Odisha News: ओडिशा सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए आयोग का गठन किया। यह आयोग स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों यानी एसईबीसी की स्थिति का अध्ययन करेगा। अध्ययन में इन वर्गों की संख्यात्मक ताकत, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक पिछड़ेपन की सीमा शामिल होगी। आयोग का नेतृत्व सेवानिवृत्त ओडिशा हाईकोर्ट न्यायाधीश जस्टिस प्रमाथ पटनायक करेंगे। इस संबंध में एसटी और एससी विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने अधिसूचना जारी की है।
आयोग का गठन और उद्देश्य
सरकार ने इस आयोग को एसईबीसी समुदाय की मौजूदा स्थिति का आकलन करने का जिम्मा सौंपा है। स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं में इन वर्गों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। संख्यात्मक ताकत और राजनीतिक पिछड़ेपन के स्तर को जानने के लिए अध्ययन कराया जा रहा है। यह कदम राज्य में अगले साल होने वाले चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगले साल पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव
आयोग के गठन का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में अगले वर्ष पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव होने हैं। स्थानीय स्वशासन की इन संस्थाओं में एसईबीसी की स्थिति का अध्ययन चुनावों से पहले की तैयारी का हिस्सा लग रहा है। सरकार ने विभाग के माध्यम से अधिसूचना जारी कर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रमाथ पटनायक
आयोग के प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त ओडिशा हाईकोर्ट न्यायाधीश जस्टिस प्रमाथ पटनायक को नियुक्त किया गया है। उनकी अध्यक्षता में अध्ययन पूरा किया जाएगा। विभाग ने इस बाबत आधिकारिक अधिसूचना जारी की है जिसमें आयोग के गठन का जिक्र है।
अध्ययन के मुख्य बिंदु
आयोग संख्यात्मक ताकत का आकलन करेगा ताकि एसईबीसी की वास्तविक संख्या का पता चल सके। राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मौजूदा स्थिति भी अध्ययन का हिस्सा होगी। साथ ही राजनीतिक पिछड़ेपन की सीमा को समझा जाएगा। ये तीन पहलू स्थानीय स्वशासन संस्थाओं से जुड़े हैं।
विभाग द्वारा जारी अधिसूचना
एसटी और एससी विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने बुधवार को यह अधिसूचना जारी की। इसमें आयोग के गठन और उसके कार्यक्षेत्र का उल्लेख किया गया है। सरकार का यह कदम एसईबीसी समुदाय से संबंधित आंकड़े जुटाने की दिशा में है।
स्थानीय स्वशासन में प्रतिनिधित्व
अध्ययन का फोकस स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं पर रहेगा। इनमें पंचायत और नगरीय निकाय शामिल हैं। इन संस्थाओं में एसईबीसी की भागीदारी और प्रतिनिधित्व की स्थिति का जायजा लिया जाएगा। संख्या और पिछड़ेपन के आंकड़े भविष्य की नीतियों के लिए आधार बन सकते हैं।
चुनावों के संदर्भ में महत्व
अगले वर्ष होने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए यह अध्ययन महत्वपूर्ण है। राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति जानने से संबंधित चर्चाओं को बल मिल सकता है। सरकार ने समय रहते आयोग गठित कर अध्ययन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एसईबीसी की स्थिति का आकलन
सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करना आयोग का मुख्य काम है। संख्यात्मक ताकत और पिछड़ेपन की सीमा दोनों को देखा जाएगा। यह आकलन स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व से जुड़ा है।
ओडिशा सरकार द्वारा गठित यह आयोग स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में एसईबीसी की संख्या, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक पिछड़ेपन का अध्ययन करेगा। सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रमाथ पटनायक इसकी अध्यक्षता करेंगे। एसटी और एससी विकास विभाग ने अधिसूचना जारी की है। अगले वर्ष पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव होने हैं इसलिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अध्ययन से इन वर्गों की मौजूदा स्थिति का स्पष्ट आंकड़ा मिल सकता है। सरकार का यह कदम स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को समझने की दिशा में है। आयोग के निष्कर्ष आगे की प्रक्रिया में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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