गेहूं भारत की सबसे प्रमुख रबी फसल है और देश के करोड़ों किसानों की आजीविका इससे जुड़ी है। गेहूं की अच्छी पैदावार की नींव बुवाई के समय ही पड़ जाती है। सही समय, सही किस्म, उचित बीज दर, संतुलित खाद और पहली सिंचाई का सही समय, ये पांच बातें उत्पादन पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं। इस लेख में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान ICAR-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल की सिफारिशों के आधार पर गेहूं बुवाई से जुड़ी जरूरी जानकारी सरल भाषा में दी गई है। अपने क्षेत्र के अनुसार अंतिम निर्णय से पहले नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से सलाह जरूर लें।
Wheat Sowing Guide: गेहूं बुवाई का सही समय, बीज दर, खाद और पहली सिंचाई, जानें ICAR की सिफारिशें
गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए ICAR-IIWBR की सिफारिशों के आधार पर क्षेत्रवार बुवाई का समय, बीज दर, बीज उपचार, संतुलित खाद और पहली सिंचाई की पूरी जानकारी।
मुख्य बातें
- गेहूं बुवाई का सही समय
- किस्म का चुनाव
- बीज दर: कितना बीज डालें
- बीज उपचार क्यों जरूरी

गेहूं बुवाई का सही समय
गेहूं की बुवाई का समय क्षेत्र (zone) और सिंचाई की स्थिति के अनुसार बदलता है। IIWBR की पॉकेट गाइड और फसल सलाह के अनुसार सिंचित, समय पर बुवाई के लिए मोटे तौर पर यह समय उपयुक्त माना गया है:
- उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (NWPZ) जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के अधिकांश भाग: 1 से 15 नवंबर।
- उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र (NEPZ) जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल: 10 से 20 नवंबर।
- मध्य क्षेत्र (CZ) जैसे मध्य प्रदेश, गुजरात आदि: 10 से 20 नवंबर।
- प्रायद्वीपीय क्षेत्र (PZ) जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक: 1 से 15 नवंबर।
25 नवंबर के बाद की बुवाई को आमतौर पर “पछेती बुवाई” (late sown) माना जाता है। देर से बोई गई फसल को पकने के समय ज्यादा गर्मी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे दाने कमजोर रह जाते हैं और पैदावार घटती है। इसलिए जहां संभव हो, समय पर बुवाई को प्राथमिकता दें।
किस्म का चुनाव
किस्म हमेशा अपने क्षेत्र और बुवाई के समय के अनुसार चुनें। IIWBR की सलाह है कि दूसरे क्षेत्रों के लिए अनुशंसित किस्में न उगाएं, क्योंकि उनमें स्थानीय रोगों का खतरा अधिक हो सकता है। समय पर और पछेती बुवाई के लिए अलग-अलग किस्में विकसित की गई हैं। उदाहरण के लिए, ICAR के अनुसार HD 3226 किस्म उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित, समय पर बुवाई के लिए जारी की गई है। अपने जिले के लिए उपयुक्त किस्मों की सूची कृषि विज्ञान केंद्र या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से प्राप्त करें। बीज हमेशा भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें।
बीज दर: कितना बीज डालें
| बुवाई की स्थिति | बीज दर (IIWBR सिफारिश) |
|---|---|
| सिंचित, समय पर बुवाई | 100 किलो प्रति हेक्टेयर |
| सिंचित, पछेती बुवाई | 125 किलो प्रति हेक्टेयर |
| असिंचित (बारानी) | 125 किलो प्रति हेक्टेयर |
पछेती बुवाई में पौधों को बढ़ने का समय कम मिलता है और कल्ले कम निकलते हैं, इसलिए बीज दर बढ़ाई जाती है।
बीज उपचार क्यों जरूरी
बीज और मिट्टी से फैलने वाले रोगों, जैसे लूज स्मट, फ्लैग स्मट, करनाल बंट और सीडलिंग ब्लाइट, से बचाव के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार की सलाह दी जाती है। IIWBR की फसल सलाह में कार्बोक्सिन 75 WP (2.5 ग्राम प्रति किलो बीज), कार्बेन्डाजिम 50 WP (2.5 ग्राम प्रति किलो बीज) या टेबुकोनाजोल 2DS (1.25 ग्राम प्रति किलो बीज) में से किसी एक से उपचार का उल्लेख है। उपचारित बीज का उपयोग केवल बुवाई के लिए करें, उसे खाने या पशु आहार में कभी न इस्तेमाल करें। रसायनों का उपयोग हमेशा लेबल पर दिए निर्देशों और स्थानीय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें।
खेत की तैयारी और फसल अवशेष
धान के बाद गेहूं बोने वाले क्षेत्रों में पराली जलाना एक बड़ी समस्या है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी के पोषक तत्व भी नष्ट होते हैं। IIWBR के अनुसार हैप्पी सीडर, टर्बो सीडर और रोटरी डिस्क ड्रिल जैसी मशीनों से फसल अवशेषों के बीच सीधे बुवाई की जा सकती है। जीरो टिलेज तकनीक से समय, ईंधन और लागत की बचत होती है। मशीन से बुवाई करने पर बीज समान गहराई पर गिरता है और अंकुरण बेहतर होता है।
खाद और उर्वरक: संतुलित मात्रा
उर्वरकों की मात्रा मिट्टी की जांच (सॉइल हेल्थ कार्ड) के आधार पर तय करना सबसे अच्छा है। IIWBR की सामान्य सिफारिशें इस प्रकार हैं (किलो प्रति हेक्टेयर, N:P:K):
- NWPZ और NEPZ, सिंचित समय पर बुवाई: 150:60:40
- NWPZ और NEPZ, सिंचित पछेती बुवाई: 120:60:40
- मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्र, सिंचित समय पर बुवाई: 120:60:40
- असिंचित (बारानी) स्थिति: 60:30:20, पूरी मात्रा बुवाई के समय
सिंचित फसल में नाइट्रोजन की एक-तिहाई मात्रा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में पहली और दूसरी सिंचाई के समय दें। सलाह है कि यूरिया सिंचाई से ठीक पहले डालें। कई मिट्टियों में जिंक, सल्फर और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी देखी जाती है, इसलिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर इनकी पूर्ति करें। गोबर की खाद या कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करता है।
पहली सिंचाई का सही समय
गेहूं में पहली सिंचाई का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। IIWBR की सलाह के अनुसार पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए। लगभग 21 दिन पर पौधों में “क्राउन रूट” (शिखर जड़) बनने की अवस्था (CRI stage) आती है; इस समय नमी की कमी से पैदावार पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बाद की सिंचाई मिट्टी, मौसम और फसल की जरूरत के अनुसार करें। जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें, इससे लागत भी बढ़ती है और फसल गिरने का खतरा भी।
खरपतवार नियंत्रण
गेहूं में गुल्ली डंडा (फैलेरिस माइनर), जंगली जई, बथुआ जैसे खरपतवार पैदावार को काफी कम कर सकते हैं। बुवाई के शुरुआती 30-35 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिहाज से अहम होते हैं। खरपतवारनाशी का चुनाव और मात्रा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से तय करें और एक ही दवा बार-बार इस्तेमाल करने से बचें, ताकि खरपतवारों में प्रतिरोधक क्षमता न बने।
किसानों के लिए त्वरित चेकलिस्ट
- मिट्टी की जांच कराएं और सॉइल हेल्थ कार्ड के अनुसार खाद डालें।
- अपने क्षेत्र और बुवाई समय के अनुसार अनुशंसित किस्म चुनें।
- प्रमाणित बीज खरीदें और बुवाई से पहले बीज उपचार करें।
- समय पर बुवाई करें; पछेती बुवाई में बीज दर बढ़ाएं।
- पराली न जलाएं, अवशेष प्रबंधन मशीनों का उपयोग करें।
- पहली सिंचाई 20-25 दिन पर करें।
- मौसम संबंधी सलाह और IIWBR/KVK की एडवाइजरी पर नजर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
गेहूं की बुवाई का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित स्थिति में 1-15 नवंबर और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में 10-20 नवंबर उपयुक्त माना गया है।
एक हेक्टेयर में कितना बीज लगता है?
समय पर बुवाई में लगभग 100 किलो और पछेती या असिंचित बुवाई में लगभग 125 किलो प्रति हेक्टेयर।
पहली सिंचाई कब करें?
बुवाई के लगभग 20-25 दिन बाद, जब फसल CRI अवस्था में होती है।
यूरिया कब डालें?
नाइट्रोजन की बची मात्रा पहली और दूसरी सिंचाई के समय दो हिस्सों में दें, और यूरिया सिंचाई से ठीक पहले डालें।

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran
