सरसों (राई-सरसों) भारत की सबसे प्रमुख रबी तिलहन फसलों में से एक है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती होती है। खाद्य तेल के लिए देश की आयात पर निर्भरता कम करने में सरसों की भूमिका अहम है। कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली यह फसल सही समय पर बुवाई, संतुलित खाद और कीटों से बचाव पर निर्भर करती है। इस लेख में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े संस्थानों की सामान्य सिफारिशों के आधार पर जानिए सरसों की खेती का पूरा तरीका।
Mustard Farming: सरसों की खेती का पूरा तरीका, बुवाई का समय, बीज दर, खाद, सिंचाई और माहू से बचाव
सरसों की अच्छी पैदावार के लिए ICAR की सिफारिशों पर आधारित पूरी जानकारी: बुवाई का सही समय, बीज दर, खाद-उर्वरक, सल्फर का महत्व, सिंचाई, माहू और रोगों से बचाव।
मुख्य बातें
- सरसों के लिए जलवायु और मिट्टी
- खेत की तैयारी
- बुवाई का सही समय
- किस्म का चुनाव

सरसों के लिए जलवायु और मिट्टी
सरसों ठंडी और शुष्क जलवायु की फसल है। अंकुरण और शुरुआती बढ़वार के लिए दिन का तापमान बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए। ICAR की सिफारिशों के अनुसार बुवाई तब करनी चाहिए जब दिन का तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाए। हल्की दोमट से दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकास अच्छा हो, सरसों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी रुकना फसल के लिए नुकसानदायक है।
खेत की तैयारी
- पिछली फसल की कटाई के बाद खेत की एक गहरी जुताई और फिर 2-3 हल्की जुताई करें।
- पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा और समतल बनाएं, ताकि छोटे बीज अच्छी तरह अंकुरित हो सकें।
- बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए; जरूरत हो तो पलेवा करें।
- संभव हो तो बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं, ताकि खाद की सही मात्रा तय हो सके।
बुवाई का सही समय
ICAR से जुड़ी सिफारिशों के अनुसार सरसों की समय पर बुवाई आमतौर पर 10 से 25 अक्टूबर के बीच की जाती है, और 20 अक्टूबर तक बुवाई को बेहतर माना गया है। बुवाई में देरी होने पर फसल पर माहू (एफिड) का प्रकोप बढ़ने और पैदावार घटने का खतरा रहता है। अगर किसी कारण से बुवाई देर से हो रही हो, तो अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग से पछेती बुवाई के लिए उपयुक्त किस्म की सलाह जरूर लें।
किस्म का चुनाव
अपने क्षेत्र, सिंचाई की उपलब्धता और बुवाई के समय के अनुसार अनुशंसित किस्म चुनें। ICAR-सरसों अनुसंधान निदेशालय (DRMR), भरतपुर और राज्य कृषि विश्वविद्यालय अलग-अलग परिस्थितियों के लिए उन्नत किस्में विकसित करते हैं। प्रमाणित बीज ही खरीदें और बीज खरीदते समय उसका बिल संभालकर रखें।
बीज दर, दूरी और बीज उपचार
- बीज दर: कतार में बुवाई के लिए आमतौर पर 3 से 5 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की सिफारिश की जाती है; सही मात्रा किस्म और क्षेत्र के अनुसार तय करें।
- दूरी: ICAR की एक सिफारिश के अनुसार कतार से कतार 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे 15 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा सकती है।
- गहराई: बीज छोटा होता है, इसलिए इसे ज्यादा गहराई पर न बोएं।
- बीज उपचार: बुवाई से पहले बीज को अनुशंसित फफूंदनाशी से उपचारित करें, ताकि मिट्टी और बीज से फैलने वाले रोगों से बचाव हो सके।
- छंटाई (थिनिंग): घने उगे पौधों को निकालकर सही दूरी बनाए रखें।
खाद और उर्वरक प्रबंधन
ICAR की सिफारिशों में सिंचित सरसों के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 80 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फॉस्फोरस और 40 किलो पोटाश के साथ 40 किलो सल्फर, 25 किलो जिंक सल्फेट और 10 किलो बोरेक्स का उल्लेख है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा बुवाई के समय और बाकी आधी पहली सिंचाई के समय दी जाती है।
सल्फर क्यों जरूरी है
तिलहन फसलों में सल्फर तेल की मात्रा और दानों की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है। इसलिए सरसों में सल्फर की कमी न होने दें। अंतिम मात्रा हमेशा मिट्टी जांच रिपोर्ट या सॉयल हेल्थ कार्ड के आधार पर तय करें। गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी की सेहत के लिए फायदेमंद है।
सिंचाई प्रबंधन
सरसों को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती। ICAR की सिफारिश के अनुसार आमतौर पर दो सिंचाइयां पर्याप्त होती हैं:
- पहली सिंचाई: बुवाई के लगभग 35-40 दिन बाद, फूल आने से पहले।
- दूसरी सिंचाई: बुवाई के लगभग 65-70 दिन बाद, फलियां बनने की शुरुआती अवस्था में।
हल्की सिंचाई करें और खेत में पानी जमा न होने दें। फूल आने और फलियों में दाना भरने के समय नमी की कमी से पैदावार पर असर पड़ता है।
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के शुरुआती 25-30 दिनों में खरपतवार फसल से पोषक तत्वों और नमी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस दौरान निराई-गुड़ाई करने से फसल को काफी फायदा होता है। रसायनों का उपयोग केवल कृषि विशेषज्ञ की सलाह से और लेबल पर बताई गई मात्रा में ही करें।
कीट और रोग से बचाव
माहू (एफिड)
माहू सरसों का सबसे नुकसानदायक कीट माना जाता है। यह पौधों का रस चूसकर फूल और फलियों को नुकसान पहुंचाता है। समय पर बुवाई, खेत की नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से नियंत्रण उपाय अपनाएं।
रोग
अल्टरनेरिया झुलसा, सफेद रतुआ और तना सड़न (स्क्लेरोटिनिया) जैसे रोग सरसों को प्रभावित कर सकते हैं। रोग के लक्षण दिखते ही नजदीकी KVK से संपर्क करें। मधुमक्खियां सरसों के परागण में मदद करती हैं, इसलिए छिड़काव शाम के समय करें ताकि उन्हें कम नुकसान हो।
कटाई और भंडारण
जब ज्यादातर फलियां पीली-भूरी होने लगें, तब कटाई करें। बहुत देर करने पर फलियां चटककर दाने खेत में गिर सकते हैं। कटाई के बाद फसल को सुखाकर मड़ाई करें और दानों को अच्छी तरह सुखाकर सूखी जगह पर भंडारित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सरसों की बुवाई का सही समय क्या है?
ICAR की सिफारिशों के अनुसार आमतौर पर 10 से 25 अक्टूबर, और बेहतर है कि 20 अक्टूबर तक बुवाई हो जाए।
सरसों में कितनी सिंचाई चाहिए?
आमतौर पर दो: फूल आने से पहले और फलियां बनने के समय।
सरसों में सल्फर क्यों डालें?
सल्फर तेल की मात्रा और दानों की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करता है।
सरसों का सबसे बड़ा कीट कौन सा है?
माहू (एफिड) को सरसों का प्रमुख कीट माना जाता है।

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कवरेज: Sudhanshu Tiwari, News Media Kiran
