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भारत-पोलैंड की दोस्ती होगी और मजबूत! पीएम मोदी बोले- ‘साझा विरासत हमारी सबसे बड़ी ताकत’

India Poland Relations: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे पर पहुंचे पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क का दिल्ली में स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी ने नई गति पकड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानवता और संवेदना की साझा विरासत पर भी आधारित हैं। टस्क ने बैठक से पहले सोशल मीडिया पर लिखा था कि “हमें कोई रोक नहीं सकता।” विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी पोलिश प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे।

भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को पिछले दो वर्षों में क्या गति मिली?

पीएम मोदी ने 2024 में अपनी पोलैंड यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान डोनाल्ड टस्क ने उनका और प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया था। उसी यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। मोदी ने कहा कि इसी मजबूत आधार पर पिछले दो वर्षों में साझेदारी ने नई रफ्तार पकड़ी है और अब दोनों देश अपने संबंधों को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बैठक में आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत ने पोलैंड के बच्चों को कैसे आश्रय दिया था?

पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जामनगर और कोल्हापुर के राजपरिवारों ने पोलैंड के हजारों बच्चों और परिवारों को भारत में आश्रय दिया था। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों की एक महत्वपूर्ण नींव है। मोदी के मुताबिक, भारत और पोलैंड की मित्रता सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों पर टिकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे मानवता और संवेदना की साझा विरासत भी है। इस संदर्भ को दोनों नेताओं ने संबंधों को और मजबूत करने के लिए याद किया।

रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सहयोग कैसे बढ़ाया जाएगा?

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष तथा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर सहमति बनाई है। उन्होंने पोलैंड की कंपनियों को इन रणनीतिक क्षेत्रों में भारत के साथ संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन के लिए आमंत्रित किया। इस पहल से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। भारत की आर्थिक प्रगति और भारत-ईयू एफटीए के बाद इन क्षेत्रों में सहयोग के अवसर और बढ़ गए हैं। दोनों पक्षों का मानना है कि संयुक्त उत्पादन से न सिर्फ तकनीकी आदान-प्रदान होगा, बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

सांस्कृतिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क दोनों देशों की ताकत क्यों हैं?

पीएम मोदी ने कहा कि सांस्कृतिक संबंध और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क भारत-पोलैंड रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने पोलैंड में संस्कृत अध्ययन और भारतविद्या की समृद्ध परंपरा का उल्लेख किया। मोदी ने बताया कि पोलैंड के क्राकोव शहर में भारतीय अध्ययन पीठ की स्थापना की गई है। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक संबंधों को दोनों देशों की दोस्ती का अहम हिस्सा बताया। लोगों के बीच बढ़ते संपर्क से न सिर्फ पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा, बल्कि दीर्घकालिक संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।

भारत-पोलैंड साझेदारी से भविष्य में क्या उम्मीदें हैं?

दोनों नेताओं की इस बैठक को भारत-पोलैंड संबंधों को नई ऊंचाई देने वाली माना जा रहा है। रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ साझा विरासत और सांस्कृतिक जुड़ाव पर जोर देने से साझेदारी और गहरी होने की संभावना है। पीएम मोदी के निमंत्रण पर पोलिश कंपनियों के भारत में संयुक्त उत्पादन करने से आर्थिक और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खुल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-ईयू एफटीए के माहौल में यह साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

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Author: Sanjna Gupta

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