Bihar MLC Result: बिहार विधान परिषद की आठ सीटों (चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्र) के लिए 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद 27 अक्टूबर से शुरू हुई मतगणना में शिक्षक सीटों के नतीजे आ चुके हैं, जबकि स्नातक सीटों पर गिनती जारी है या बढ़त कायम है। चार शिक्षक सीटों में भाजपा, राजद, जनसुराज और निर्दलीय को एक-एक सीट मिली है। पटना स्नातक सीट पर जदयू के नीरज कुमार की बढ़त बनी हुई है, जिसके समर्थन में मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जनसुराज के अनुज सिंह का विरोध किया था और पार्टी से निष्कासित भी हुए थे। अनंत सिंह ने गिनती पूरी होने पर हार स्वीकार कर ली।
बिहार MLC चुनाव 2026 में अब तक कितनी सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं?
आठ में से चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के आधिकारिक नतीजे आ चुके हैं। तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के नरेंद्र प्रसाद सिंह (एनपी सिंह) ने निर्दलीय भूषण झा को 594 मतों से हराया। उन्हें 2,945 मत मिले, जबकि भूषण झा को 2,351 और सीपीआई के संजय सिंह को 1,967 मत प्राप्त हुए। सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय डॉ. राहुल राज (भाजपा के पूर्व समर्थक) ने जदयू के आनंद पुष्कर को लगभग 1,800 मतों के अंतर से पराजित किया। दरभंगा शिक्षक सीट पर जनसुराज के सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के मौजूदा एमएलसी मदन मोहन झा को 324 मतों से हराया। पटना शिक्षक सीट पर राजद के डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा के नवल किशोर यादव को 1,057 मतों से हराया। संजीव कुमार को 4,487 और नवल किशोर को 3,430 मत मिले। ये नतीजे शिक्षकों के बीच राजनीतिक पसंद की विविधता दिखाते हैं।
पटना स्नातक सीट पर अनंत सिंह का क्या बयान आया?
मोकामा विधायक अनंत सिंह, जिन्हें जदयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था, ने पटना स्नातक सीट के परिणाम पर कहा कि गिनती पूरी हो चुकी है और जनसुराज के अनुज सिंह हार गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जदयू के नीरज कुमार जीत गए और वे हार गए। अनंत सिंह ने कहा, “इसमें चर्चा करने के लिए क्या है? क्या हमने किसी दुकान से वोट खरीदे थे? क्या हमने उन्हें तौलकर खरीदा था?” उन्होंने जोर दिया कि जनता सर्वोपरि है और ईश्वर उनके साथ हैं। जिन्हें जनता के वोट मिले, वे जीते और जिन्हें नहीं मिले, वे हार गए। उन्होंने यह भी कहा कि वे कभी पार्टी से नाराज नहीं रहे। यह बयान उनके राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में वर्तमान स्थिति क्या है?
पटना स्नातक सीट पर जदयू के नीरज कुमार ने प्रथम वरीयता के मतों में बढ़त बनाई। सातवें राउंड के बाद उन्हें लगभग 16,193 मत मिले, जबकि राजद के दिलीप पटेल को 13,914 और जनसुराज के अनुज सिंह को 10,921 मत प्राप्त हुए। नीरज कुमार ने कहा कि धनबल और बाहुबल के सामने उनके कार्यकर्ता नहीं झुके और द्वितीय वरीयता में भी वे आगे रहेंगे। कई रिपोर्टों के अनुसार नीरज कुमार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। अनंत सिंह का समर्थन पाने वाले अनुज सिंह तीसरे स्थान पर रहे। यह सीट जदयू के अंदरूनी टकराव के कारण सबसे चर्चित रही।
अन्य स्नातक सीटों पर किसकी बढ़त है?
कोसी स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. एन.के. यादव लगातार आगे चल रहे हैं। 11 राउंड के बाद उन्हें 24,000 से अधिक मत मिले, जबकि राजद के नितेश यादव को लगभग 18,500 और जनसुराज के रजनीश रंजन को 15,000 से ज्यादा मत प्राप्त हुए। दरभंगा स्नातक में भाजपा समर्थित सर्वेश कुमार ने राजद के अनिल कुमार झा पर बढ़त बना रखी है (कुछ राउंड में 1,300-1,400 मतों की बढ़त)। तिरहुत स्नातक में निर्दलीय वंशीधर ब्रजवासी जदयू के अभिषेक झा से 1,800 मतों से अधिक आगे चल रहे हैं। इन सीटों पर मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए अंतिम परिणाम का इंतजार है।
शिक्षक सीटों पर राजनीतिक समीकरण क्यों बदले?
पटना शिक्षक सीट पर राजद की जीत ने भाजपा का करीब तीन दशक पुराना प्रभाव कमजोर किया। डॉ. संजीव कुमार की जीत के बाद उनकी पत्नी और समर्थकों ने शिक्षकों के हितों की लड़ाई जारी रखने की बात कही। भाजपा नेता और मंत्री रामकृपाल यादव ने नवल किशोर यादव की हार पर अफसोस जताया और कहा कि उन्होंने शिक्षकों के लिए बहुत काम किया था, लेकिन जनता के फैसले को मानना होगा। दरभंगा में जनसुराज की जीत प्रशांत किशोर की पार्टी के लिए पहली सफलता मानी जा रही है। सारण में निर्दलीय राहुल राज की जीत भाजपा के बागी उम्मीदवार की ताकत दिखाती है।
अनंत सिंह को जदयू से क्यों निकाला गया और इसका प्रभाव क्या पड़ा?
अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ जनसुराज के अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस पर जदयू ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया और विधायिकी संबंधी कार्रवाई की बात भी कही। अनंत सिंह का दावा था कि परिणाम उनके अनुसार होगा, लेकिन नतीजों ने उनके प्रभाव को सीमित कर दिया। नीरज कुमार ने जीत का श्रेय नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी और एनडीए के अन्य नेताओं को दिया। यह घटनाक्रम जदयू के अंदरूनी अनुशासन और बाहुबली प्रभाव के बीच टकराव को उजागर करता है।
इन नतीजों का बिहार राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
शिक्षक सीटों में चार अलग-अलग परिणाम एनडीए, विपक्ष और नई पार्टियों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाते हैं। स्नातक सीटों पर एनडीए की बढ़त कायम है, खासकर पटना और कोसी में। जनसुराज को एक शिक्षक सीट मिलने से प्रशांत किशोर की उपस्थिति मजबूत हुई है। अनंत सिंह की हार उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा पर असर डाल सकती है, जबकि नीरज कुमार की संभावित जीत जदयू के लिए राहत की खबर है। मतगणना पूरी होने के बाद पूर्ण तस्वीर साफ होगी, लेकिन फिलहाल नतीजे मिश्रित हैं और किसी एक गठबंधन का पूर्ण प्रभुत्व नहीं दिखाते।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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