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Asian Games Gold Meda: वैभव सूर्यवंशी से भी छोटा, 11 साल के जापानी बच्चे ने एशियन गेम्स में रचा इतिहास, जीता गोल्ड मेडल

26 सितंबर 2026
Asian Games Gold Meda
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Asian Games Gold Meda: एशियन गेम्स में इस बार एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जापान के महज 11 साल के युकी कुरिहारा ने ई-स्पोर्ट्स के पुयो पुयो चैम्पियंस इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि युकी की उम्र भारत के युवा स्टार बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से भी कम है, जो फिलहाल 15 साल के हैं। एलीमेंट्री स्कूल में पढ़ने वाले युकी ने शनिवार को फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया के कांग डोंगशिन को 10-2 के बड़े अंतर से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने थाईलैंड के 28 साल के अनुभवी खिलाड़ी तनारक वोंगकितिकुन को भी 10-1 से मात दी थी। इस जीत के साथ ही युकी को एशियन गेम्स के इतिहास का सबसे कम उम्र का गोल्ड मेडलिस्ट माना जा रहा है, हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक सार्वजनिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

किंडरगार्टन से शुरू हुआ था गेमिंग का सफर

युकी कुरिहारा का ई-स्पोर्ट्स की दुनिया में सफर बहुत छोटी उम्र में ही शुरू हो गया था। जापानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वह किंडरगार्टन के समय से ही इस खेल में अपनी पकड़ बनाने लगे थे। बचपन से ही गेमिंग के प्रति उनका लगाव इतना गहरा था कि उन्होंने इसे लगातार निखारते हुए एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच तक अपनी जगह बना ली। यह उदाहरण बताता है कि सही उम्र में सही दिशा मिलने पर बच्चे किस तरह असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

रोजाना आठ घंटे की कड़ी ट्रेनिंग

गोल्ड मेडल तक पहुंचने के पीछे युकी की मेहनत भी कम अहम नहीं रही। जापानी मीडिया के मुताबिक वह रोजाना करीब आठ घंटे तक ट्रेनिंग करते हैं, जो उनकी उम्र को देखते हुए एक बड़ी बात मानी जा रही है। इतनी छोटी उम्र में इतने अनुशासन के साथ अभ्यास करना उनकी लगन और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। खास बात यह भी है कि गेमिंग में इतना समय देने के बावजूद युकी अपनी स्कूली पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे यह साफ होता है कि उन्होंने पढ़ाई और खेल के बीच बेहतरीन संतुलन बना रखा है।

फाइनल में दिखाया दमदार खेल

फाइनल मुकाबले में युकी का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने दक्षिण कोरिया के अनुभवी खिलाड़ी कांग डोंगशिन के खिलाफ 10-2 के बड़े स्कोर से जीत दर्ज की। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उनका खेल उतना ही दमदार नजर आया, जहां उन्होंने थाईलैंड के 28 साल के तनारक वोंगकितिकुन को 10-1 से हराया। इतने अनुभवी और उम्रदराज खिलाड़ियों के खिलाफ इस तरह की जीत दर्ज करना युकी की काबिलियत का स्पष्ट प्रमाण है।

गोल्ड मेडल देखकर छलका मासूम अंदाज

गोल्ड मेडल जीतने के बाद युकी ने अपनी खुशी बेहद मासूम अंदाज में जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेडल बहुत सुंदर, चमकदार और भारी है। इसके साथ ही उन्हें मेडल के साथ मिला गोल्ड रंग का प्लश टॉय भी बेहद पसंद आया। यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बावजूद युकी अभी भी एक साधारण बच्चे की तरह ही अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, जो उन्हें और भी खास बनाता है।

ई-स्पोर्ट्स की एशियन गेम्स में बढ़ती लोकप्रियता

एशियन गेम्स में ई-स्पोर्ट्स की शुरुआत करीब तीन साल पहले चीन के हांगझोऊ में हुई थी। उस समय इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके टिकट लॉटरी के जरिए बेचे गए थे। जापान में भी ई-स्पोर्ट्स को दर्शकों और खिलाड़ियों के बीच खासा पसंद किया जाता है। युकी की इस जीत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ई-स्पोर्ट्स अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

एशियन गेम्स में इस बार छाई कम उम्र की प्रतिभाएं

इस बार एशियन गेम्स में युकी अकेले ऐसे युवा खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्होंने कम उम्र में कमाल दिखाया हो। हॉन्ग कॉन्ग के 12 साल के कमुस वोंग स्केटबोर्डिंग स्पर्धा में हिस्सा ले रहे हैं, जबकि चीन की 13 साल की यू जिदी ने स्विमिंग में तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। वहीं जापान के 17 साल के तैराक शिन ओहाशी ने गुरुवार को 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक स्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जिन्हें इस उम्र समूह के बीच ‘सीनियर’ कहा जा सकता है।

पहले भी बन चुके हैं कम उम्र में मेडल के रिकॉर्ड

एशियन गेम्स के इतिहास में कम उम्र में पदक जीतने के उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। इंडोनेशिया की बुंगा न्यामस ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स के दौरान महज 12 साल की उम्र में महिला स्केटबोर्डिंग स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इसी तरह चीन की कुई चेनशी ने हांगझोऊ एशियन गेम्स में 13 साल की उम्र में महिला स्ट्रीट स्केटबोर्डिंग का गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इन उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि खेल जगत में उम्र कभी भी प्रतिभा के आड़े नहीं आती।

भारतीय क्रिकेट से जुड़ी तुलना ने बढ़ाई चर्चा

युकी कुरिहारा की उम्र को लेकर भारत के युवा क्रिकेट स्टार वैभव सूर्यवंशी से तुलना ने भी इस खबर को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। वैभव, जो अपनी बल्लेबाजी से भारतीय क्रिकेट में पहले ही सुर्खियां बटोर चुके हैं, फिलहाल 15 साल के हैं, जबकि युकी उनसे चार साल छोटे हैं। इस तुलना ने खेल प्रेमियों के बीच यह चर्चा छेड़ दी है कि दुनियाभर में अलग-अलग खेलों में कम उम्र के खिलाड़ी अब बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

एशियन गेम्स में युकी कुरिहारा की यह उपलब्धि सिर्फ एक गोल्ड मेडल जीतने भर की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि उम्र किसी भी क्षेत्र में सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। रोजाना आठ घंटे की मेहनत और पढ़ाई के साथ खेल का संतुलन बनाकर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाले समय में कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन सकता है। ई-स्पोर्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच युकी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का सामने आना इस खेल के भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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