BJP Nasha Mukt Yatra: पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। शुक्रवार से पंजाब BJP अपनी 13 दिवसीय नशा मुक्त यात्रा की शुरुआत करने जा रही है, जिसमें 100 से अधिक वाहनों का काफिला शामिल होगा। यह यात्रा राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर करते हुए करीब चार हजार किलोमीटर का सफर तय करेगी।
पार्टी इस अभियान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े जनांदोलन के रूप में स्थापित करना चाहती है। यात्रा की शुरुआत से एक दिन पहले चंडीगढ़ में आयोजित एक भावुक कार्यक्रम में नशे की लत और नशे से जान गंवाने वाले पीड़ितों के 50 से अधिक परिवारों ने अपनी पीड़ा साझा की। परिवारों का कहना था कि उन्हें सरकारी मुफ्त योजनाओं की नहीं, बल्कि नशे से पूरी तरह मुक्ति की जरूरत है। इस पूरे आयोजन ने पंजाब की सियासत में नशे के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।
चार अलग-अलग रूटों से शुरू होगी यात्रा
पंजाब BJP की नशा मुक्त यात्रा एक साथ चार अलग-अलग स्थानों से शुरू होगी, जिनमें पठानकोट, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो शामिल हैं। ये चारों यात्राएं मिलकर पूरे राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होकर गुजरेंगी और अंत में 30 सितंबर को जालंधर में एक साथ संपन्न होंगी। पार्टी की योजना के मुताबिक इस यात्रा का मकसद न केवल जन-जागरूकता फैलाना है, बल्कि नशे के मुद्दे को आगामी चुनावी अभियान का केंद्रीय विषय बनाना भी है।
किसके हाथों होगी हरी झंडी

पहली यात्रा को शुक्रवार, 18 सितंबर को पठानकोट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा रवाना किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 19 सितंबर को फतेहगढ़ साहिब से दूसरी यात्रा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हाथों शुरू होगी। तीसरी यात्रा 20 सितंबर को फाजिल्का से केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल हरी झंडी दिखाएंगे, जबकि चौथी और आखिरी यात्रा 21 सितंबर को बठिंडा के तलवंडी साबो से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू की जाएगी। पार्टी प्रवक्ता के अनुसार मुख्य नेता रथ में सवार रहेंगे और स्थानीय जिलों के वाहन उनके पीछे-पीछे चलेंगे।
चंडीगढ़ में परिवारों ने साझा किया अपना दर्द
यात्रा की शुरुआत से पहले गुरुवार को चंडीगढ़ में ‘मावां मांगदियां जवाब’ नामक एक भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें पंजाब के विभिन्न हिस्सों से आए 50 से ज्यादा परिवारों ने नशे की लत और नशे से हुई मौतों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में मौजूद परिवारों ने राज्य में नशे की समस्या से निपटने में प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित लापरवाही का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया।
पीड़ित मां ने बयां की अपनी पीड़ा
अबोहर की रहने वाली एक मां, जिनके बेटे की नशे की लत के कारण मौत हो गई थी, ने कार्यक्रम में अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उनका परिवार अपना गुजर-बसर करने के लिए कड़ी मेहनत करता है, लेकिन उन्हें सरकार से मुफ्त की सुविधाएं नहीं चाहिए। उनकी सिर्फ एक ही मांग थी कि हमें चिट्टे से आजादी चाहिए। इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद तमाम लोगों को भावुक कर दिया और नशे की गंभीरता को एक बार फिर उजागर कर दिया।
पंजाब BJP अध्यक्ष ने बताया जन आंदोलन
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने इस मौके पर कहा कि पार्टी नशे के मुद्दे को एक व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप देने जा रही है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के दर्द को असहनीय बताते हुए कहा कि आज पंजाब के लगभग हर घर तक इसका असर पहुंच चुका है। उनका यह बयान पार्टी की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत नशा मुक्ति को आगामी विधानसभा चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी की जा रही है।
सुनील जाखड़ ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
पंजाब BJP के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने इस अवसर पर राज्य की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की जेलें अब नशा तस्करों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर गैंगस्टरों को पार्टी में शामिल करने का भी आरोप लगाया और इसके समर्थन में एक स्थानीय नेता के आम आदमी पार्टी में शामिल होने का हवाला दिया, जिन्हें उन्होंने गैंगस्टर से नेता बने व्यक्ति के तौर पर संबोधित किया।
BJP Nasha Mukt Yatra: जालंधर में होगी भव्य समापन रैली
चारों यात्राओं का समापन 30 सितंबर को जालंधर में एक भव्य रैली के रूप में होगा, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संबोधित करने की उम्मीद जताई जा रही है। यह समापन कार्यक्रम पार्टी के इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी कड़ी माना जा रहा है, जहां नशा मुक्ति के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की जाएगी।
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नशे के खिलाफ शुरू की गई यह यात्रा भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। पीड़ित परिवारों की आपबीती ने इस मुद्दे को भावनात्मक रूप से भी मजबूत बना दिया है, जिससे पार्टी को जनता के बीच गहरी पैठ बनाने में मदद मिल सकती है। चार अलग-अलग रूटों से शुरू होकर 4000 किलोमीटर की यह यात्रा राज्य के हर कोने तक पहुंचने का दावा कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नशा मुक्ति के इस अभियान का असर पंजाब की जमीनी राजनीति और आगामी चुनावी नतीजों पर किस हद तक पड़ता है।
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Sanjana Gupta
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