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CG News: रायपुर में 53 वर्षीय महिला ने तालाब में कूदकर बचाई 2 किशोरों की जान, कैसे दिखाई बहादुरी?

CG News: रायपुर में दुर्गा विसर्जन के दौरान तालाब किनारे का माहौल अचानक गंभीर हो गया। बैंड-बाजा और डीजे की धुन पर झूम रहे लोगों के बीच दो किशोर पानी में डूबने लगे। उनकी आवाज शोर में दब गई। उसी वक्त 53 वर्षीय बनलता शुक्ला ने बिना देर किए तालाब में छलांग लगा दी और दोनों की जान बचा ली। यह घटना बोरिया रोड स्थित कांदुल तालाब पर हुई।

बनलता दो बेटियों की मां हैं और वकील अरविंद शुक्ला की पत्नी हैं। वे गृहिणी हैं और गोसेवा सहित अन्य पशुओं की सेवा में लगी रहती हैं। उनकी सूझबूझ और बचपन से सीखी तैराकी ने इस उम्र में भी काम किया।

रायपुर में बनलता शुक्ला ने कैसे बचाई दो किशोरों की जान?

बुधवार रात बनलता कांदुल तालाब किनारे बैठकर विसर्जन देख रही थीं। आसपास बैंड-बाजा और डीजे का शोर था। तभी उन्होंने देखा कि तालाब के बीच में दो किशोर डूब रहे हैं। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन शोर के कारण किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसे में वे खुद पानी में कूद पड़ीं।

दोनों किशोर संतोषी नगर क्षेत्र के हनुमान नगर के रहने वाले हैं। छोटे का नाम तुषार साहू है, जो 12 वर्ष का है और बड़े का नाम लक्की साहू है, जो 17 वर्ष का है। बनलता ने पहले बड़े लड़के लक्की का हाथ पकड़ा। लक्की ने तुषार का हाथ थामा हुआ था। इस तरह वे दोनों को किनारे की ओर खींचने लगीं।

घटना के दौरान शोर और भीड़ ने कैसे बाधा डाली?

विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था। लोग तालाब किनारे खड़े होकर मूर्तियों को विदाई दे रहे थे। डीजे और बैंड का शोर इतना तेज था कि डूबते किशोरों की पुकार किसी तक नहीं पहुंची। बनलता ने बताया कि वे बार-बार आवाज लगाती रहीं, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसी वजह से उन्हें खुद कदम उठाना पड़ा।

तालाब के बीच में पहुंचकर उन्होंने स्थिति का आकलन किया। उन्हें पता था कि अगर डूबता व्यक्ति अचानक उनका हाथ पकड़ ले तो संतुलन बिगड़ सकता है और वे भी खतरे में पड़ सकती हैं। इसलिए उन्होंने बड़े लड़के को पकड़ा, जो छोटे को संभाले हुए था। इस तरीके से दोनों को सुरक्षित किनारे तक लाना संभव हुआ।

बनलता की तैराकी और सूझबूझ ने कैसे काम किया?

बनलता ने बचपन में तैरना सीखा था। उस अनुभव ने इस मौके पर मदद की। उन्होंने बताया कि उन्हें तैरना आता है, लेकिन इस स्थिति में चुनौती अलग थी। फिर भी उन्होंने घबराहट में काम नहीं लिया। बड़े लड़के का हाथ पकड़कर वे उसे खींचने लगीं। इतने में तालाब किनारे खड़े कुछ लोग भी पानी में कूद पड़े और सहयोग किया।

सामूहिक प्रयास से दोनों किशोरों को बाहर निकाल लिया गया। बनलता कहती हैं कि उन्हें कभी अपनी जान की परवाह नहीं रही। वे हमेशा लोगों की मदद करने में विश्वास रखती हैं। शायद इसी सोच के कारण वे समय पर फैसला ले सकीं।

बनलता ने घटना के बाद क्या कहा?

घटना के बाद बनलता ने कहा कि वे गृहिणी हैं और गोसेवा तथा अन्य पशुओं की सेवा करती हैं। उन्हें संतोष है कि उनका जीवन दोनों बच्चों को बचाने के काम आया। उन्होंने कहा कि मुझे कभी अपनी जान की फिक्र नहीं रही। मैं लोगों की मदद करने में यकीन रखती हूं। शायद इसी वजह से मैं इस उम्र में भी किसी की जान बचा सकी।

मोहल्ले में अब राहत का माहौल है। लोग बनलता की हिम्मत की चर्चा कर रहे हैं। परिवार और पड़ोसी उनकी सूझबूझ की तारीफ कर रहे हैं। बनलता खुद भी शांत हैं और दोनों बच्चों के सुरक्षित होने से संतुष्ट हैं।

स्थानीय लोगों ने कैसे मदद की और आगे क्या हुआ?

जब बनलता तालाब में कूदीं तो किनारे खड़े लोग भी सक्रिय हो गए। कुछ लोगों ने पानी में छलांग लगाई और तीनों को बाहर निकालने में सहयोग किया। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों किशोर सुरक्षित किनारे पहुंच गए। घटना के बाद इलाके में शांति है और लोग बनलता के साहस की बात कर रहे हैं।

यह घटना विसर्जन के दौरान हुई जब भीड़ और शोर दोनों अधिक थे। ऐसी स्थिति में बनलता का फैसला और सही तरीका अपनाकर बच्चों को बचाना उल्लेखनीय रहा। प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी तारीफ हो रही है।

रायपुर के इस किस्से ने दिखाया कि जरूरत पड़ने पर साधारण व्यक्ति भी असाधारण कदम उठा सकता है। बनलता की तैयारी और निर्णय क्षमता ने दो युवाओं की जान बचा ली।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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