Sleeping With Phone: रात को सोने से पहले कई लोग आखिरी बार फोन चेक करते हैं और फिर उसे तकिए के पास रख देते हैं। ऐसा लगता है कि फोन पास रहने से कोई खास नुकसान नहीं होता, लेकिन हाल के अध्ययनों में सामने आया है कि यह आदत नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोन से निकलने वाली रोशनी, नोटिफिकेशन और मन की व्यस्तता नींद आने में देरी करती है और गहरी नींद को बाधित करती है। इस बात पर जोर दिया गया है कि रात में फोन तकिए के पास रखने की आदत नींद के चक्र को बिगाड़ सकती है।
रात में तकिए के पास फोन रखकर सोने से नींद पर क्या असर पड़ता है?
फोन को तकिए के पास रखने से सबसे पहला असर नींद आने में देरी का होता है। स्क्रीन की रोशनी आंखों तक पहुंचती है और दिमाग को यह संदेश देती है कि अभी रात नहीं हुई है। इससे नींद का प्राकृतिक चक्र बिगड़ जाता है। कई लोगों को लगता है कि वे जल्दी सो जाएंगे, लेकिन असल में वे बिस्तर पर लंबे समय तक जागते रहते हैं।
नोटिफिकेशन की आवाज या कंपन भी नींद को तोड़ते हैं। भले ही फोन साइलेंट मोड पर हो, लेकिन दिमाग अनजाने में अलर्ट रहता है। अध्ययनों में पाया गया है कि जो लोग रात को फोन पास रखते हैं, उनकी नींद खंडित होती है और वे गहरी नींद के चरण तक नहीं पहुंच पाते। सुबह उठने पर थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होना आम बात है।
रिसर्च में फोन और नींद के रिश्ते को लेकर क्या बातें सामने आई हैं?
कई अध्ययनों में साफ किया गया है कि बिस्तर पर फोन का इस्तेमाल नींद की गुणवत्ता को कम करता है। एक रिसर्च में देखा गया कि जो लोग सोने से पहले स्क्रीन देखते हैं, उन्हें नींद आने में ज्यादा समय लगता है। नीली रोशनी मस्तिष्क में मेलाटोनिन के स्तर को घटाती है, जिससे नींद का संकेत देर से मिलता है।
कुछ शोधकर्ताओं ने यह भी पाया है कि रात को फोन पास रखने वाले लोगों की नींद की अवधि कम हो जाती है। वे रात में जागते हैं और फिर से सोने में समय लगाते हैं। लंबे समय तक यह आदत बनी रहने पर थकान, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
फोन की नीली रोशनी नींद को कैसे प्रभावित करती है और इससे कैसे बचें?
स्मार्टफोन और अन्य डिवाइस से निकलने वाली नीली रोशनी सबसे ज्यादा नुकसानदायक मानी जाती है। यह रोशनी आंखों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचती है और शरीर के आंतरिक घड़ी को प्रभावित करती है। रात के समय शरीर मेलाटोनिन बनाता है, लेकिन नीली रोशनी इस प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
इससे बचने के लिए कई आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। फोन में नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर ऑन कर दें। स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें। सबसे अच्छा तरीका यह है कि सोने से पहले फोन को दूसरे कमरे में रख दें। अगर जरूरी हो तो अलार्म के लिए पुराने जमाने की घड़ी का इस्तेमाल करें।
अच्छी नींद के लिए फोन का इस्तेमाल कैसे नियंत्रित करें?
नींद बेहतर बनाने के लिए कुछ नियम बनाने चाहिए। सोने से एक घंटे पहले फोन बंद कर दें या डू नॉट डिस्टर्ब मोड ऑन कर दें। बिस्तर पर केवल आराम करने का मकसद रखें, काम या मनोरंजन न करें।
शाम को फोन का इस्तेमाल सीमित करें। डिनर के बाद स्क्रीन टाइम कम करें और हल्की एक्टिविटी करें। अगर कोई जरूरी काम हो तो उसे पहले निपटा लें। कुछ लोग फोन को चार्जिंग के लिए बेडरूम के बाहर रखते हैं, जो अच्छी आदत है।
क्या फोन के पास सोने से स्वास्थ्य पर लंबे समय में असर पड़ सकता है?
लगातार खराब नींद स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। थकान बढ़ना, ध्यान की कमी और मूड स्विंग आम समस्याएं हैं। लंबे समय में यह वजन बढ़ने, कमजोर इम्यूनिटी और तनाव से जुड़ी समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि अच्छी नींद शरीर की मरम्मत और दिमाग की सफाई के लिए जरूरी है। अगर फोन की वजह से नींद बार-बार टूट रही है तो इसे गंभीरता से लें। बच्चों और किशोरों में यह आदत ज्यादा नुकसानदायक हो सकती है क्योंकि उनकी नींद की जरूरत ज्यादा होती है।
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