Top 5 This Week

Related Posts

Health Tips: स्ट्रोक क्यों है इतना खतरनाक? लक्षण पहचानें और तुरंत क्या करें, जानें बचाव के तरीके

Health Tips: स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें थोड़ी देरी भी मरीज की जिंदगी और भविष्य को बदल सकती है। दिमाग तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली नस में रुकावट आने या नस फटने से स्ट्रोक होता है। ऑक्सीजन कम होने पर दिमाग की कोशिकाएं तेजी से डैमेज होने लगती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर लकवा, बोलने-समझने में परेशानी, चलने में दिक्कत या जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर विपुल गुप्ता (डायरेक्टर न्यूरोइंटरवेंशनल सर्जरी, सर एच. एन. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल, मुंबई) के अनुसार, स्ट्रोक में अचानक भ्रम, शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन या असामान्य तेज सिरदर्द गंभीर संकेत हो सकते हैं। लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाएं तो भी इसे हल्के में न लें। यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) हो सकता है, जिसे भविष्य में बड़े स्ट्रोक का चेतावनी संकेत माना जाता है।

स्ट्रोक के मुख्य लक्षण क्या हैं और उन्हें कैसे पहचानें?

स्ट्रोक के लक्षण अचानक आते हैं। शरीर के एक तरफ हाथ, पैर या चेहरा सुन्न हो सकता है। बोलने में अस्पष्टता या समझने में दिक्कत हो सकती है। आंखों की रोशनी एक तरफ प्रभावित हो सकती है। अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर या संतुलन बिगड़ना भी संकेत हो सकते हैं। अगर लक्षण जल्दी गायब हो जाएं तो भी तुरंत डॉक्टर को दिखाएं, क्योंकि यह TIA हो सकता है।

लक्षण दिखते ही समय नोट करें कि वे कब शुरू हुए या मरीज आखिरी बार कब पूरी तरह सामान्य था। यह जानकारी डॉक्टर को इलाज तय करने में मदद करती है।

स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर क्या करें और क्या न करें?

लक्षण दिखते ही तुरंत एंबुलेंस बुलाएं या मरीज को ऐसे अस्पताल ले जाएं जहां स्ट्रोक का इलाज हो। अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। मरीज को खाना, पानी या कोई दवा न दें। स्ट्रोक के दौरान निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। एस्पिरिन जैसी दवा भी बिना डॉक्टर की सलाह के न दें। स्ट्रोक खून का थक्का बनने से भी हो सकता है और दिमाग में ब्लीडिंग से भी। दोनों का इलाज अलग होता है।

मरीज को आराम से लेटाएं और सांस लेने में आसानी रखें। अकेले छोड़कर न जाएं।

दिमाग में ब्लीडिंग होने वाले स्ट्रोक में क्या इलाज होता है?

हर स्ट्रोक खून के थक्के से नहीं होता। कुछ मामलों में दिमाग की नसें फटने या एन्यूरिज्म टूटने से ब्लीडिंग होती है। ऐसे में ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना जरूरी होता है। अगर मरीज खून पतला करने वाली दवा ले रहा हो तो उसके प्रभाव को उलटना पड़ता है। समय पर न्यूरोसर्जिकल या एंडोवैस्कुलर इलाज की जरूरत पड़ सकती है। देरी से नुकसान बढ़ सकता है।

स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या सावधानियां रखें?

स्ट्रोक का खतरा कम करने के लिए ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखें। धूम्रपान और शराब से बचें। नियमित व्यायाम और संतुलित खाना जरूरी है। देर रात खाना और आधी रात को स्नैकिंग करने की आदत स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती है। परिवार में स्ट्रोक का इतिहास हो तो नियमित जांच कराएं। लक्षण नजर आते ही देर न करें।

स्ट्रोक आने पर समय पर इलाज क्यों जरूरी है?

दिमाग की कोशिकाएं ऑक्सीजन के बिना जल्दी डैमेज होती हैं। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतना नुकसान कम हो सकता है। कई मामलों में समय पर इलाज से लकवा और अन्य समस्याएं कम हो सकती हैं। इसलिए स्ट्रोक को इमरजेंसी मानकर तुरंत अस्पताल पहुंचें। डॉक्टर से सलाह लेकर ही कोई दवा दें या आगे का इलाज तय करें।

स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें हर मिनट कीमती होता है। लक्षण पहचानकर तुरंत मदद लें। खाना-पानी या दवा न दें और अस्पताल ले जाएं। ब्लड प्रेशर कंट्रोल और स्वस्थ आदतें जोखिम कम करने में मदद कर सकती हैं। किसी भी लक्षण पर देरी न करें और डॉक्टर की सलाह लें।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles