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Chhath Puja: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक, जानें छठ महापर्व के चार दिनों का महत्व और परंपराएं

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का चार दिवसीय लोकपर्व है। जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का महत्व, प्रसाद और परंपराएं।

मुख्य बातें

  • छठ पूजा क्या है और कब मनाई जाती है
  • छठी मैया और सूर्य उपासना की मान्यता
  • छठ पूजा के चार दिन: क्रमवार जानकारी
  • छठ का प्रसाद: ठेकुआ से लेकर मौसमी फल तक
54 मिनट पहले
छठ पूजा पर घाट पर सूर्य को अर्घ्य देते श्रद्धालु - Chhath Puja devotees at ghat
Photo: Sundarhum / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छठ पूजा उत्तर भारत, खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र का सबसे बड़ा लोकपर्व माना जाता है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना को समर्पित है। दिवाली के कुछ दिन बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला यह पर्व अपनी सादगी, शुद्धता और अनुशासन के लिए जाना जाता है। आज छठ केवल बिहार-झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, सूरत जैसे महानगरों और विदेशों में बसे प्रवासी परिवार भी इसे पूरी श्रद्धा से मनाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि छठ पूजा के चार दिन कौन-से होते हैं, हर दिन का क्या महत्व है, प्रसाद में क्या बनता है और इस पर्व से जुड़ी परंपराएं हमें क्या सिखाती हैं।

छठ पूजा क्या है और कब मनाई जाती है

छठ शब्द “षष्ठी” से बना है, क्योंकि इसका मुख्य अनुष्ठान कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को होता है। पूरा पर्व चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी की सुबह तक चलता है, यानी कुल चार दिन। साल में एक बार चैत्र महीने में भी छठ मनाई जाती है, जिसे “चैती छठ” कहा जाता है, लेकिन कार्तिक की छठ अधिक व्यापक रूप से मनाई जाती है।

इस पर्व की खास बात यह है कि इसमें डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। आम तौर पर लोग उगते सूर्य की पूजा करते हैं, लेकिन छठ में अस्ताचलगामी सूर्य को भी उतने ही सम्मान से नमन किया जाता है। इसे जीवन के हर चरण के प्रति कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

छठी मैया और सूर्य उपासना की मान्यता

लोक मान्यताओं में छठी मैया को संतान की रक्षा करने वाली और परिवार को सुख-समृद्धि देने वाली देवी माना जाता है। कई परंपराओं में उन्हें सूर्य देव की बहन भी कहा गया है। सूर्य को ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का स्रोत माना जाता है, इसलिए किसान परिवारों में अच्छी फसल और स्वास्थ्य के लिए सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने की परंपरा बहुत पुरानी है।

छठ से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। कुछ कथाएं महाभारत काल से जोड़ी जाती हैं, तो कुछ रामायण काल से। इन कथाओं का मूल संदेश एक ही है, कि सच्ची श्रद्धा, संयम और शुद्ध आचरण से की गई उपासना फल देती है।

छठ पूजा के चार दिन: क्रमवार जानकारी

पहला दिन: नहाय-खाय

छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इस दिन व्रती (व्रत रखने वाले) सुबह नदी, तालाब या घर पर स्नान करके घर की साफ-सफाई करते हैं और शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरागत रूप से इस दिन कद्दू (लौकी) की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल का भात बनाया जाता है। भोजन में सेंधा नमक और शुद्ध घी का प्रयोग होता है। इसी दिन से घर में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाने लगता है।

दूसरा दिन: खरना

दूसरे दिन को खरना या लोहंडा कहा जाता है। व्रती पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखते हैं और शाम को पूजा के बाद गुड़ की खीर (रसिया), रोटी और केला प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। यह प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में भी बांटा जाता है। खरना के बाद से व्रती का लगभग 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू होता है, जो छठ को सबसे कठिन व्रतों में शामिल करता है।

तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य

तीसरे दिन, यानी षष्ठी को, शाम के समय व्रती परिवार के साथ नदी या तालाब के घाट पर पहुंचते हैं। बांस की टोकरी (दउरा) और सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल आदि सजाकर पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। घाटों पर दीपों की रोशनी और छठ गीतों की मधुर धुन एक अनोखा वातावरण बना देती है।

चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण

सप्तमी की भोर में व्रती फिर से घाट पर जाते हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद छठी मैया से परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलते हैं, जिसे पारण कहा जाता है। इसके साथ ही चार दिन का यह महापर्व संपन्न होता है।

छठ का प्रसाद: ठेकुआ से लेकर मौसमी फल तक

छठ का प्रसाद पूरी तरह मौसमी और स्थानीय उपज पर आधारित होता है। इसमें प्रमुख चीजें इस प्रकार हैं:

  • ठेकुआ: गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना यह पकवान छठ की पहचान है।
  • कसार या लड्डू: चावल के आटे और गुड़ से बनाए जाते हैं।
  • मौसमी फल: केला, गन्ना, नारियल, सिंघाड़ा, शकरकंद, नींबू (डाभ) आदि।
  • सूप और दउरा: बांस से बने ये पात्र प्रसाद रखने के लिए उपयोग होते हैं, जो स्थानीय कारीगरों की आजीविका से भी जुड़े हैं।

प्रसाद बनाने में पवित्रता का बहुत ध्यान रखा जाता है। कई घरों में इसके लिए अलग चूल्हा और नए बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं।

छठ गीत और लोक संस्कृति

छठ के दौरान गाए जाने वाले लोकगीत इस पर्व की आत्मा हैं। भोजपुरी, मैथिली और मगही भाषा में गाए जाने वाले ये गीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले आ रहे हैं। “कांच ही बांस के बहंगिया” और “केलवा के पात पर उगलन सुरुजमल” जैसे पारंपरिक गीत घाटों पर गूंजते हैं। लोक गायिका शारदा सिन्हा के छठ गीतों ने इस परंपरा को देश-विदेश तक पहुंचाया।

छठ पूजा से मिलने वाले सामाजिक संदेश

छठ को अक्सर “प्रकृति पर्व” भी कहा जाता है। इसमें किसी पुरोहित की अनिवार्यता नहीं होती, व्रती स्वयं पूजा करते हैं। इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संदेश इस प्रकार हैं:

  • स्वच्छता: पर्व से पहले घाटों, गलियों और घरों की सामूहिक सफाई की जाती है।
  • समानता: घाट पर अमीर-गरीब, सभी एक साथ खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।
  • प्रकृति सम्मान: नदी, सूर्य और मौसमी फसलों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है।
  • सामुदायिक सहयोग: मोहल्ले के लोग मिलकर घाट सजाते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं।

घाट पर जाते समय रखें ये सावधानियां

हर साल घाटों पर भारी भीड़ होती है, इसलिए सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। गहरे पानी में जाने से बचें, बच्चों और बुजुर्गों पर नजर रखें, प्रशासन द्वारा तय घाटों और बैरिकेडिंग का पालन करें। प्लास्टिक और पूजा सामग्री नदी में न फेंकें, ताकि जल स्रोत साफ रहें। लंबे उपवास के कारण व्रती को कमजोरी महसूस हो सकती है, ऐसे में परिवार के सदस्य उनका विशेष ध्यान रखें। किसी स्वास्थ्य समस्या वाले व्यक्ति को व्रत से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

छठ पूजा आस्था, अनुशासन और प्रकृति से जुड़ाव का अनोखा उदाहरण है। चार दिन तक चलने वाला यह पर्व हमें संयम, स्वच्छता और सामूहिकता का पाठ पढ़ाता है। यही कारण है कि समय के साथ इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और यह आज बिहार की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

छठ पूजा कितने दिन की होती है?

छठ पूजा चार दिन की होती है: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।

छठ में किस देवता की पूजा होती है?

छठ में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है।

छठ का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद कौन-सा है?

गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना ठेकुआ छठ का सबसे प्रसिद्ध प्रसाद है।

क्या छठ साल में दो बार मनाई जाती है?

हां, मुख्य छठ कार्तिक मास में होती है और दूसरी चैत्र मास में, जिसे चैती छठ कहते हैं।

Sudhanshu Tiwari
Author: Sudhanshu Tiwari

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