Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो रहा है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बिहार चुनाव 2025 में 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह संख्या पिछले चुनावों से पांच गुना ज्यादा है। AIMIM का लक्ष्य तीसरा विकल्प बनना है, जो महागठबंधन के अल्पसंख्यक वोटों को बांट सकता है। ओवैसी ने हाल ही में सीमांचल का दौरा किया और कार्यकर्ताओं से नई रणनीति पर चर्चा की। किशनगंज में उन्होंने कहा, बिहार को नया विकल्प चाहिए। हम सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक हक के लिए लड़ेंगे।” यह कदम तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के इंडिया गठबंधन के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है।
AIMIM का बिहार सफर: 2015 से 2020 तक की जीत-हार
AIMIM ने 2015 में बिहार में पहला कदम रखा। सीमांचल की छह सीटों पर लड़े, लेकिन हार गए। किशनगंज के कोचाधामन से अख्तरुल ईमान को 37 हजार वोट मिले, जो कुल का 26 प्रतिशत था। 2020 में 20 सीटों पर उतरे और पांच जीतीं। अमौर, बहादुरगंज, बायसी, कोचाधामन और जोकीहाट में जीत मिली। विजेताओं में अख्तरुल ईमान, मोहम्मद अंजार नइमी, सैयद रुकनुद्दीन, इजहार असर्फी और शाहनवाज आलम शामिल थे। लेकिन 2022 में झटका लगा, जब चार विधायक राजद में चले गए। 16 मुस्लिम और चार गैर-मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, लेकिन गैर-मुस्लिमों को कम वोट मिले। मनिहारी से 2475 और रानीगंज से 2412 वोट ही हासिल हुए। अब AIMIM 100 सीटों पर दांव लगाने को तैयार है।
गठबंधनों पर असर: मुस्लिम वोटों में बंटवारा
बिहार में मुस्लिम आबादी 17.7 प्रतिशत से ज्यादा है। 47 सीटों पर वे निर्णायक हैं, ज्यादातर सीमांचल (कटिहार, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया) में। AIMIM की रणनीति से महागठबंधन को नुकसान हो सकता है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद और तेजस्वी को पत्र लिखा, लेकिन जवाब नहीं आया। AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कहा, हम तीसरा विकल्प हैं। राजग और महागठबंधन दोनों को चुनौती देंगे।
रणनीति और चुनावी तारीखें
AIMIM 100 सीटों पर मुस्लिम बहुल और पिछड़ी जातियों वाली जगहों पर फोकस करेगी। पहला चरण 6 नवंबर, दूसरा 11 नवंबर को। मतगणना 14 नवंबर को। यह कदम बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। अगर आप वोटर हैं, तो तैयार रहें।



