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बिहार चुनाव 2025: यादव-मुस्लिम के बाद नाई, कुम्हार, लोहार पर तेजस्वी का फोकस, 5 लाख ब्याजमुक्त लोन का वादा

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव ने रविवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक नया चुनावी दांव खेला। यादव और मुस्लिम वोटबैंकों को मजबूत करने के बाद अब उन्होंने नाई, कुम्हार, लोहार, बढ़ई और सोनार जैसे पारंपरिक मेहनतकश जातियों पर नजरें टिकाई हैं। तेजस्वी ने वादा किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर इन जातियों के राशन कार्ड धारक परिवारों को स्वरोजगार के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा। यह घोषणा छोटे कारोबारियों और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

तेजस्वी ने कहा, “नाई, कुम्हार, बढ़ई, लोहार और सोनार जैसे मेहनती वर्गों के साथ हमारी लंबी चर्चा हुई है। इनकी आर्थिक उन्नति बिना सरकारी सहायता के संभव नहीं। हम उन्हें 5 लाख तक का ब्याजमुक्त लोन देकर उनके कारोबार को मजबूत करेंगे, ताकि वे परिवार चलाने में सक्षम हों।” यह वादा छठ महापर्व के दौरान किया गया, जो बिहार की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए वोटरों को लुभाने की रणनीति का हिस्सा लगता है।

पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी बड़े ऐलान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी ने त्रिस्तरीय पंचायत और ग्राम कचहरी प्रतिनिधियों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि इन प्रतिनिधियों को सम्मानजनक पेंशन दी जाएगी, उनका मानदेय दोगुना किया जाएगा और 50 लाख रुपये तक का बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा, PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के डीलरों के मार्जिन में भी बढ़ोतरी का वादा किया गया। तेजस्वी ने मौजूदा NDA सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “20 साल से खटारा सरकार चल रही है, जहां अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है। बिहार की जनता बदलाव चाहती है, और हम विकास, सामाजिक न्याय और रोजगार के एजेंडे पर लड़ेंगे।”

सियासी समीकरण में बदलाव की उम्मीद

विश्लेषकों का मानना है कि यह वादा OBC और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) वोटरों को आकर्षित करेगा, जो बिहार की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा हैं। यादव-मुस्लिम गठजोड़ के बाद अब पारंपरिक कारीगर वर्गों पर फोकस से महागठबंधन की सीटें मजबूत हो सकती हैं। हालांकि, NDA ने इसे ‘जुमला’ करार दिया है। बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने पलटवार किया, “राजद का पुराना मॉडल है – जमीन दो और नौकरी लो। इनके पास कोई रोडमैप नहीं है।” तेजस्वी ने ‘माई-बहिन मान योजना’ और ‘हर घर नौकरी’ जैसे पुराने वादों को दोहराते हुए कहा कि पहले 20 दिनों में ही कई कानून बनाए जाएंगे।

चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को होंगे, नतीजे 14 नवंबर को। इन घोषणाओं से बिहार का सियासी समीकरण तेजी से बदल रहा है, जहां विकास और जातिगत समीकरण दोनों अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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