Top 5 This Week

Related Posts

Health Tips: दांतों की झनझनाहट से कैसे मिलेगी राहत? क्या घरेलू नुस्खे वाकई हैं असरदार?

Health Tips: दांतों में अचानक होने वाली तेज झनझनाहट आजकल कई लोगों की रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है। ठंडा पानी पीते, आइसक्रीम खाते या खट्टी चीज चखते ही दांत में तीखा दर्द महसूस होना सामान्य लग सकता है, लेकिन यह समस्या दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल के घिसने या मसूड़ों के पीछे हटने जैसी वजहों से जुड़ी होती है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद के दंत विशेषज्ञ डॉ. राजीव अरोड़ा बताते हैं कि सही देखभाल से इस संवेदनशीलता को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि घरेलू उपाय लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन हर मामले में स्थायी समाधान नहीं देते। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

कई लोग इस समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि दर्द कुछ सेकंड में कम हो जाता है। लेकिन अगर इसे लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो दांत की जड़ें खुली रह सकती हैं और कैविटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव और सही टूथपेस्ट का चुनाव इस स्थिति को बेहतर बना सकता है।

दांतों की झनझनाहट क्यों होती है और इसके पीछे क्या कारण हैं?

दांतों की संवेदनशीलता तब पैदा होती है जब दांत की सुरक्षा देने वाली इनेमल परत पतली हो जाती है या मसूड़े पीछे हट जाते हैं। इससे अंदरूनी परत यानी डेंटिन बाहर आ जाता है। डेंटिन में छोटी-छोटी नलिकाएं होती हैं जो सीधे नस तक पहुंचती हैं। जब ठंडा, गर्म, मीठा या खट्टा पदार्थ इन नलिकाओं के संपर्क में आता है तो तेज झनझनाहट महसूस होती है।

इसके मुख्य कारणों में बहुत जोर से ब्रश करना और सख्त ब्रिसल वाले ब्रश का इस्तेमाल शामिल है। बार-बार खट्टे फल, सोडा या अम्लीय पेय पीने से इनेमल घिसता है। मसूड़ों की बीमारी, दांत में छोटी दरार या कैविटी भी संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। कई मामलों में उम्र बढ़ने के साथ मसूड़े पीछे हटने लगते हैं और दांत की जड़ें खुली हो जाती हैं।

इस समस्या को आम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर एक ही दांत में बार-बार दर्द हो रहा हो तो कैविटी या अन्य समस्या की जांच जरूरी हो जाती है।

क्या घरेलू उपायों से दांतों की झनझनाहट को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है?

घरेलू देखभाल से लक्षणों में राहत मिल सकती है लेकिन यह हर कारण का पूरा इलाज नहीं है। सबसे पहला कदम नरम ब्रिसल वाले टूथब्रश का इस्तेमाल करना है। दिन में दो बार हल्के हाथों से ब्रश करें। जोर से रगड़ने की आदत छोड़ दें क्योंकि इससे इनेमल और ज्यादा घिसता है।

संवेदनशील दांतों के लिए बने टूथपेस्ट का नियमित इस्तेमाल फायदेमंद साबित होता है। इनमें पोटैशियम नाइट्रेट या स्टैनस फ्लोराइड जैसे तत्व होते हैं जो नसों को शांत करते हैं और संवेदनशीलता कम करते हैं। फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट इनेमल को मजबूत बनाने में भी मदद करता है।

खट्टी चीजें खाने के तुरंत बाद ब्रश न करें। कम से कम 30 से 60 मिनट का इंतजार करें। बीच में सादे पानी से मुंह कुल्ला कर लें। बहुत गर्म या बहुत ठंडी चीजों का सेवन तब तक सीमित रखें जब तक समस्या कम न हो जाए। नमक, नींबू, कोयला या बेकिंग सोडा को सीधे दांतों पर रगड़ने से बचें क्योंकि ये इनेमल को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ब्रशिंग और खान-पान की आदतों में क्या बदलाव करने चाहिए?

सही ब्रशिंग तकनीक सबसे महत्वपूर्ण है। ब्रश को 45 डिग्री के कोण पर रखें और छोटे-छोटे गोलाकार मूवमेंट में साफ करें। ऊपर-नीचे जोर से रगड़ने की आदत छोड़ दें। टूथब्रश हर तीन महीने में बदल लें।

खान-पान में भी सावधानी बरतें। सोडा, एनर्जी ड्रिंक और ज्यादा खट्टे फल इनेमल को कमजोर करते हैं। अगर इन्हें लेना ही है तो स्ट्रॉ का इस्तेमाल करें ताकि दांतों से कम संपर्क हो। खाने के बाद पानी पिएं और मुंह कुल्ला जरूर करें। मीठे पदार्थों का सेवन कम करें क्योंकि ये बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।

रात को सोने से पहले अच्छी तरह ब्रश करना जरूरी है। दिन भर जमा प्लाक और एसिड रात भर दांतों पर असर डालते हैं। फ्लॉस का इस्तेमाल भी मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

संवेदनशीलता कम करने के लिए और कौन से आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं?

मसूड़ों की देखभाल पर ध्यान दें। अगर मसूड़े सूजे या खून आ रहा हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। मसूड़ों का स्वस्थ रहना दांतों की जड़ों को ढककर रखने में मदद करता है। मुलायम आहार कुछ समय के लिए अपनाएं ताकि दांतों पर कम दबाव पड़े।

कुछ लोग माउथवॉश का इस्तेमाल करते हैं। फ्लोराइड युक्त माउथवॉश चुनें लेकिन अल्कोहल वाला प्रोडक्ट टालें क्योंकि यह मुंह को सुखा सकता है। नियमित रूप से पानी पिएं और शुगर फ्री च्यूइंग गम चबाएं। इससे लार बनती है जो एसिड को न्यूट्रलाइज करती है।

अगर समस्या ज्यादा हो तो डॉक्टर के सुझाव पर डेंटल सीलेंट या अन्य उपचार भी संभव हैं। लेकिन घर पर कोई भी नया उपाय शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की राय जरूर लें।

कब डेंटिस्ट को दिखाना जरूरी हो जाता है और किन लक्षणों पर ध्यान दें?

अगर झनझनाहट लगातार बनी रहती है, एक ही दांत में तेज दर्द होता है या खाने-पीने में काफी दिक्कत आती है तो तुरंत डेंटिस्ट से जांच कराएं। सूजन, बुखार या मसूड़ों से खून आना भी चेतावनी के संकेत हैं।

कैविटी या दांत में दरार होने पर फिलिंग की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में रूट कैनाल या मसूड़ों का उपचार भी किया जाता है। समय पर जांच से छोटी समस्या को बड़ी होने से रोका जा सकता है।

हर छह महीने में डेंटल चेकअप कराना अच्छा रहता है। इससे इनेमल की स्थिति और मसूड़ों की सेहत का पता चलता है। घरेलू उपाय तभी कारगर होते हैं जब समस्या हल्की हो। गंभीर मामलों में पेशेवर इलाज ही सही रास्ता है।

दांतों की संवेदनशीलता को नियंत्रित रखना पूरी तरह संभव है अगर सही आदतें अपनाई जाएं। नरम ब्रश, सही टूथपेस्ट और खान-पान में संयम से ज्यादातर लोग राहत महसूस करते हैं। लेकिन अगर दर्द बढ़ता जाए तो देरी न करें और विशेषज्ञ से सलाह लें। स्वस्थ दांत न सिर्फ मुस्कान बढ़ाते हैं बल्कि पूरे शरीर की सेहत से भी जुड़े होते हैं।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles