Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दे चर्चा में आते हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इसे प्रेग्नेंसी-एसोसिएटेड ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है। इस स्थिति में लक्षण सामान्य शारीरिक बदलावों के साथ मिल जाते हैं, इसलिए कई बार महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं। इस दौरान हर बदलाव को सामान्य मानकर छोड़ना ठीक नहीं होता। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से सही कारण पता चल सकता है और जरूरत पड़ने पर इलाज शुरू किया जा सकता है।
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलावों से स्तन का आकार बढ़ता है, भारीपन महसूस होता है और ऊतक घने हो जाते हैं। स्तनपान के दौरान भी दूध की नसें, सिस्ट या अन्य सामान्य कारणों से गांठ बन सकती है। इन सामान्य बदलावों के बीच असामान्य लक्षण छिप जाते हैं। कई महिलाओं को लगता है कि गांठ या दर्द प्रेग्नेंसी का हिस्सा है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर हो सकता है। इसलिए जागरूकता और समय पर जांच दोनों जरूरी हैं।
क्या प्रेग्नेंसी या स्तनपान के दौरान ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है?
गर्भावस्था के दौरान, बच्चे के जन्म के बाद एक साल के अंदर या स्तनपान की अवधि में ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। इसे प्रेग्नेंसी-एसोसिएटेड ब्रेस्ट कैंसर कहते हैं। यह स्थिति अपेक्षाकृत दुर्लभ है, लेकिन होने पर इसकी पहचान में देरी हो सकती है। इस समय स्तन में होने वाले सामान्य बदलावों के कारण लक्षणों पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। फिर भी, अगर कोई नया या लगातार रहने वाला बदलाव दिखे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अधिकांश गांठें सौम्य होती हैं, लेकिन बिना जांच के यह तय करना मुश्किल है कि गांठ सामान्य है या नहीं। इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है।
प्रेग्नेंसी में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों को पहचानना मुश्किल क्यों होता है?
गर्भावस्था में स्तन का आकार बढ़ना, भारीपन और हल्का दर्द होना सामान्य माना जाता है। हार्मोनल बदलावों के कारण ऊतक घने हो जाते हैं और कई महिलाओं को छोटी-छोटी गांठें भी महसूस होती हैं। स्तनपान के दौरान दूध जमा होने या नसें बंद होने से भी गांठ बन सकती है। इन सामान्य बदलावों के बीच कैंसर के शुरुआती संकेत आसानी से छिप जाते हैं। कई महिलाएं सोचती हैं कि ये बदलाव अपने आप ठीक हो जाएंगे। देरी से जांच कराने पर स्थिति आगे बढ़ सकती है। इसलिए नियमित रूप से खुद की जांच करना और किसी भी असामान्य बदलाव को डॉक्टर को बताना महत्वपूर्ण है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
कुछ बदलावों पर खास ध्यान देना चाहिए। अगर स्तन में कोई नई गांठ महसूस हो जो कुछ हफ्तों तक बनी रहे, तो डॉक्टर को दिखाएं। निप्पल से खून या असामान्य स्राव आने पर भी इसे सामान्य न समझें। त्वचा में बदलाव जैसे लालिमा, मोटा होना, गड्ढे पड़ना या संतरे के छिलके जैसी बनावट दिखने पर जांच करवाएं। निप्पल का अंदर की ओर खिंचना या लगातार एक ही जगह दर्द रहना भी संकेत हो सकता है। हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन बिना परीक्षण के यह मान लेना सही नहीं है कि सब कुछ सामान्य है। डॉक्टर महिला की स्थिति देखकर जरूरी सलाह देते हैं।
प्रेग्नेंसी या स्तनपान के दौरान जांच सुरक्षित है?
अगर कोई असामान्य लक्षण दिखे तो जांच को टालना सही नहीं है। अल्ट्रासाउंड को इस दौरान सबसे सुरक्षित और प्रभावी शुरुआती जांच माना जाता है। यह भ्रूण के लिए सुरक्षित होती है और गांठ की प्रकृति समझने में मदद करती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर मैमोग्राफी या बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। मैमोग्राफी के दौरान पेट पर सुरक्षात्मक शील्ड लगाई जाती है। केवल प्रेग्नेंसी या स्तनपान की वजह से जांच टालना उचित नहीं। डॉक्टर महिला की गर्भावस्था की अवधि और लक्षणों को ध्यान में रखकर सही तरीका चुनते हैं। जल्दी जांच से सही निदान मिलता है और आगे की योजना बनाना आसान हो जाता है।
महिलाओं को क्या सावधानियां रखनी चाहिए?
स्तन में होने वाले हर बदलाव पर ध्यान दें और किसी असामान्य गांठ को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें। निप्पल से खून आने, त्वचा में बदलाव या लगातार दर्द पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। खुद से बीमारी का अंदाजा लगाने के बजाय जांच करवाएं। नियमित रूप से डॉक्टर के पास चेकअप करवाएं और अपनी चिंताएं साफ-साफ बताएं। प्रेग्नेंसी और स्तनपान के दौरान स्तन में बदलाव होना सामान्य है, लेकिन हर बदलाव को सामान्य मान लेना सही नहीं। समय पर सलाह लेने से समस्या की सही वजह पता चलती है और जरूरत पड़ने पर समय पर इलाज शुरू हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ में यह बात याद रखना जरूरी है कि जागरूकता और समय पर कदम उठाना महिलाओं की सुरक्षा में मदद करता है। अगर कोई लक्षण दिखे तो बिना देरी के विशेषज्ञ से सलाह लें। सही जानकारी और समय पर जांच से कई मामलों में स्थिति संभल सकती है। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
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Sanjana Gupta
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