TMC symbol dispute 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। चुनाव आयोग ने गुरुवार को टीएमसी के चुनावी सिंबल को फ्रीज करने का फैसला सुनाया, जिसके बाद विपक्षी खेमे में हलचल मच गई। दिलचस्प बात यह है कि तीन दिन पहले तक ममता बनर्जी को मदद देने से इनकार करने वाली कांग्रेस अब खुलकर उनके समर्थन में उतर आई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी बताते हुए भाजपा और चुनाव आयोग दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अकेले ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर उस दल और मतदाता की है जो निष्पक्ष चुनाव चाहता है। वहीं आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने भी इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने इंडिया गठबंधन के भीतर एकजुटता का नया संकेत भी दे दिया है।
चुनाव आयोग का फैसला बना विवाद की जड़
पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों की घोषणा के बाद तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम और सिंबल पर दावेदारी की लड़ाई तेज हो गई थी। ममता बनर्जी गुट और पार्टी से अलग हुए विधायक ऋतब्रत बनर्जी के गुट, दोनों ने ही जोड़ा फूल और घास वाले चुनाव चिह्न पर अपना हक जताया था। इस पर चुनाव आयोग ने गुरुवार रात अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता, तब तक दोनों गुटों में से किसी को भी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम या पार्टी के मौजूदा सिंबल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। आयोग ने दोनों पक्षों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक तीन नए नाम और सिंबल के विकल्प सौंपने का निर्देश भी दिया।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला
चुनाव आयोग के इस फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक तीखी पोस्ट लिखी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर विपक्षी दलों को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राहुल गांधी ने शिवसेना और एनसीपी का हवाला देते हुए कहा कि यह वही पुराना पैटर्न दोहराया जा रहा है, जहां पहले पार्टी को तोड़ा जाता है और फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है। उन्होंने चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि आयोग को जनादेश की रक्षा करनी चाहिए, न कि उन ताकतों की मदद जो जनता के फैसले को पलटने का काम करती हैं।
ममता बनर्जी की लड़ाई को बताया साझा लड़ाई
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि यह विवाद केवल ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि हर उस राजनीतिक दल और मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में विश्वास रखता है। उनके इस बयान को कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच बढ़ती नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर तब जब हाल ही में दोनों दलों के रिश्तों में खटास की खबरें सामने आई थीं।
तीन दिन पहले तक मदद से इनकार करने वाली कांग्रेस अब समर्थन में
रिपोर्ट्स के अनुसार, नंदीग्राम उपचुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने कांग्रेस से गठबंधन या समर्थन के लिए संपर्क किया था, लेकिन कांग्रेस ने उस समय उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। ऐसे में चुनाव आयोग के ताजा फैसले के बाद कांग्रेस का खुलकर ममता बनर्जी के पक्ष में आना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी एकता को मजबूत दिखाने की कोशिश के तहत कांग्रेस ने यह रुख अपनाया है।
अरविंद केजरीवाल ने भी कसा तंज
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी चुनाव आयोग के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देने में देरी नहीं की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके से जोड़ा और तंजिया अंदाज में सवाल उठाया कि क्या इस तरह के फैसलों के सहारे ही चुनाव जीतने की योजना बनाई जा रही है। केजरीवाल की यह टिप्पणी विपक्षी दलों की उस साझा रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
इंडिया गठबंधन में दिखी एकजुटता
चुनाव आयोग के इस फैसले ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच पहले से चली आ रही तल्खी को कुछ हद तक कम करता दिखाया है। राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल, दोनों ही विपक्षी नेताओं का एक सुर में चुनाव आयोग पर सवाल उठाना इस बात का संकेत है कि विपक्षी खेमा इस मुद्दे को आगामी उपचुनावों में एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में है। हालांकि भाजपा या चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे की राह पर टिकी निगाहें
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों टीएमसी गुट शुक्रवार सुबह 11 बजे तक चुनाव आयोग को कौन से नए नाम और सिंबल सौंपते हैं। इसके साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच यह नई नजदीकी आगामी चुनावी गठबंधनों की दिशा में कोई ठोस रूप लेती है या नहीं। पश्चिम बंगाल की सियासत में यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
टीएमसी सिंबल विवाद ने बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी दलों के बीच बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल का चुनाव आयोग पर हमला और कांग्रेस का ममता बनर्जी के पक्ष में खड़ा होना, दोनों ही घटनाक्रम आगामी उपचुनावों से पहले सियासी समीकरणों को नया आकार दे सकते हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आयोग का अंतिम फैसला किस दिशा में जाता है और इसका असर बंगाल की चुनावी राजनीति पर किस तरह पड़ता है।
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Sanjana Gupta
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