Jharkhand News: कभी दिहाड़ी मजदूरी करते थे, आज 'Wow Idli' के मालिक हैं धनबाद के किशन, रोज कमा रहे हजारों
दिहाड़ी मजदूर से बना 'Wow Idli' मालिक किशन तांती, मेहनत से बदली जिंदगी।

Jharkhand News: झारखंड के धनबाद शहर की गलियों में एक ऐसी प्रेरणा की कहानी पनप रही है, जो हर उस युवा को हिम्मत देती है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाता। यह कहानी है किशन तांती की, एक ऐसे युवक की जिसने दिहाड़ी मजदूरी के कठिन जीवन से निकलकर खुद का स्टार्टअप ‘वाओ इडली’ शुरू किया और आज वह आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश कर रहा है। यह सकारात्मक खबर उन तमाम लोगों के लिए है जो मेहनत और लगन से अपनी तकदीर बदलना चाहते हैं।
Jharkhand News: संघर्षों से भरा था अतीत
किशन तांती का जीवन हमेशा से ऐसा नहीं था। एक समय था जब वह और उनका परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था। परिवार का पेट पालने के लिए किशन को दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती थी, जिसमें दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद भी इतनी कमाई नहीं हो पाती थी कि घर का खर्च आसानी से चल सके। उन्होंने कई वर्षों तक यह कठिन जीवन जिया, लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ अपना करने की इच्छा थी। वह इस गरीबी के चक्र से बाहर निकलना चाहते थे और अपने परिवार को एक बेहतर जीवन देना चाहते थे।
एक विचार ने बदली जिंदगी
कड़ी मेहनत के बावजूद जब हालात नहीं सुधरे, तो किशन ने कुछ अलग करने का फैसला किया। उन्होंने देखा कि धनबाद में सुबह के नाश्ते के लिए लोगों के पास सीमित विकल्प हैं। उन्हें लगा कि अगर वह लोगों को कुछ स्वस्थ और स्वादिष्ट नाश्ता उपलब्ध कराएं तो यह एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने इडली का काम शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत में उनके पास बहुत कम पूंजी थी, लेकिन उनका हौसला बुलंद था। उन्होंने एक छोटे से ठेले से ‘वाओ इडली’ की शुरुआत की।
स्वाद और स्वच्छता बनी पहचान
किशन ने अपने काम में गुणवत्ता और स्वच्छता को सबसे ऊपर रखा। वह ताजी सामग्री का उपयोग करते और उनकी बनाई इडली, सांभर और चटनी का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ गया। धीरे-धीरे उनके ठेले पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी। सुबह-सुबह दफ्तर जाने वाले लोगों से लेकर छात्र-छात्राओं तक, हर कोई उनके ‘वाओ इडली’ का दीवाना हो गया। उनकी सफलता का राज सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि उनका व्यवहार और ग्राहकों के प्रति समर्पण भी है।
Jharkhand News: आज हजारों में है कमाई
जो किशन कभी दिन के कुछ सौ रुपये के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते थे, आज वह अपने इस छोटे से स्टार्टअप से प्रतिदिन हजारों रुपये कमा रहे हैं। उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि अपने साथ कुछ और लोगों को भी रोजगार देने का सपना देख रहे हैं। किशन की यह कहानी स्थानीय मीडिया में एक महत्वपूर्ण खबर बन गई है, जो दिखाती है कि कैसे एक छोटा सा आइडिया और कड़ी मेहनत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
किशन तांती की कहानी धनबाद और पूरे राज्य के युवाओं के लिए एक जीती-जागती प्रेरणा है। वह इस बात का सबूत हैं कि व्यवसाय शुरू करने के लिए बड़ी डिग्री या भारी पूंजी की नहीं, बल्कि एक अच्छे विचार, अटूट लगन और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। किशन भविष्य में अपने इस ‘वाओ इडली’ ब्रांड को और बड़ा बनाना चाहते हैं। यह खबर साबित करती है कि अगर इरादे नेक और हौसले बुलंद हों, तो कोई भी मुश्किल आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।