आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट या 10वीं-12वीं की मार्कशीट, ये ऐसे दस्तावेज हैं जिनकी जरूरत हमें बार-बार पड़ती है। इन्हें हर जगह साथ ले जाना और सुरक्षित रखना आसान नहीं होता। इसी समस्या का समाधान है भारत सरकार का DigiLocker, एक डिजिटल “लॉकर” जहां आपके जरूरी दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप में सुरक्षित रहते हैं और जरूरत पड़ने पर मोबाइल से ही दिखाए या साझा किए जा सकते हैं। इस लेख में जानिए DigiLocker क्या है, इसमें अकाउंट कैसे बनाएं, दस्तावेज कैसे डाउनलोड करें और इसके कानूनी मान्यता से जुड़ी अहम बातें।
DigiLocker Guide: डिजिलॉकर में अकाउंट कैसे बनाएं और आधार, पैन, DL व मार्कशीट कैसे डाउनलोड करें, जानें पूरी प्रक्रिया
DigiLocker क्या है, अकाउंट कैसे बनाएं, आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस और मार्कशीट कैसे प्राप्त करें, और इसके दस्तावेजों की कानूनी मान्यता से जुड़ी पूरी जानकारी।
मुख्य बातें
- DigiLocker क्या है?
- DigiLocker में दस्तावेज कितने तरह के होते हैं
- क्या DigiLocker के दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य हैं?
- DigiLocker अकाउंट कैसे बनाएं: स्टेप बाय स्टेप

DigiLocker क्या है?
DigiLocker इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की “डिजिटल इंडिया” पहल के तहत शुरू की गई सेवा है। सरकारी जानकारी के अनुसार इसे 1 जुलाई 2015 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य नागरिकों को सरकारी और अधिकृत संस्थाओं द्वारा जारी दस्तावेजों तक डिजिटल रूप में तुरंत पहुंच देना और कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम करना है। DigiLocker की आधिकारिक वेबसाइट digilocker.gov.in है और इसका मोबाइल ऐप Android और iOS दोनों पर उपलब्ध है।
DigiLocker में दस्तावेज कितने तरह के होते हैं
1. Issued Documents (जारी दस्तावेज)
ये वे दस्तावेज हैं जो सीधे जारी करने वाली संस्था (Issuer), जैसे UIDAI, आयकर विभाग, परिवहन विभाग या शिक्षा बोर्ड, की ओर से आपके DigiLocker में डिजिटल हस्ताक्षर के साथ भेजे जाते हैं। ये असली स्रोत से जुड़े होते हैं, इसलिए इन्हें सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
2. Uploaded Documents (अपलोड किए गए दस्तावेज)
इस हिस्से में आप अपने दस्तावेजों की स्कैन कॉपी खुद अपलोड करके रख सकते हैं। यह एक तरह का निजी स्टोरेज (DigiLocker Drive) है, जिसमें सीमित जगह मिलती है। DigiLocker के आधिकारिक जवाबों के अनुसार सरकारी काम के लिए “Issued Documents” वाले दस्तावेजों का उपयोग करना बेहतर है।
क्या DigiLocker के दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य हैं?
हां। जुलाई 2016 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत डिजिटल लॉकर से जुड़े नियम अधिसूचित किए गए थे और 8 फरवरी 2017 को इनमें संशोधन कर नियम 9A जोड़ा गया। इसके अनुसार DigiLocker के जरिए जारी डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेजों को भौतिक (कागजी) दस्तावेजों के बराबर स्वीकार किया जा सकता है। DigiLocker के आधिकारिक FAQ के मुताबिक “Issued Documents” सेक्शन के दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक रूप में इस्तेमाल किए जाने पर मूल दस्तावेजों के समान माने जाते हैं।
DigiLocker अकाउंट कैसे बनाएं: स्टेप बाय स्टेप
- DigiLocker ऐप डाउनलोड करें या digilocker.gov.in वेबसाइट खोलें। ऐप हमेशा आधिकारिक ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें।
- “Sign Up” पर क्लिक करें।
- अपना नाम (आधार के अनुसार), जन्मतिथि, लिंग और मोबाइल नंबर दर्ज करें।
- एक 6 अंकों का सुरक्षा पिन (Security PIN) बनाएं और ईमेल (वैकल्पिक) दर्ज करें।
- आधार नंबर डालें और मोबाइल पर आए OTP से सत्यापन करें।
- सत्यापन पूरा होने के बाद आपका अकाउंट तैयार हो जाएगा और एक यूजरनेम बन जाएगा।
DigiLocker की सेवाएं सरकार के UMANG ऐप के जरिए भी इस्तेमाल की जा सकती हैं।
DigiLocker से दस्तावेज कैसे प्राप्त करें
- लॉगिन करने के बाद “Search Documents” या “Issued Documents” सेक्शन में जाएं।
- वह संस्था चुनें जिसका दस्तावेज चाहिए, जैसे परिवहन विभाग (ड्राइविंग लाइसेंस), आयकर विभाग (पैन) या आपका शिक्षा बोर्ड।
- मांगी गई जानकारी दर्ज करें, जैसे लाइसेंस नंबर, रोल नंबर या पास होने का वर्ष।
- “Get Document” पर क्लिक करें। जानकारी सही होने पर दस्तावेज आपके “Issued Documents” में जुड़ जाएगा।
आधार से अकाउंट बनाने पर आधार कार्ड आमतौर पर अपने आप जुड़ जाता है। अगर किसी पुराने वर्ष की मार्कशीट उपलब्ध नहीं है, तो DigiLocker के सपोर्ट पोर्टल (support.digilocker.gov.in) पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
DigiLocker में मिलने वाले प्रमुख दस्तावेज
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- CBSE और कई राज्य बोर्डों की मार्कशीट व प्रमाणपत्र
- कई विश्वविद्यालयों की डिग्री
- कुछ राज्यों के जाति, निवास और आय प्रमाणपत्र
- बीमा पॉलिसी और अन्य दस्तावेज, जो जारीकर्ता संस्था उपलब्ध कराती है
उपलब्ध दस्तावेज राज्य और संस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
DigiLocker के फायदे
- हमेशा साथ: मोबाइल में दस्तावेज रहने से उन्हें खोने या भूलने का डर कम होता है।
- सत्यापन आसान: संस्थाएं सीधे स्रोत से दस्तावेज की जांच कर सकती हैं, जिससे फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगती है।
- कागज की बचत: बार-बार फोटोकॉपी और सेल्फ-अटेस्टेशन की जरूरत कम होती है।
- आसान साझा करना: सहमति देकर दस्तावेज जरूरत के अनुसार किसी संस्था के साथ साझा किए जा सकते हैं।
सुरक्षा से जुड़ी सावधानियां
- अपना सुरक्षा पिन और OTP किसी के साथ साझा न करें।
- केवल आधिकारिक ऐप और वेबसाइट (digilocker.gov.in) का ही उपयोग करें; मिलते-जुलते नाम वाले फर्जी ऐप से बचें।
- सार्वजनिक कंप्यूटर पर इस्तेमाल के बाद लॉगआउट करना न भूलें।
- DigiLocker के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल या लिंक पर भरोसा न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या DigiLocker इस्तेमाल करना मुफ्त है?
हां, नागरिकों के लिए DigiLocker अकाउंट बनाना और दस्तावेज प्राप्त करना निःशुल्क है।
क्या DigiLocker के दस्तावेज मूल के बराबर माने जाते हैं?
“Issued Documents” सेक्शन के डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेज IT नियमों के तहत इलेक्ट्रॉनिक रूप में मूल दस्तावेजों के समान माने जाते हैं।
DigiLocker अकाउंट के लिए क्या चाहिए?
एक मोबाइल नंबर और आधार नंबर, जिससे OTP के जरिए सत्यापन होता है।
पुरानी मार्कशीट DigiLocker में न मिले तो क्या करें?
support.digilocker.gov.in पर टिकट दर्ज करें और अपनी जानकारी, जैसे रोल नंबर और पास होने का वर्ष, साझा करें।

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran
