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नीतीश कुमार, पिछले 20 साल से बिहार की सियासत की धुरी बने हुए हैं।

नीतीश कुमार, पिछले 20 साल से बिहार की सियासत की धुरी बने हुए हैं। लालू यादव जैसे जमीनी नेता और पूरी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी यानी BJP के मजबूत बेस के बावजूद नीतीश कुमार ऐसा करने में कैसे कामयाब हुए।

 डेस्क: बिहार में चाहे कोई आए या जाए लेकिन पिछले 20 साल से सियासत सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। नीतीश कुमार 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं और ऐसा करने वाले वह बिहार के ही नहीं बल्कि पूरे देश के पहले नेता हैं। ऐसा नीतीश कुमार के बार-बार पाले बदलने के कारण हुआ है। नीतीश कुमार, पिछले 10 साल में 2 बार आरजेडी के साथ सरकार बना चुके हैं और फिर वापस NDA के साथ भी आ गए। लेकिन दिलचस्प बात ये है कि नीतीश कुमार जिधर भी रहते हैं सरकार उसी गठबंधन की बनती है और मुख्यमंत्री पद की शपथ भी सिर्फ और सिर्फ नीतीश कुमार ही लेते हैं। आइए समझते हैं कि कैसे पिछले 20 साल से बिहार की सियासत नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूम रही है।

लालू फैमिली के राज का किया खात्मा

साल था 2005 और नीतीश कुमार ने लालू परिवार के राज का खात्मा कर दिया। नीतीश कुमार की पार्टी JDU और BJP साथ मिलकर सियासी मैदान में उतरे और लालू की पार्टी तब 54 सीटों पर सिमटकर रह गई। JDU ने 88, BJP ने 55, RJD ने 54 और कांग्रेस ने 9 सीटें हासिल की थीं। चूंकि नीतीश की पार्टी की सीटें सबसे ज्यादा थीं, इसलिए उनके सरकार का नेतृत्व करने पर किसी को आपत्ति नहीं हुई।

जब ‘सुशासन बाबू’ की छवि ने जिताया चुनाव

फिर आया 2010 का विधानसभा चुनाव और अबतक नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि बन गई थी। नीतीश कुमार और बीजेपी, इस बार फिर एक साथ मिलकर चुनाव लड़े और RJD को करारी शिकस्त दी। बिहार विधानसभा चुनाव में JDU-115, BJP-91, RJD-22 और कांग्रेस ने 4 सीटें हासिल की थीं। इस बार भी बीजेपी, नीतीश कुमार को सीएम बनाने के लिए सहमत हो गई। नीतीश कुमार ने फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बिहार की सरकार के मुखिया बन गए।

9 महीने के लिए छोड़ दी थी CM की कुर्सी

लेकिन लोकसभा चुनाव 2014 से पहले नीतीश और बीजेपी में दूरियां बढ़ गईं और इस इलेक्शन में उनकी पार्टी अकेले उतर गई। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी जेडीयू की करारी हार हो गई और वह बिहार में सिर्फ 2 सीटें ही जीत पाई। वहीं, बीजेपी ने 31 सीटें हासिल कर ली थीं। इसके बाद, नीतीश कुमार ने पार्टी की हार की जिम्मेदारी ली और पद से इस्तीफा दे दिया। तब उन्होंने अपने भरोसेमंद और मुसहर समाज से आने वाले नेता जीतनराम मांझी को बिहार का सीएम बना दिया। हालांकि, मांझी 20 मई, 2014 से 20 फरवरी, 2015 तक यानी महज 9 महीने ही सीएम रह पाए। और नीतीश उन्हें हटाकर खुद फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

धुर विरोधी पार्टी के साथ मिलकर भी जीता चुनाव

हालांकि, 2015 का चुनाव जब आया तो नीतीश कुमार अब दोबारा बीजेपी के पास नहीं गए। नीतीश कुमार की पार्टी ने इस बार अपनी धुर विरोधी पार्टी आरजेडी से गठबंधन कर लिया। इस बार जब चुनाव का रिजल्ट आया तो उसने बीजेपी को चौंका दिया। बीजेपी इस चुनाव में महज 53 सीटों पर निपट गई। वहीं, जेडीयू ने 71, आरजेडी ने 80 और कांग्रेस ने 27 सीटें हासिल कर लीं। नीतीश कुमार ने फिर से सीएम पद की शपथ ली और बिहार की सरकार के अगुआ बन गए। लेकिन आरजेडी के साथ उनकी सरकार, महज 2 साल ही चल पाई और नीतीश कुमार फिर से बीजेपी के साथ आ गए। 26 जुलाई 2017 को नीतीश ने आरजेडी के साथ गठबंधन तोड़ लिया और NDA में शामिल हो गए।

जब कम सीटों के बावजूद नीतीश बनाए गए CM

अब बिहार का 2020 का चुनाव आता है और बीजेपी-जेडीयू फिर से साथ मिलकर लड़ते हैं। इस चुनाव में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती है लेकिन उसका महागठबंधन बहुमत नहीं ला पाता है। इस विधानसभा चुनाव में नीतीश की पार्टी ने 43, बीजेपी ने 74, आरजेडी ने 75 और कांग्रेस ने 19 सीटें हासिल की थीं। NDA के पास फिर से बहुमत था। नीतीश की सीटें इस बार घट गई थीं लेकिन बीजेपी फिर से उन्हें मुखिया बनाने को राजी हो गई और नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली।

2 साल बाद ही नीतीश ने BJP से तोड़ा नाता

इस बार भी बीजेपी के साथ नीतीश कुमार की ज्यादा दिन नहीं बनी। 2 साल बाद उन्होंने फिर से पलटी मार ली। अगस्त, 2022 में नीतीश कुमार ने NDA से नाता तोड़ दिया और वापस RJD के साथ मिलकर सरकार बना ली। इस बार नीतीश कुमार ने 8वीं बार मुख्यमंत्री पद दी शपथ ली और बिहार सरकार के नेता बन गए। लेकिन आरजेडी के साथ उनकी सरकार इस बार पूरे 2 साल भी नहीं चल पाई और उन्होंने जनवरी, 2024 में फिर से गठबंधन तोड़ लिया। नीतीश कुमार वापस NDA में शामिल हो गए और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। नीतीश कुमार ने अब 9वीं बार सीएम पद की शपथ ली। तब से अब तक नीतीश कुमार, बीजेपी के साथ NDA गठबंधन में हैं।

बिहार के विधानसभा चुनाव 2025 में भी बीजेपी और नीतीश की जोड़ी ने कमाल किया। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 85, बीजेपी ने 89, आरजेडी ने 25 और कांग्रेस ने 6 पाईं। नीतीश कुमार अब 10वीं बार शपथ ले रहे हैं और उन्होंने खुद को बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा धुरंधर साबित कर दिया है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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