Bihar Chunav News: तेजस्वी यादव को चुनाव आयोग का नोटिस, दो वोटर आईडी पर मांगा जवाब
दो वोटर आईडी कार्ड रखने के मामले में तेजस्वी यादव को चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिस, जानिए पूरा मामला

Bihar Chunav News 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव मुश्किल में फंस गए हैं। आयोग ने तेजस्वी को दो वोटर आईडी कार्ड रखने के मामले में नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे उस वोटर आईडी (EPIC नंबर RAB2916120) का ब्यौरा मांगा है, जिसके आधार पर उन्होंने दावा किया था कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। यह खबर बिहार की सियासत में हलचल मचा रही है।
तेजस्वी का दावा और आयोग का जवाब
2 अगस्त 2025 को तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका नाम बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब है। उन्होंने अपने फोन पर EPIC नंबर RAB2916120 डालकर दिखाया, जिससे कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। तेजस्वी ने इसे गरीब और कमजोर वर्ग के वोटरों को हटाने की साजिश बताया। लेकिन, चुनाव आयोग ने उनके दावे को गलत ठहराया। आयोग ने कहा कि तेजस्वी का नाम वोटर लिस्ट में क्रमांक 416 पर मौजूद है, जिसका EPIC नंबर RAB0456228 है। यह वही नंबर है, जिसे तेजस्वी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल किया था। आयोग ने बताया कि दूसरा EPIC नंबर (RAB2916120) आधिकारिक रिकॉर्ड में नहीं है।
Bihar Chunav News: बीजेपी का तेजस्वी पर हमला
बीजेपी ने इस मामले को लेकर तेजस्वी पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अगर तेजस्वी के पास दो वोटर आईडी हैं, तो यह लोकतंत्र के साथ धोखा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आरजेडी का नेता दो वोटर आईडी रख सकता है, तो उसके कार्यकर्ता क्या करते होंगे? बीजेपी ने इसे मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया का विरोध करने की वजह बताया।
जांच शुरू, तेजस्वी से जवाब तलब
चुनाव आयोग ने दीघा विधानसभा क्षेत्र के अधिकारी के जरिए तेजस्वी को पत्र लिखकर EPIC नंबर RAB2916120 का विवरण मांगा है। आयोग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जल्द जवाब देने को कहा है। अगर दो वोटर आईडी का आरोप सही पाया गया, तो तेजस्वी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
वोटर लिस्ट पर पहले से विवाद
बिहार में वोटर लिस्ट की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर पहले से ही हंगामा चल रहा है। तेजस्वी और विपक्षी दल इसे गरीब वोटरों को हटाने की साजिश बता रहे हैं। आयोग के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 65 लाख नाम हटाए गए हैं, जिनमें पटना के 3.95 लाख नाम शामिल हैं।