Rahul Gandhi Defamation Case: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में एमपी-एमएलए कोर्ट ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े एक पुराने मानहानि मामले में बरी कर दिया है। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना जा सकता। फैसले के समय राहुल गांधी खुद कोर्ट में मौजूद थे। इस फैसले के साथ लगभग आठ साल पुराने क्रिमिनल डिफेमेशन केस में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही समाप्त हो गई है। शिकायतकर्ता के पास हाई कोर्ट में अपील करने का विकल्प खुला है।
मामला मई 2018 का है, जब राहुल गांधी कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। उस समय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे अमित शाह के बारे में उन्होंने कहा था कि भारत में लोग भूल जाते हैं कि भाजपा के अध्यक्ष एक मर्डर आरोपी हैं। यह टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख फेक एनकाउंटर मामले से जुड़ी थी, जिसमें मुंबई की एक स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 2014 में अमित शाह को आरोपों से बरी कर दिया था। स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी।
फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया। राहुल गांधी फैसले के बाद लखनऊ के लिए रवाना हो गए। इससे पहले सुल्तानपुर पहुंचने के दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनके काफिले की कुछ गाड़ियों में टक्कर की घटना हुई थी, जिसमें किसी को गंभीर चोट नहीं पहुंची।
राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर में मानहानि का मामला क्या था?
यह मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी की एक टिप्पणी से शुरू हुआ था। बेंगलुरु की रैली में उन्होंने कहा था कि भाजपा के अध्यक्ष एक मर्डर आरोपी हैं और यह सच है। टिप्पणी सोहराबुद्दीन शेख मामले से जुड़ी थी, जिसमें अमित शाह को बाद में अदालत ने आरोपों से बरी किया था। सुल्तानपुर के भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने इस बयान को मानहानिकारक बताते हुए 4 अगस्त 2018 को क्रिमिनल डिफेमेशन की शिकायत दायर की। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बयान से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। मामला शुरू में सिविल कोर्ट में चला और बाद में इसे एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित किया गया।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए क्या कहा?
सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बारे में की गई कथित टिप्पणियों से जुड़े एक मामले में MP-MLA कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी।
राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने कहा, “राहुल गांधी का मुकदमा एमपी एमएलए कोर्ट में निर्णय के लिए लगा है और काफी इंतजार के बाद यह घड़ी आ गई है और मुझे पूरा इत्मीनान है कि राहुल गांधी को न्याय मिलेगा, इंसाफ मिलेगा और बाइज्जत बरी होंगे…”
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 26, 2026
सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट के मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने राहुल गांधी को बरी करते हुए साफ कहा कि उनके बयान को मानहानि वाली श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और सबूत देखने के बाद यह निष्कर्ष निकाला। फैसले के साथ ट्रायल कोर्ट स्तर पर राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई। राहुल गांधी फैसले के समय कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने पहले अपने बयान में आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि शिकायत राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। अदालत ने शिकायतकर्ता की उस मांग को भी खारिज कर दिया था, जिसमें राहुल गांधी के वॉयस सैंपल को रैली की रिकॉर्डिंग से मैच कराने की बात कही गई थी।
आठ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया का सफर क्या रहा?
मामला 2018 में दर्ज होने के बाद लंबा खिंचता रहा। सुल्तानपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने नवंबर 2023 में राहुल गांधी को ट्रायल का सामना करने के लिए समन जारी किया। फरवरी 2024 में वे कोर्ट में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई। जुलाई 2024 में उनका बयान दर्ज हुआ, जिसमें उन्होंने आरोपों को खारिज किया। ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता ने गवाह और सबूत पेश किए। वॉयस सैंपल मैचिंग की मांग को ट्रायल कोर्ट ने खारिज किया और बाद में निचली अदालत व हाई कोर्ट में भी चुनौतियां असफल रहीं। अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की आखिरी दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने 26 अक्टूबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की। आठ साल की इस प्रक्रिया के बाद अंततः राहुल गांधी को राहत मिली।
फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कैसे प्रतिक्रिया दी?
फैसला आते ही सुल्तानपुर एमपी-एमएलए कोर्ट के बाहर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुशी जाहिर की। उन्होंने पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटीं। कई कार्यकर्ता राहुल गांधी के स्वागत के लिए कोर्ट परिसर में मौजूद थे। फैसले के बाद राहुल गांधी लखनऊ एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इससे पहले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर काफिले की गाड़ियों में मामूली टक्कर हुई थी, लेकिन किसी को गंभीर चोट नहीं पहुंची। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राहत बताया और कहा कि लंबे समय से चले आ रहे मामले में अदालत ने सही फैसला सुनाया है।
शिकायतकर्ता के पास आगे क्या विकल्प हैं?
सुल्तानपुर कोर्ट के फैसले के बाद शिकायतकर्ता विजय मिश्रा के पास हाई कोर्ट में अपील करने का मौका है। अगर वे चाहें तो इस बरी के फैसले को चुनौती दे सकते हैं। फिलहाल ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही समाप्त हो चुकी है। राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने फैसले को महत्वपूर्ण बताया। कानूनी जानकारों के अनुसार, अपील दायर होने पर मामला आगे बढ़ सकता है, लेकिन अभी तक शिकायतकर्ता की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह फैसला राहुल गांधी के लिए एक और मानहानि मामले में राहत के रूप में देखा जा रहा है।
सुल्तानपुर कोर्ट का यह फैसला राहुल गांधी के लिए राहत लेकर आया है। लगभग आठ साल पुराने मामले में अदालत ने उनके बयान को मानहानिकारक नहीं माना। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि शिकायतकर्ता के पास हाई कोर्ट का रास्ता खुला है। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले पर चर्चा जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजरें टिकी रहेंगी।
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Sanjana Gupta
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