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Bihar Vidhansabha Chunav: प्रशांत किशोर क्या बिहार में करेंगे केजरीवाल जैसा सियासी भूचाल? जातिगत समीकरण समझें

Bihar Vidhansabha Chunav:  बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर अपनी नई पार्टी जन सुराज के साथ बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर करने की तैयारी में हैं। उनकी रणनीति दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह एक नया विकल्प देने की है। क्या वे बिहार में वैसा ही सियासी भूचाल ला पाएंगे, जैसा केजरीवाल ने दिल्ली में किया था? आइए, बिहार के जातिगत समीकरण और प्रशांत की रणनीति को आसान शब्दों में समझते हैं।

प्रशांत किशोर का दावा, एनडीए की वापसी मुश्किल

प्रशांत किशोर ने हाल ही में दावा किया कि बिहार में एनडीए सरकार 2025 में सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की जेडीयू 25 सीटें भी नहीं जीत पाएगी, और अगर ऐसा हुआ तो वे राजनीति छोड़ देंगे। उनकी रणनीति में ओबीसी, दलित, और मुस्लिम वोटरों को एकजुट करना शामिल है। वे कहते हैं कि बिहार में 60% वोटर ऐसे हैं जो बीजेपी के साथ नहीं हैं। इनमें मुस्लिम, यादव, और गैर-बीजेपी हिंदू शामिल हैं।

जातिगत समीकरण: बिहार की सियासत का आधार

बिहार की राजनीति में जाति का गणित अहम भूमिका निभाता है। प्रशांत किशोर इस गणित को समझते हुए गांधी, अंबेडकर, और लोहिया के विचारों को मानने वाले वोटरों को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी रणनीति में मुस्लिम और गैर-बीजेपी हिंदुओं को साथ लाकर एक नया वोट बैंक बनाना है। बिहार में यादव, मुस्लिम, और दलित वोटरों की संख्या काफी है, और ये समुदाय मिलकर किसी भी पार्टी को सत्ता तक पहुंचा सकते हैं।

जन सुराज की रैलियों में उमड़ रही भीड़

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की रैलियों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। बेगूसराय के बखरी में उनकी सभा में इतने लोग आए कि मैदान छोटा पड़ गया। यह दिखाता है कि उनकी बात लोगों पहुंच रही है।

जन सुराज की लोकप्रियता और भविष्य

बिहार के लोग प्रशांत किशोर को सुनने के लिए उत्साहित हैं। उनकी रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है, जो उनकी बढ़ती लोकप्रियता का सबूत है। बेगूसराय की एक रैली में मैदान छोटा पड़ गया, जिससे साफ है कि जनता में उनके प्रति उत्साह है।

क्या होगा बिहार में सियासी उलटफेर?

प्रशांत किशोर की रणनीति और जन समर्थन को देखते हुए सवाल उठता है कि क्या वे बिहार में केजरीवाल जैसा चमत्कार कर पाएंगे? उनकी रणनीति जातिगत समीकरणों पर आधारित है, लेकिन बीजेपी और जेडीयू-आरजेडी गठबंधन जैसे मजबूत खिलाड़ियों को चुनौती देना आसान नहीं होगा। फिर भी, उनकी नई सोच और युवा वोटरों में बढ़ता समर्थन 2025 के चुनाव को रोमांचक बना सकता है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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