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Amit Shah life journey: शतरंज और संगीत के शौकीन हैं अमित शाह, सरदार पटेल की बेटी के लिए पोस्टर लगाने से गृह मंत्री बनने तक का सफर

Amit Shah life journey: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आज 62वां जन्मदिन है। 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के एक गुजराती परिवार में जन्मे शाह का बचपन गुजरात के मानसा में बीता। उनके पिता अनिलचंद्र शाह और मां कुसुमबेन थीं। मां गांधीवादी विचारों से प्रभावित थीं और उनकी प्रेरणा से शाह करीब 16 साल की उम्र से खादी पहनने लगे। बचपन से ही इतिहास, भारतीय दर्शन और महान हस्तियों की जीवनियों में उनकी रुचि रही। आज देश के गृह मंत्री के रूप में बड़े फैसले लेने वाले शाह का राजनीतिक सफर स्कूल के दिनों में पोस्टर लगाने से शुरू हुआ था।

अमित शाह का राजनीतिक सफर कैसे शुरू हुआ?

साल 1977 में आपातकाल के बाद लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उस समय स्कूली छात्र अमित शाह ने सरदार वल्लभभाई पटेल की बेटी मणिबेन पटेल के प्रचार में हिस्सा लिया। वे गुजरात की मेहसाणा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रही थीं। शाह गलियों में घूमकर उनके चुनावी पोस्टर और स्टिकर लगाते थे। यही वह समय था जब चुनावी राजनीति से उनका रिश्ता बना। 1980 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। इसके बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काम किया और 1982 में एबीवीपी की गुजरात इकाई के संयुक्त सचिव बने। 1984 में अहमदाबाद के नारनपुरा क्षेत्र में भाजपा के पोलिंग एजेंट की जिम्मेदारी संभाली। 1987 में भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े और 1989 में अहमदाबाद शहर भाजपा के सचिव बने। इस दौरान उन्हें लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव प्रबंधन में भी काम करने का मौका मिला।

शतरंज और संगीत से उनका क्या जुड़ाव है?

राजनीति के साथ-साथ अमित शाह को शतरंज खेलना बेहद पसंद है। साल 2006 में वे गुजरात राज्य शतरंज संघ के अध्यक्ष बने थे। उनका मानना रहा है कि शरीर के व्यायाम के साथ दिमाग का व्यायाम भी जरूरी है। उन्होंने अहमदाबाद के प्राथमिक विद्यालयों में शतरंज शुरू कराने की पहल की, जिसे बाद में गुजरात के अन्य स्कूलों तक बढ़ाया गया। उनके कार्यकाल में अहमदाबाद में करीब 20 हजार खिलाड़ियों की एक बड़ी शतरंज प्रतियोगिता हुई, जिसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई। चार हजार महिला खिलाड़ियों वाली प्रतियोगिता का रिकॉर्ड लिम्का बुक में दर्ज हुआ। संगीत से भी उनका खास लगाव है। उन्हें पुराने हिंदी फिल्मी गाने और साहिर लुधियानवी की गजलें पसंद हैं। इतिहास की किताबें पढ़ना, महान हस्तियों पर बनी फिल्में देखना और परिवार के साथ समय बिताना उनके शौक में शामिल हैं।

क्रिकेट प्रशासन और भाजपा अध्यक्ष के रूप में क्या भूमिका रही?

साल 2009 में अमित शाह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने थे, जब नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष थे। 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने एसोसिएशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। राजनीति के साथ खेल प्रशासन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। उस चुनाव में भाजपा ने प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतीं। 9 जुलाई 2014 को उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया। उन्होंने नवंबर 2014 में देशव्यापी सदस्यता अभियान शुरू किया। मिस्ड कॉल के जरिए सदस्य बनाने की सुविधा दी गई। अभियान से पहले सदस्यों की संख्या करीब तीन करोड़ थी, जो अप्रैल 2015 तक 11 करोड़ तक पहुंच गई। इसके बाद महासंपर्क अभियान और पंडित दीनदयाल उपाध्याय महाप्रशिक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें 15 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया।

गृह मंत्री बनने के बाद किन बड़े फैसलों में भूमिका रही?

2017 में राज्यसभा पहुंचने और 2019 में गांधीनगर से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने और नागरिकता संशोधन कानून जैसे फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा अभियानों पर विशेष जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को रणनीति का हिस्सा बनाया। अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा था। मार्च 2026 में लोकसभा में उन्होंने दावा किया कि अभियान को बड़ी सफलता मिली है और इसका श्रेय केंद्रीय सुरक्षा बलों, राज्य पुलिस तथा स्थानीय लोगों को जाता है।

कार्यकर्ताओं को किताबों से जोड़ने की पहल क्या रही?

अमित शाह का मानना रहा है कि राजनीतिक कार्यकर्ता को सिर्फ नारे लगाने या चुनाव प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे देश के इतिहास, संविधान और समाज की समझ होनी चाहिए। इसी सोच से उन्होंने भाजपा कार्यालयों में पुस्तकालय और ई-लाइब्रेरी स्थापित करने पर जोर दिया। फरवरी 2016 में दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में केंद्रीय पुस्तकालय की शुरुआत हुई। दिसंबर 2016 में छत्तीसगढ़ के रायपुर में नानाजी देशमुख के नाम पर एक पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया, जिसमें 10 हजार से अधिक किताबें रखी गईं। बाद में कई राज्यों के भाजपा कार्यालयों में भी पुस्तकालय बनाए गए। उनका लक्ष्य था कि कार्यकर्ताओं में नियमित अध्ययन की आदत विकसित हो।

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Author: Sanjna Gupta

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