CG News: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अलंकरण समारोह में कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल संविधान विरोधियों तथा माओवादियों के समर्थक रहे हैं।
शाह ने कहा कि संविधान हाथ में लेकर घूमने से कुछ नहीं होता, आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी को संसद में बहस की खुली चुनौती दी और माओवाद के मुद्दे पर विपक्ष के रुख की आलोचना की।
अमित शाह ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्षी दल लंबे समय से संविधान विरोधियों और माओवादियों का समर्थन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में माओवाद का समर्थन करते रहे हैं। शाह के अनुसार गैर-संवैधानिक सरकारों का समर्थन करने वालों ने नकली संसद बनाकर संसद का मजाक उड़ाया। उन्होंने विपक्ष पर संविधान की दुहाई देने के बावजूद उसके विपरीत आचरण करने का आरोप लगाया।
माओवाद को लेकर शाह ने क्या कहा?
अमित शाह ने 2010 में तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम के उस बयान का जिक्र किया जिसमें माओवादियों से हथियार डालने के बजाय बातचीत करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने माओवादियों से हथियार डालकर आत्मसमर्पण करने को कहा और उन्हें मुख्यधारा में लाने का भरोसा दिया। शाह ने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने माओवाद के खिलाफ सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है, जबकि पहले की नीतियों में नरमी दिखाई गई थी।
संविधान और आचरण पर क्या टिप्पणी की?
गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि संविधान को सिर्फ हाथ में लेकर घूमने से कुछ हासिल नहीं होता। आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे संविधान की बात तो करते हैं, लेकिन उनके कार्य संविधान की भावना के विपरीत होते हैं। शाह ने SIR से जुड़े मुद्दे पर भी राहुल गांधी को संसद में खुली बहस की चुनौती दी और कहा कि तथ्य के साथ बहस होनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में दिए गए बयान का क्या महत्व?
नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अलंकरण समारोह में अमित शाह का यह बयान राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित रहे क्षेत्रों को देखते हुए गृह मंत्री का माओवाद विरोधी रुख दोहराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने राज्य की सुरक्षा और विकास उपलब्धियों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर हमला बोला।
विपक्ष पर हमले का राजनीतिक संदेश क्या है?
अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा संविधान, माओवाद और संसदीय आचरण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। राहुल गांधी को खुली चुनौती देकर शाह ने बहस का मंच संसद को बनाया है। कांग्रेस की ओर से अभी इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया आना बाकी है। राजनीतिक दलों के बीच संविधान और सुरक्षा के मुद्दे पर यह आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में जारी रह सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नवा रायपुर वाले बयान ने एक बार फिर संविधान, माओवाद और राजनीतिक आचरण के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ संविधान की बात करना काफी नहीं, आचरण भी वैसा होना चाहिए। राहुल गांधी को संसद में बहस की चुनौती देकर शाह ने विपक्ष को जवाब देने का मौका दिया है। आगे दोनों पक्षों के रुख से इस मुद्दे की दिशा तय होगी।
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