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Petrol-Diesel Price 17 Oct 2026: पेट्रोल-डीजल के रेट में क्या हुआ बदलाव? जानें अपने शहर का ताजा अपडेट

Petrol-Diesel Price 17 Oct 2026: शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को देशभर में पेट्रोल की कीमतें स्थिर रहीं। सुबह 6 बजे होने वाली नियमित रिविजन के बाद भी प्रमुख शहरों में कोई बदलाव नहीं आया। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर पर बना हुआ है, जबकि मुंबई में यह ₹111.21 और बेंगलुरु में ₹111.68 प्रति लीटर है। हैदराबाद में सबसे ज्यादा रेट ₹116.15 दर्ज किया गया है। ये आंकड़े तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी ताजा दरों पर आधारित हैं, जिन्हें कई ऑटो पोर्टल भी ट्रैक कर रहे हैं।

पिछले कई दिनों से दामों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक स्थिति की वजह से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार में हलचल बनी हुई है। आम वाहन मालिकों के लिए फिलहाल कीमतों का स्थिर रहना राहत की बात है, लेकिन राज्य स्तर के टैक्स की वजह से शहरों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

आज प्रमुख भारतीय शहरों में पेट्रोल का रेट क्या है?

पेट्रोल की कीमतें जगह-जगह अलग-अलग हैं। राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के एनसीआर इलाकों में रेट अपेक्षाकृत कम हैं, जबकि दक्षिण और कुछ पश्चिमी शहरों में दाम ऊंचे हैं। प्रमुख शहरों के ताजा रेट इस प्रकार हैं:

शहर पेट्रोल कीमत (₹ प्रति लीटर)
नई दिल्ली 102.12
मुंबई 111.21
बेंगलुरु 111.68
हैदराबाद 116.15
चेन्नई 107.76
कोलकाता 113.51
अहमदाबाद 102.15
लखनऊ 101.86
नोएडा 101.96
पुणे 111.90
जयपुर 113.19
गुरुग्राम 102.97

इन शहरों में हैदराबाद सबसे महंगा है, जबकि लखनऊ और नोएडा अपेक्षाकृत सस्ते रह गए हैं। एक सामान्य कार के टैंक भरने पर सबसे सस्ते और सबसे महंगे शहर के बीच का अंतर ₹500 से ज्यादा हो सकता है।

राज्यों में पेट्रोल के दाम इतने अलग क्यों हैं?

राज्यवार औसत रेट देखने पर अंतर और भी साफ नजर आता है। आंध्र प्रदेश में औसत लगभग ₹117.61 प्रति लीटर है, जबकि अरुणाचल प्रदेश और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में यह ₹99-100 के आसपास है। दिल्ली में ₹102.12, गुजरात में करीब ₹102.15 और महाराष्ट्र में ₹111-112 के आसपास रेट चल रहा है।

यह फर्क मुख्य रूप से राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (VAT) की वजह से आता है। केंद्र का एक्साइज ड्यूटी सभी जगह एक समान रहता है, लेकिन राज्य का वैट 15 से 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा तक हो सकता है। इसके अलावा रिफाइनरी से दूरी और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी कीमत बढ़ाती है। इसी कारण दो शहरों के बीच सिर्फ कुछ सौ किलोमीटर का फासला होने पर भी पंप पर रेट अलग दिखते हैं।

भारत में ईंधन की कीमतें कैसे रिवाइज होती हैं?

जून 2017 से सरकारी तेल कंपनियां रोजाना कीमतें तय करने का सिस्टम अपना रही हैं। आमतौर पर हर सुबह 6 बजे रेट की समीक्षा होती है और जरूरत पड़ने पर बदलाव किया जाता है। यह बदलाव पिछले दिन के अंतरराष्ट्रीय उत्पाद भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अन्य लागतों के आधार पर होता है। पहले यह रिविजन हर पंद्रह दिन में होता था।

कई बार कंपनियां कई दिनों या हफ्तों तक रेट स्थिर भी रखती हैं, खासकर जब कच्चे तेल में बड़ा उछाल न हो या सरकार ड्यूटी में कटौती करके उपभोक्ताओं को राहत दे। हाल के समय में पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से कच्चे तेल के भाव ऊंचे रहने पर सरकार ने पंद्रह दिन में समीक्षा करने का तंत्र भी बनाए रखा है, ताकि अंडर-रिकवरी और टैक्स संबंधी फैसले समय पर लिए जा सकें।

पेट्रोल के दामों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक क्या हैं?

पंप पर मिलने वाली अंतिम कीमत कई चीजों का जोड़ होती है। सबसे बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय पेट्रोल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य होता है। इसके ऊपर केंद्र का एक्साइज ड्यूटी, राज्य का वैट, डीलर कमीशन और फ्रेट चार्ज जुड़ते हैं। जब कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव या सप्लाई चिंता के कारण तेजी से बढ़ती हैं, तो कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का कोई भी बड़ा बदलाव जल्द या देर से पंप पर दिखता है। सरकार कभी-कभी एक्साइज ड्यूटी घटाकर इस असर को कम करती है। स्थानीय मांग, रिफाइनरी उत्पादन और स्टॉक की स्थिति भी छोटे स्तर पर कीमतों को प्रभावित करती है।

उपभोक्ता कीमतें कैसे ट्रैक करें और ईंधन खर्च कैसे कम करें?

ज्यादातर लोग इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम या हिंदुस्तान पेट्रोलियम की वेबसाइट और ऐप से रोजाना रेट चेक करते हैं। कई स्वतंत्र पोर्टल भी शहरवार अपडेट देते हैं। पेट्रोल पंपों पर भी सुबह रिविजन के बाद नया रेट बोर्ड पर लिखा होता है। नियमित इस्तेमाल करने वाले लोग एक हफ्ते का ट्रेंड देखकर फिलिंग का फैसला ले सकते हैं।

ईंधन बचाने के आसान तरीके हैं- टायर का प्रेशर सही रखना, अचानक एक्सीलरेटर न दबाना, बेवजह इंजन न चलाना और छोटे-छोटे कामों को एक साथ करके ट्रिप कम करना। ज्यादा माइलेज वाली गाड़ी चुनना या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना भी मासिक खर्च कम करता है, खासकर उन शहरों में जहां रेट पहले से ऊंचे हैं। दाम बदल सकते हैं, लेकिन राज्यों और शहरों के बीच का यह फर्क लंबे समय तक बना रहने वाला है।

कुल मिलाकर 17 अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल पंपों पर शांति का माहौल है। फिर भी गाड़ी भरवाने से पहले अपने नजदीकी पंप पर सही रेट चेक कर लें, क्योंकि एक ही शहर में कंपनी और आउटलेट के हिसाब से मामूली अंतर हो सकता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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