Cancer Medicine Price 2026: देश में कैंसर मरीजों और उनके परिवारों के लिए राहत की खबर है। सरकार कुछ महंगी कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित करने की तैयारी कर रही है। इस कदम से चुनिंदा दवाओं की खुदरा कीमत यानी MRP में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे मरीजों के इलाज पर होने वाला जेब से खर्च काफी घट सकता है।
डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ऐसी दवाओं की पहचान कर रही है, जिनकी कीमत बहुत ज्यादा है और जिनका इलाज में नियमित इस्तेमाल होता है। प्रस्तावित व्यवस्था में इन दवाओं पर डिस्ट्रीब्यूटर की लागत के ऊपर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक रखा जाएगा। सूत्रों के अनुसार यह व्यवस्था करीब 10 दिनों के भीतर लागू हो सकती है। हालांकि अंतिम असर दवाओं की सूची और कंपनियों की नई कीमतों पर निर्भर करेगा।
Cancer Medicine Price 2026: किन दवाओं पर रहेगा फोकस
सरकार का ध्यान खासतौर पर उन दवाओं पर है, जिनकी कीमत पहले से बहुत ज्यादा है। इनमें कुछ पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हो सकती हैं। महंगी दवाओं में ट्रेड मार्जिन अधिक होने के कारण मरीजों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने ऐसा कदम उठाया है। वर्ष 2019 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत 42 कैंसर दवाओं का ट्रेड मार्जिन सीमित किया गया था। अब सरकार उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए सबसे महंगी दवाओं को दायरे में लाना चाहती है। उपलब्ध जानकारी में दवाओं के नाम सामने नहीं आए हैं।
MRP में 70 प्रतिशत तक कमी का अनुमान
अधिकारियों के मुताबिक, कुछ दवाओं की मौजूदा कीमतों और ट्रेड मार्जिन को देखते हुए MRP में 70 प्रतिशत तक की कमी संभव है। यह आंकड़ा अनुमान है और सभी दवाओं पर लागू नहीं होगा।
असली फायदा इस बात पर टिका है कि अंतिम सूची में कौन-सी दवाएं आती हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि मार्जिन में की गई कटौती कितनी मात्रा में मरीजों तक कम कीमत के रूप में पहुंचती है। इसलिए हर दवा पर कटौती समान होगी, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।
DGHS की अध्यक्षता वाली कमेटी तैयार कर रही सूची
नई व्यवस्था में कौन-सी दवाएं शामिल होंगी, इसकी सूची स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली कमेटी बना रही है। सूत्रों के अनुसार सूची के लिए कुछ प्रमुख मानदंड तय किए गए हैं।
इनमें भारत में कैंसर के इलाज के लिए दवा की मंजूरी, नियमित इस्तेमाल और सबसे अहम, दवा की अधिक कीमत शामिल है। कमेटी की सूची कब सार्वजनिक होगी, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
सस्ती दवाओं पर क्यों नहीं लगेगा कैप
सरकार फिलहाल सभी कैंसर दवाओं पर 30 प्रतिशत मार्जिन कैप लगाने के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि कम कीमत वाली दवाओं पर भी मार्जिन सीमित करने से कंपनियों के लिए मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का खर्च निकालना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में कंपनियां कुछ सस्ती दवाएं बाजार में उपलब्ध कराने में रुचि कम कर सकती हैं, जिसका असर उनकी उपलब्धता पर पड़ेगा। इसलिए सरकार ऐसी दवाओं को चुनना चाहती है, जहां कीमत घटने से मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा हो और सप्लाई भी प्रभावित न हो।
लंबे इलाज वाले मरीजों को फायदा
कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है और कई मरीजों को महंगी दवाओं की लगातार जरूरत पड़ती है। ऐसे में किसी दवा की कीमत में बड़ी कटौती से परिवार के कुल इलाज खर्च में भारी कमी आ सकती है।
अगर योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह महंगी कैंसर थेरेपी की कीमतों के मामले में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। हालांकि अभी यह प्रस्ताव तैयारी के चरण में है और अंतिम फैसले का इंतजार है।
Cancer Medicine Price 2026: अभी क्या स्पष्ट नहीं है
दवाओं की अंतिम सूची, नई कीमतें और व्यवस्था लागू होने की आधिकारिक तारीख अभी सामने नहीं आई है। यह भी साफ नहीं है कि दवा कंपनियों या दवा विक्रेताओं की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आई है।
मरीज और उनके परिजन आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और दवा खरीदते समय कीमत की जानकारी अपने डॉक्टर या दवा विक्रेता से जरूर लें। किसी अपुष्ट सूचना के आधार पर इलाज में बदलाव न करें।
सरकार महंगी कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित करने की तैयारी में है, जिससे चुनिंदा दवाओं की MRP 70 प्रतिशत तक घट सकती है। सूची DGHS के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली कमेटी बना रही है और व्यवस्था करीब 10 दिनों में लागू हो सकती है। सभी कैंसर दवाओं पर कैप लगाने का इरादा नहीं है, ताकि सस्ती दवाओं की उपलब्धता प्रभावित न हो। असली फायदा अंतिम सूची और नई कीमतों पर निर्भर करेगा, जिसकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
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Sanjana Gupta
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