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30 साल के बाद शरीर को कितना प्रोटीन चाहिए? चना सत्तू या व्हे प्रोटीन, जानें किसे चुनें

Protein Requirement After 30: आजकल हर तरफ प्रोटीन सप्लीमेंट्स के विज्ञापन छाए हुए हैं। जिम जाने वाले युवा हो या 30 पार के लोग, व्हे प्रोटीन पाउडर को लगभग अनिवार्य बता दिया जाता है। लेकिन क्या सच में यही एकमात्र या सबसे बेहतर विकल्प है? चना सत्तू (भुने चने का आटा) जैसे पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ को नजरअंदाज करके क्या हम महंगे सप्लीमेंट्स के जाल में फंस रहे हैं? आइए तथ्यों के आधार पर समझें।

रोज कितना प्रोटीन चाहिए?

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रोटीन की अनुशंसित मात्रा लगभग 0.83 ग्राम प्रति किलोग्राम शरीर के वजन की है। यानी 60 किलो वजन वाले व्यक्ति को न्यूनतम करीब 50 ग्राम प्रोटीन रोजाना चाहिए। यह न्यूनतम स्तर है ताकि कमी न हो।

30 साल की उम्र के बाद स्थिति बदलने लगती है। इस उम्र से मांसपेशियों का नुकसान (सरकोपीनिया) धीरे-धीरे शुरू हो जाता है। शरीर की प्रोटीन संश्लेषण क्षमता कम होने लगती है। कई अध्ययन और विशेषज्ञ समूह जैसे PROT-AGE सुझाव देते हैं कि 40-65 वर्ष की उम्र में मांसपेशी बनाए रखने के लिए 1.0 से 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम या उससे अधिक प्रोटीन बेहतर रहता है। सक्रिय जीवनशैली या व्यायाम करने वालों के लिए यह और बढ़ सकता है। इसलिए 30 साल पार हो गए हैं तो अपनी रोज की थाली में प्रोटीन को जानबूझकर बढ़ाना समझदारी है। सिर्फ दाल-रोटी से अक्सर यह लक्ष्य पूरा नहीं होता।

चना सत्तू में कितना प्रोटीन?

चना सत्तू भुने हुए काले चने (बंगाल ग्राम) का आटा होता है। ICMR की भारतीय खाद्य संरचना तालिकाओं के अनुसार 100 ग्राम सूखे चना सत्तू में लगभग 20-22 ग्राम प्रोटीन होता है। कुछ ब्रांड्स में यह 23 ग्राम तक पहुंच सकता है। इसके अलावा इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर (7-15 ग्राम), आयरन (8-9 मिलीग्राम), मैग्नीशियम और फोलेट भी मिलता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने से यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार है।

30 ग्राम सत्तू (एक गिलास शर्बत या पराठा भरने के लिए) से लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन मिल जाता है। इसे पानी, छाछ या दूध में मिलाकर आसानी से पिया जा सकता है। लिट्टी-चोखा, पराठा या लड्डू में भी इस्तेमाल होता है।

व्हे प्रोटीन से तुलना

व्हे प्रोटीन दूध से निकाला गया प्रोटीन है। 100 ग्राम में 70-90 ग्राम प्रोटीन हो सकता है। एक स्कूप (30 ग्राम) में आमतौर पर 22-25 ग्राम प्रोटीन मिलता है। यह पूरा प्रोटीन (सभी आवश्यक अमीनो एसिड) है और तेजी से अवशोषित होता है, इसलिए वर्कआउट के बाद रिकवरी के लिए अच्छा माना जाता है।

लेकिन कीमत का फर्क बहुत बड़ा है। अच्छी क्वालिटी का सत्तू 80-150 रुपये प्रति किलो मिल जाता है। वहीं व्हे प्रोटीन 3000-5000 रुपये या उससे ज्यादा प्रति किलो पड़ता है। सत्तू से मिलने वाले प्रोटीन की लागत बहुत कम पड़ती है। सत्तू में फाइबर, आयरन और अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, जबकि ज्यादातर व्हे पाउडर में ये न के बराबर होते हैं। सत्तू प्लांट-बेस्ड है और लैक्टोज से परेशानी वालों के लिए भी सुरक्षित। व्हे कुछ लोगों में गैस या अपच पैदा कर सकता है।

बड़ी कंपनियां कैसे बेवकूफ बना रही हैं?

बाजार में प्रोटीन सप्लीमेंट्स का कारोबार अरबों का है। महंगे पैकेजिंग, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और “मसल गेन” के वादे से आम आदमी को लगता है कि बिना पाउडर के प्रोटीन पूरा नहीं हो सकता। हकीकत यह है कि संतुलित आहार से ज्यादातर लोगों की जरूरत पूरी हो सकती है। दाल, चना, पनीर, अंडा, दही, रोस्टेड चना और सत्तू जैसी चीजें आसानी से उपलब्ध और सस्ती हैं।

सत्तू को “सुपरफूड” बताकर अब कई कंपनियां महंगे ब्रांडेड पैक में बेच रही हैं, जबकि पारंपरिक सत्तू सस्ता और प्रभावी है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन सप्लीमेंट लेने से किडनी पर दबाव पड़ने का जोखिम भी कुछ लोगों में रहता है। इसलिए पहले थाली सुधारें, फिर जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट सोचें।

30 साल के बाद थाली में प्रोटीन कैसे बढ़ाएं?

  • सुबह सत्तू का शर्बत (नींबू-नमक या जीरा मिलाकर)।
  • नाश्ते में रोस्टेड चना या सत्तू वाला पराठा।
  • दोपहर/रात की थाली में दाल, राजमा, छोले, पनीर या अंडा जरूर रखें।
  • स्नैक के रूप में भुने चने या सत्तू लड्डू।
  • अगर मांस खाते हैं तो चिकन या मछली को हफ्ते में कुछ दिन शामिल करें।

सत्तू रोजाना इस्तेमाल करने से प्रोटीन के साथ फाइबर भी मिलता है, जिससे पाचन अच्छा रहता है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।

निष्कर्ष

व्हे प्रोटीन सुविधाजनक और उच्च सांद्रता वाला विकल्प है, खासकर एथलीट्स या बहुत ज्यादा प्रोटीन जरूरत वालों के लिए। लेकिन आम व्यक्ति, खासकर 30 साल से ऊपर के लोगों के लिए चना सत्तू कहीं ज्यादा सस्ता, पौष्टिक और व्यावहारिक विकल्प है। यह पारंपरिक ज्ञान है जो आधुनिक मार्केटिंग की चकाचौंध में दब गया है।

अपनी थाली में प्रोटीन बढ़ाएं। सत्तू जैसे सस्ते और प्रभावी स्रोत को नजरअंदाज न करें। जरूरत पड़े तो डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लें। स्वास्थ्य के नाम पर सिर्फ महंगे पाउडर पर निर्भर रहने की बजाय समझदारी से चुनाव करें। सत्तू न सिर्फ आपके बटुए को हल्का रखेगा बल्कि शरीर को भी मजबूत बनाएगा।

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Author: Sanjna Gupta

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