की कोई समय-सीमा नहीं बताई है। रोक अगले आदेश तक लागू है, इसलिए हालात के हिसाब से इसमें बदलाव हो सकता है। यात्रियों के लिए बेहतर होगा कि वे घर से निकलने से पहले डीएमआरसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ताजा जानकारी जरूर देख लें।
जिन लोगों को मध्य दिल्ली के इन स्टेशनों से सफर करना है, उन्हें अतिरिक्त समय लेकर चलना चाहिए। जरूरी काम वाले यात्री वैकल्पिक रास्तों और खुले स्टेशनों की योजना पहले से बना लें। प्रदर्शन के दिन प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।
राजनीतिक टकराव के बीच आम यात्रियों पर असर
इस पूरे घटनाक्रम का एक पहलू राजनीतिक है और दूसरा सीधे आम नागरिकों से जुड़ा है। एक तरफ विपक्षी दल और छात्र संगठन अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। दूसरी तरफ प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रहा है।
इन दोनों के बीच सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ता है, जो रोज मेट्रो से अपने काम पर जाते हैं। राजीव चौक और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट जैसे स्टेशनों पर आम दिनों में भारी भीड़ रहती है। ऐसे में इन्हें बंद करने का असर आसपास के बाजारों और दफ्तरों तक दिखने की आशंका है। प्रदर्शन कितनी देर चलेगा और स्टेशन कब तक बंद रहेंगे, यह आने वाले घंटों की स्थिति पर निर्भर करेगा।
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के कारण राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और नई दिल्ली समेत 11 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट अगले आदेश तक बंद है। राजीव चौक, मंडी हाउस, नई दिल्ली और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर सिर्फ इंटरचेंज की सुविधा चालू रहेगी। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाया गया है। पुलिस अनुमति से इनकार कर चुकी है और पूरे नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू है। सुरक्षा बलों की तैनाती भी बढ़ाई गई है। यात्रियों को डीएमआरसी की ताजा सूचना देखकर ही यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
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Sanjana Gupta
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