बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग आज सुबह से शुरू हो गई है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग आज सुबह से शुरू हो गई है।

डेस्क: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग आज सुबह से शुरू हो गई है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं ने अपने-अपने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर वोट डाला। सबसे चर्चित दृश्य पटना के दानापुर क्षेत्र से आया, जहां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने अपने दोनों बेटों तेजस्वी प्रसाद यादव और तेजप्रताप यादव को जीत का आशीर्वाद दिया। राबड़ी देवी ने भावुक अंदाज में कहा, “मेरे दोनों बेटे मेरी आंखों का तारा हैं। वे दोनों ही विजयी होंगे और बिहार की जनता का भरोसा जीतेंगे।” यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह आरजेडी परिवार की एकजुटता को दर्शाता है।
वोटिंग के दौरान दानापुर स्थित एक स्कूल में मतदान केंद्र पर पहुंची राबड़ी देवी ने पहले अपना वोट डाला। उसके बाद उन्होंने तेजस्वी यादव, जो मीनापुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार हैं, और तेजप्रताप यादव, जो हसनपुर से चुनाव लड़ रहे हैं, को गले लगाया। लालू प्रसाद यादव भी परिवार के साथ मौजूद थे, जिन्होंने चुपचाप इस क्षण को देखा। तेजस्वी ने वोट डालने के बाद पत्रकारों से कहा, “मां का आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। बिहार की जनता जानती है कि हम उनके हक के लिए लड़ रहे हैं।” यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जहां हजारों यूजर्स ने इसे ‘ममता का राजनीतिक संदेश’ करार दिया।
बिहार चुनाव का यह पहला चरण 243 सीटों में से 70 सीटों पर हो रहा है, जिसमें पटना, नालंदा, वैशाली, सारण और भोजपुर जैसे जिले शामिल हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चलेगी। आरजेडी ने इस चरण में 25 से अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, और परिवार के दोनों बेटों की दावेदारी को पार्टी की मुख्य रणनीति माना जा रहा है।
परिवारवाद या राजनीतिक विरासत? आरजेडी की मजबूती का राज
बिहार की राजनीति में यादव परिवार का नाम हमेशा से चर्चा में रहा है। लालू प्रसाद यादव की विरासत को संभालते हुए राबड़ी देवी ने 1997 से 2005 तक मुख्यमंत्री के रूप में राज्य को संभाला। अब उनके बेटे तेजस्वी और तेजप्रताप इस धरोहर को आगे बढ़ा रहे हैं। आज का यह आशीर्वाद दृश्य केवल भावुकता नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश है। विपक्षी दल इसे ‘परिवारवाद’ कहकर आलोचना कर सकते हैं, लेकिन आंकड़ों से साफ है कि आरजेडी की कोर वोटर बेस, खासकर यादव और मुस्लिम समुदाय, इसी विरासत पर टिका है। 2020 के चुनाव में तेजस्वी ने महागठबंधन को 110 सीटें दिलाई थीं, और इस बार भी उम्मीदें उसी स्तर की हैं। क्या यह ममता बिहार की जनता को फिर से जोड़ेगी? समय ही बताएगा, लेकिन राबड़ी देवी का यह बयान निश्चित रूप से कैंपेन का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
वोटिंग का माहौल – शांतिपूर्ण लेकिन सतर्कता जरूरी
पटना के दानापुर में वोटिंग सुबह से ही जोरों पर है। मतदाता लंबी कतारों में खड़े हैं, और महिलाओं की भागीदारी सराहनीय है। एक मतदाता मीना देवी ने कहा, “राबड़ी जी को देखकर पुरानी यादें ताजा हो गईं। वे हमारी बहन-मां जैसी हैं। तेजस्वी बाबू को वोट देकर मजबूत बिहार बनाएंगे।” हालांकि, कुछ जगहों पर EVM मशीनों को लेकर हल्की नारेबाजी हुई, लेकिन पुलिस ने तुरंत स्थिति संभाल ली। निर्वाचन आयोग ने 500 से अधिक कंपनियों की तैनाती की है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। कुल 2.5 करोड़ मतदाता इस चरण में वोट डालने योग्य हैं, जिसमें 1.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। अगर यह शांतिपूर्ण रहा, तो बिहार चुनाव की साख मजबूत होगी।
लालू परिवार की एकजुटता और चुनावी रणनीति
तेजप्रताप यादव ने वोट डालने के बाद कहा, “मां का आशीर्वाद मेरे लिए प्रेरणा है। हसनपुर की जनता जानती है कि हम जाति-धर्म से ऊपर उठकर काम करते हैं।” आरजेडी के प्रवक्ता मनीष यादव ने बताया कि पार्टी ने इस चरण में सामाजिक न्याय और रोजगार पर फोकस किया है। लालू प्रसाद यादव, जो स्वास्थ्य कारणों से सीमित सक्रिय हैं, ने परिवार को संदेश दिया, “जनता का विश्वास ही हमारी जीत है।” यह परिवारिक एकता विपक्ष के लिए चुनौती है, क्योंकि एनडीए ने भी अपने स्तर पर कैंपेन तेज कर दिया है।
चुनाव आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण में 70% से अधिक मतदान का लक्ष्य है। पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 57% था, जो सुधार दर्शाता है। आरजेडी ने अपनी रैली में राबड़ी देवी को प्रमुखता दी है, जो पिछली बार कम सक्रिय थीं। उनका यह भावुक बयान न केवल बेटों के लिए, बल्कि पूरी पार्टी के लिए उत्साहवर्धक है।
“मेरे दोनों बेटे मेरी जान हैं। तेजस्वी और तेजप्रताप दोनों ही बिहार के भविष्य हैं। जनता उन्हें आशीर्वाद देगी।”
बिहार 2025 चुनाव महागठबंधन और एनडीए के बीच सीधा मुकाबला है। आरजेडी को यादव वोट सॉलिड लग रहे हैं, लेकिन ईबीसी और दलित वोट पर निर्भरता है। पहले चरण की 70 सीटों में आरजेडी की 25 दावेदारियां मजबूत हैं। राबड़ी देवी का यह कदम महिलावोटरों को आकर्षित कर सकता है। हालांकि, आर्थिक मुद्दे जैसे बेरोजगारी और महंगाई प्रमुख हैं। क्या परिवार का आशीर्वाद पर्याप्त होगा? विश्लेषकों का मानना है कि हां, अगर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बनी रही।
“लालू जी ने हमेशा संघर्ष किया, अब बारी हमारी है। जीत हमारी होगी।”
निष्कर्ष: ममता से मजबूत बनेगी राजनीति
बिहार चुनाव का यह पहला चरण न केवल वोटों का, बल्कि भावनाओं का भी इजहार है। राबड़ी देवी की ममता ने तेजस्वी और तेजप्रताप को नई ऊर्जा दी है, जो आरजेडी की जीत का आधार बन सकती है। परिवारिक एकता राजनीति में विरासत का प्रतीक है, और जनता का फैसला ही अंतिम होगा। न्यूज़ मीडिया किरण की टीम लगातार अपडेट लाती रहेगी। बिहार की जनता, आपका वोट ही राज्य का भविष्य तय करेगा।



