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ब्रिटेन ने खालिस्तानी आतंकियों की कमर तोड़ी

Khalistani Terrorists: ब्रिटेन ने खालिस्तान से जुड़े आतंकवाद पर बड़ा प्रहार किया है। 4 दिसंबर को ब्रिटिश सरकार ने गुरप्रीत सिंह रेहल नाम के शख्स और बब्बर अकाली लहर संगठन पर सख्त सैंक्शन लगा दिए। ये कदम भारत की मांग पर उठाया गया है, ताकि आतंक की फंडिंग रुके। पहली बार ब्रिटेन ने अपने घरेलू कानूनों का इस्तेमाल ऐसे ग्रुप्स को रोकने के लिए किया है।

गुरप्रीत और बब्बर खालसा पर क्यों निशाना?

गुरप्रीत सिंह रेहल पर आरोप है कि वो बब्बर खालसा इंटरनेशनल और उसके साथी संगठन बब्बर अकाली लहर के लिए काम करता है। ये ग्रुप खालिस्तान के नाम पर हिंसा फैलाता है। रेहल ने इन संगठनों का प्रचार किया, नए सदस्य भर्ती किए, पैसे का इंतजाम किया, हथियार खरीदने में मदद की। बब्बर खालसा 1980 के दशक से भारत में बम धमाके, हथियार तस्करी और हत्याओं के लिए कुख्यात है। ब्रिटेन में ये लोग लंदन जैसे शहरों से फंडिंग और प्रचार चलाते हैं। इसके अलावा सेविंग पंजाब, वाइटहॉक कंसल्टेंसी और लोहा डिजाइन्स जैसी कंपनियों पर भी बैन लगा।

क्या होगा असर? फंडिंग रुकेगी, सजा होगी सख्त

सैंक्शन से रेहल और इन संगठनों की ब्रिटेन वाली सारी संपत्ति फ्रीज हो गई। कोई ब्रिटिश नागरिक या कंपनी इनके साथ डील नहीं कर सकती, बिना सरकारी इजाजत के। रेहल अब किसी कंपनी का डायरेक्टर भी नहीं बन सकता। अगर कोई नियम तोड़े तो 7 साल जेल या 10 लाख पाउंड जुर्माना हो सकता है। ब्रिटेन की आर्थिक सचिव लूसी रिग्बी ने कहा कि हम आतंक की फंडिंग को बर्दाश्त नहीं करेंगे और शांतिपूर्ण लोगों का साथ देंगे। ये कदम भारत-ब्रिटेन के बीच आतंक विरोधी रिश्तों को मजबूत बनाएगा। खालिस्तानी चरमपंथियों के वैश्विक नेटवर्क पर ब्रेक लगेगा, जिससे भारत की सुरक्षा को राहत मिलेगी। अब देखना ये है कि ये कार्रवाई कितनी दूर तक असर दिखाएगी।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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