दिवाली के बाद पंजाब में बड़ा सियासी फेरबदल, बीजेपी-अकाली दल गठबंधन लगभग तय, सीएम चेहरा अकाली दल से
By Sanjna Gupta | News Media Kiran
प्रकाशित: · 5 मिनट में पढ़ें
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मुख्य बातें
सीटों का बंटवारा और मुख्यमंत्री का चेहरा कैसे तय हो रहा है?
दिवाली के बाद बठिंडा से ऐलान क्यों हो सकता है?
बागी अकाली गुटों का गठबंधन में शामिल होना मुश्किल क्यों है?
हरसिमरत कौर बादल की मोदी कैबिनेट में वापसी की संभावना
1 मिनट पहले
Punjab Assembly Election
Punjab Assembly Election: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पुरानी साझेदारी लौटने की खबरें जोर पकड़ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन लगभग पक्का कर लिया है। सीटों के बंटवारे पर बातचीत अंतिम चरण में है और शर्त यह रखी गई है कि अगर सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री का पद अकाली दल के हिस्से में जाएगा। दिवाली के तुरंत बाद बठिंडा से आधिकारिक ऐलान की संभावना जताई जा रही है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में दोनों पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आ सकते हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में 2027 में पंजाब में एनडीए सरकार बनने का दावा किया था। इसी बयान के बाद गठबंधन की चर्चा और तेज हो गई। अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल ने भी अप्रत्यक्ष रूप से रास्ता खुला छोड़ दिया है। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन जिनकी सोच मेल खाती है उनके साथ गठबंधन के दरवाजे खुले हैं। उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल पहले ही संकेत दे चुकी हैं।
सीटों का बंटवारा और मुख्यमंत्री का चेहरा कैसे तय हो रहा है?
गठबंधन की डील लगभग अंतिम रूप ले चुकी है। चर्चा के अनुसार इस बार बीजेपी 35 से 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है, जबकि बाकी करीब 67 सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ेगा। याद रहे कि 1997 से 2017 तक बीजेपी आमतौर पर सिर्फ 23 सीटों पर ही चुनाव लड़ती थी। अब पार्टी बराबरी का दावा कर रही है और अधिक सीटें मांग रही है। सूत्रों का कहना है कि सीट शेयरिंग पर बातचीत चल रही है, लेकिन मुख्यमंत्री का पद अकाली दल को देने की शर्त लगभग मंजूर हो गई है।
यह बदलाव पंजाब की राजनीति में बड़ा माना जा रहा है। बीजेपी पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। अकाली दल के साथ पुराना गठबंधन टूटने के बाद दोनों पक्षों को नुकसान हुआ था। अब दोनों को लगता है कि एक साथ आने से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ बेहतर मुकाबला किया जा सकता है। अगर यह डील पक्की होती है तो 2027 का चुनाव काफी दिलचस्प हो जाएगा।
दिवाली के बाद बठिंडा से ऐलान क्यों हो सकता है?
सूत्र बताते हैं कि दिवाली के त्योहार के तुरंत बाद गठबंधन की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इसके लिए बठिंडा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बड़ी रैली कर सकते हैं। दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता एक ही मंच पर नजर आएंगे। अमित शाह के हालिया बयान ने इस संभावना को और मजबूत किया है। बठिंडा को इसलिए चुना जा रहा है क्योंकि यह इलाका अकाली दल और बीजेपी दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे ऐलान से पहले दोनों पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को तैयार करने की कोशिश कर रही हैं। पुरानी साझेदारी के दौरान कई बार मतभेद भी हुए थे, इसलिए इस बार सीट बंटवारे और पदों पर सावधानी से बात हो रही है। अगर ऐलान होता है तो पंजाब की सियासत में नया समीकरण बन जाएगा।
बागी अकाली गुटों का गठबंधन में शामिल होना मुश्किल क्यों है?
चर्चा थी कि अकाली दल से अलग हुए बागी गुट, जैसे अकाली दल पुनर्सुरजीत, भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। लेकिन अब यह मुश्किल लग रहा है। सबसे बड़ी वजह यह है कि ये गुट अभी तक रजिस्टर्ड पार्टी नहीं बन पाए हैं। बिना रजिस्ट्रेशन के वे स्वतंत्र रूप से चुनाव नहीं लड़ सकते। उन्हें बीजेपी या अकाली दल के चुनाव चिह्न पर निर्भर रहना पड़ेगा।
इस स्थिति में बागी नेताओं के लिए रास्ते सीमित हो गए हैं। कुछ का कहना है कि वे व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर सकते हैं, लेकिन पार्टी के रूप में शामिल होना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा। इससे मुख्य गठबंधन की डील और साफ होती जा रही है।
हरसिमरत कौर बादल की मोदी कैबिनेट में वापसी की संभावना
गठबंधन के साथ केंद्र सरकार में भी बदलाव की बात हो रही है। रवनीत बिट्टू के हटने के बाद केंद्र में पंजाब का कोई बड़ा प्रतिनिधित्व नहीं बचा है। सूत्रों का कहना है कि सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल को एक बार फिर मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया जा सकता है। यह कदम चुनाव से पहले पंजाब के वोटरों को संदेश देने का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
हरसिमरत कौर पहले भी केंद्र में मंत्री रह चुकी हैं। उनकी वापसी से अकाली दल को केंद्र में जगह मिल सकती है और गठबंधन मजबूत दिख सकता है। सुखबीर बादल ने गठबंधन को लेकर इनकार नहीं किया है, जिससे यह संभावना और बढ़ गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: बीजेपी और अकाली दल के बीच सीटों का बंटवारा कैसे हो सकता है?
जवाब: चर्चा के अनुसार बीजेपी 35 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि अकाली दल करीब 67 सीटों पर। पहले बीजेपी सिर्फ 23 सीटों पर लड़ती थी।
प्रश्न: अगर सरकार बनी तो मुख्यमंत्री कौन होगा?
जवाब: शर्त यह रखी गई है कि मुख्यमंत्री का पद अकाली दल के हिस्से में जाएगा।
प्रश्न: गठबंधन की आधिकारिक घोषणा कब हो सकती है?
जवाब: दिवाली के तुरंत बाद बठिंडा से ऐलान की संभावना है, जहां प्रधानमंत्री मोदी की रैली में दोनों पार्टियों के नेता एक मंच पर आ सकते हैं।
Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.
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