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अमेरिका चीन को देगा टैरिफ से राहत, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दिया संकेत

वाशिंगटन और बीजिंग के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम उठा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रविवार को कई मीडिया इंटरव्यू में खुलासा किया कि अमेरिका और चीन ने एक ‘बहुत मजबूत फ्रेमवर्क’ पर सहमति बना ली है, जो चीनी सामानों पर 100% टैरिफ लगाने से बचाव करेगा। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन, कृषि उत्पादों की खरीद और अन्य मुद्दों पर आगे की चर्चा का द्वार खोलेगा। बेसेंट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने 100% टैरिफ की धमकी देकर हमें मजबूत बातचीत की शक्ति दी, और हमने एक ऐसा फ्रेमवर्क हासिल किया जो न केवल टैरिफ से बचाएगा, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी प्रगति करेगा।”

यह घोषणा मलेशिया में दो दिनों की गहन बातचीत के बाद आई, जहां बेसेंट ने चीनी अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिनिधि ली चेंगंग के साथ चर्चा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अगले सप्ताह दक्षिण कोरिया में होने वाली मुलाकात से पहले यह फ्रेमवर्क अंतिम रूप ले सकता है।

टैरिफ से राहत और अन्य लाभ

बेसेंट ने एनबीसी न्यूज के ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम में विस्तार से बताया कि यह समझौता निम्नलिखित मुद्दों पर फोकस करेगा:

टैरिफ में कमी: अमेरिका चीनी आयात पर 100% टैरिफ लगाने की योजना (जो नवंबर 1 से लागू होनी थी) को स्थगित कर देगा। इसके बदले, मई में हुए 90-दिवसीय ट्रूस को बढ़ाया जा सकता है, जो 10 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

रेयर अर्थ एक्सपोर्ट कंट्रोल पर विराम: चीन दुर्लभ मिट्टी (रेर अर्थ) के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को स्थगित करेगा, जो उच्च तकनीकी उत्पादों के लिए आवश्यक हैं। बेसेंट ने कहा, “मैं उम्मीद करता हूं कि चीन इन नियंत्रणों पर कोई कदम नहीं उठाएगा।”

फेंटेनिल संकट पर सहयोग: अमेरिका के ओपिऑयड संकट को कम करने के लिए चीन फेंटेनिल के पूर्ववर्ती रसायनों के निर्यात पर रोक लगाने में मदद करेगा। ट्रंप ने इसे टैरिफ की एक मुख्य वजह बताया था।

कृषि उत्पादों की खरीद: चीन अमेरिकी सोयाबीन और अन्य कृषि वस्तुओं की ‘उत्पादक’ मात्रा में खरीद बढ़ाएगा, जो अमेरिकी किसानों के लिए राहत बनेगी।

यह फ्रेमवर्क व्यापार युद्ध के ‘अस्थिर’ दौर को समाप्त करने की दिशा में एक कदम है, जहां अमेरिका ने 145% तक टैरिफ लगाए थे और चीन ने 125% के जवाबी कदम उठाए थे। हालांकि, बेसेंट ने स्पष्ट किया कि व्यापक 10% टैरिफ बरकरार रहेंगे, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जरूरी हैं।

वैश्विक बाजारों पर असर

यह खबर वैश्विक बाजारों के लिए राहत की सांस है। ट्रंप के एशिया दौरे के दौरान व्यापार तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच यह फ्रेमवर्क स्टॉक मार्केट्स में तेजी ला सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे अमेरिका-चीन के बीच ‘रणनीतिक अलगाव’ की प्रक्रिया में प्रगति होगी, लेकिन पूरी तरह से टैरिफ हटाना अभी दूर की कौड़ी है। ट्रंप ने खुद कहा, “चीन डील करना चाहता है, और हम भी चाहते हैं।” यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह 2018 से चले ट्रेड वॉर का पहला बड़ा मोड़ साबित होगा।
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