CM Hemant Soren: झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने सोरेन की शिकायत पर दर्ज FIR के आधार पर अपने खिलाफ शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान सोरेन के वकील ने कार्यवाही टालने की मांग की। अदालत ने पाया कि पहले भी कई बार ऐसी मांग की जा चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय तो दे दिया, लेकिन जुर्माना भी लगा दिया। हेमंत सोरेन पर जुर्माने की यह रकम झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण में जमा करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
सुनवाई टालने की मांग पर अदालत सख्त
गुरुवार को मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में हुई। सोरेन के वकील ने सुनवाई आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। कोर्ट ने इस दौरान गौर किया कि प्रतिवादी पक्ष की ओर से पहले भी कई मौकों पर सुनवाई टालने की मांग की जा चुकी है।
अदालत ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध स्वीकार कर लिया। मगर इसके साथ ही प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोक दिया। कोर्ट ने सोरेन के वकील को साफ निर्देश दिया कि तय समय-सीमा के भीतर जवाब हर हाल में दाखिल किया जाए।
जुर्माने की रकम कहां होगी जमा
हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि जुर्माने की राशि झारखंड राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (JSLSA) के पास जमा कराई जाए। यह संस्था राज्य में जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का काम करती है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर की तारीख तय की है। तब तक सोरेन की ओर से जवाब दाखिल होना जरूरी होगा। इसलिए अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि निर्धारित समय में जवाब कोर्ट में पेश होता है या नहीं।
2024 में ED की कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ साल 2024 की घटना में है। उस समय मनी-लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसी सिलसिले में एजेंसी ने दिल्ली में उनके आवास की तलाशी ली थी।
इस कार्रवाई के बाद मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया। सोरेन ने जांच एजेंसी के अफसरों के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। यहीं से यह मामला झारखंड हाई कोर्ट तक पहुंचा।
रांची के SC/ST थाने में दर्ज कराई गई थी FIR
कार्रवाई से नाराज होकर सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को रांची के SC/ST थाने में ED के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी के अधिकारी उन्हें परेशान कर रहे हैं।
सोरेन का कहना था कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वे आदिवासी समुदाय से आते हैं। इसी आधार पर उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, यानी SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
चार ED अधिकारियों के नाम FIR में शामिल
FIR में ED के चार अधिकारियों के नाम दर्ज कराए गए थे। इनमें कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल शामिल हैं। सोरेन ने इन चारों के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस थाने की ओर से इन अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उन्हें इसी FIR के संबंध में जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। इसी नोटिस को अधिकारियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
4 मार्च 2024 को कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने 4 मार्च 2024 को हेमंत सोरेन और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। अदालत ने दोनों पक्षों से इस मामले में जवाब मांगा था।
उसी समय कोर्ट ने एक अहम निर्देश भी दिया था। आदेश में कहा गया था कि मामले की सुनवाई के दौरान ED अधिकारियों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। यह राहत अब तक अधिकारियों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती रही है।
अब आगे क्या होगा
सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अब कोर्ट ने नई समय-सीमा तय की है। इसके बाद 2 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। उस दिन अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुन सकती है।
फिलहाल जुर्माने के बाद यह साफ है कि हाई कोर्ट बार-बार की तारीखें मांगे जाने को लेकर सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि अब तक की जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि अधिकारियों की याचिका पर अंतिम फैसला कब तक आएगा। इस पर स्थिति अगली सुनवाई के बाद ही साफ हो सकेगी।
झारखंड हाई कोर्ट ने बार-बार सुनवाई टालने की मांग पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला ED अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा, अनुपम कुमार और अमन पटेल की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने सोरेन की शिकायत पर SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR और उसके बाद जारी नोटिस को चुनौती दी है। कोर्ट ने जवाब के लिए अतिरिक्त समय दिया है, मगर तय समय-सीमा में जवाब दाखिल करना जरूरी होगा। जुर्माने की राशि JSLSA में जमानी है। अब सभी की नजर 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।
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Sanjana Gupta
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