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Digital Arrest Scam: डिजिटल अरेस्ट क्या है, ठग कैसे फंसाते हैं और ऐसा कॉल आए तो क्या करें, जानें बचाव के तरीके

कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है। जानिए फर्जी पुलिस-CBI बनकर ठग कैसे फंसाते हैं, खतरे के संकेत क्या हैं और 1930 व cybercrime.gov.in पर शिकायत कैसे करें।

मुख्य बातें

  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?
  • ठग कैसे काम करते हैं: आम तरीके
  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खतरे के संकेत
  • ऐसा कॉल आए तो क्या करें
1 घंटे पहले
मोबाइल फोन पर नंबर डायल करता हाथ - Hand dialing a number on a smartphone
Photo: Wikimedia Commons, CC0 (public domain dedication)

“आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स मिले हैं”, “आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है”, “आप डिजिटल अरेस्ट में हैं, कैमरा बंद मत कीजिए”… ऐसे कॉल पिछले कुछ वर्षों में देशभर में हजारों लोगों के पास आए हैं और कई लोगों ने इनके कारण अपनी जीवनभर की कमाई गंवा दी। इसे “डिजिटल अरेस्ट” (Digital Arrest) स्कैम कहा जाता है। सबसे जरूरी बात शुरू में ही जान लें: भारत के कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है। इस लेख में जानिए यह ठगी कैसे होती है, इसके संकेत क्या हैं और ऐसा कॉल आने पर क्या करें।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?

डिजिटल अरेस्ट एक तरह की साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED), कस्टम, नारकोटिक्स विभाग, TRAI या किसी अदालत का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं। वे पीड़ित को डराते हैं कि उसके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और उसे “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” कर लिया गया है। फिर उसे घंटों या कई दिनों तक वीडियो कॉल पर रहने, किसी से बात न करने और “जांच” के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

27 अक्टूबर 2024 को “मन की बात” कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ठगी के खिलाफ देश को आगाह किया था। सरकारी जानकारी के अनुसार उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह पूछताछ नहीं करती, और लोगों को “रुको, सोचो और एक्शन लो” का मंत्र दिया।

ठग कैसे काम करते हैं: आम तरीके

1. फर्जी पार्सल या कूरियर का बहाना

कॉल करने वाला कहता है कि आपके नाम से विदेश भेजे गए या आए पार्सल में ड्रग्स, फर्जी पासपोर्ट या अवैध सामान मिला है।

2. आधार, सिम या बैंक खाते का दुरुपयोग

दावा किया जाता है कि आपके आधार या मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी अपराध या मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है और आपका नंबर बंद होने वाला है।

3. परिवार के सदस्य के फंसने की कहानी

कभी-कभी कहा जाता है कि आपका बेटा या कोई रिश्तेदार किसी मामले में पकड़ा गया है और उसे छुड़ाने के लिए तुरंत पैसे चाहिए।

4. नकली वर्दी, नकली दफ्तर और नकली दस्तावेज

वीडियो कॉल पर ठग पुलिस की वर्दी पहनकर, थाने जैसा बैकग्राउंड बनाकर और फर्जी गिरफ्तारी वारंट या अदालत के आदेश दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।

5. अलग-थलग करना और पैसे ट्रांसफर करवाना

पीड़ित से कहा जाता है कि वह कमरे में अकेला रहे, किसी को कुछ न बताए और कैमरा चालू रखे। फिर “जांच पूरी होने तक” या “खाते के सत्यापन” के नाम पर पैसा किसी खाते में भेजने को कहा जाता है, यह कहकर कि बाद में लौटा दिया जाएगा।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खतरे के संकेत

  • कोई “अधिकारी” वीडियो कॉल पर पूछताछ करे या गिरफ्तारी की बात करे।
  • आपसे किसी को कुछ न बताने और लगातार कॉल पर बने रहने को कहा जाए।
  • तुरंत पैसे ट्रांसफर करने, बैंक डिटेल, OTP या आधार की जानकारी मांगी जाए।
  • WhatsApp या Skype जैसे ऐप पर “वारंट” या “कोर्ट ऑर्डर” भेजे जाएं।
  • डर और जल्दबाजी का माहौल बनाया जाए, जैसे “अभी नहीं किया तो गिरफ्तार कर लेंगे”।

याद रखें: पुलिस, CBI, ED या कोई भी अदालत वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही “मामला निपटाने” के लिए पैसे मांगती है।

ऐसा कॉल आए तो क्या करें

  1. रुकें: घबराएं नहीं और कोई भी निजी या बैंक संबंधी जानकारी न दें।
  2. सोचें: कोई सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह धमकी नहीं देती। कॉल काट दें।
  3. बात करें: तुरंत परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं। अकेले फैसला न करें।
  4. खुद पुष्टि करें: शक हो तो नजदीकी पुलिस थाने में खुद जाकर या आधिकारिक नंबर पर बात करके जानकारी लें।
  5. सबूत रखें: कॉल करने वाले नंबर, स्क्रीनशॉट और भेजे गए दस्तावेज सुरक्षित रखें।
  6. शिकायत करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

अगर पैसे भेज दिए हों तो

अगर ठगी में पैसा ट्रांसफर हो गया है, तो बिना देर किए 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही संभावना रहती है कि संबंधित बैंक खाते में रकम को रोका (freeze) जा सके। साथ ही अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करें और cybercrime.gov.in पर लिखित शिकायत दर्ज करें।

संदिग्ध नंबर की रिपोर्ट कैसे करें

अगर आपके साथ पैसों की ठगी नहीं हुई है, लेकिन संदिग्ध कॉल, SMS या WhatsApp मैसेज आया है, तो दूरसंचार विभाग के “संचार साथी” पोर्टल या ऐप पर उपलब्ध “चक्षु” (Chakshu) सुविधा के जरिए उस नंबर की रिपोर्ट की जा सकती है। इससे ऐसे नंबरों पर कार्रवाई में मदद मिलती है।

सरकार क्या कर रही है

गृह मंत्रालय के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) इस तरह की ठगी से निपटने के लिए राज्यों की पुलिस, बैंकों और दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर काम करता है। सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार I4C ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े हजारों Skype ID और WhatsApp अकाउंट ब्लॉक कराए हैं। जागरूकता के लिए अखबारों, रेडियो, सोशल मीडिया और कॉलर ट्यून के जरिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।

बुजुर्गों और परिवार को कैसे सुरक्षित रखें

  • घर के बुजुर्गों को इस ठगी के तरीकों के बारे में सरल भाषा में बताएं।
  • उन्हें समझाएं कि ऐसा कॉल आने पर सबसे पहले परिवार को फोन करें।
  • अनजान वीडियो कॉल न उठाने और स्क्रीन शेयर न करने की सलाह दें।
  • 1930 हेल्पलाइन नंबर फोन में सेव करवा दें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

क्या भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया है?

नहीं। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पूछताछ नहीं करती।

साइबर ठगी की शिकायत कहां करें?

राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर या cybercrime.gov.in पोर्टल पर।

पैसे भेजने के बाद क्या रकम वापस मिल सकती है?

जल्दी शिकायत करने पर बैंक खाते में रकम रोके जाने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए बिना देर किए 1930 पर कॉल करें।

संदिग्ध कॉल की रिपोर्ट कहां करें?

संचार साथी पोर्टल/ऐप की “चक्षु” सुविधा पर।

Sudhanshu Tiwari
Author: Sudhanshu Tiwari

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran

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