Helmet Lifespan: बाइक या स्कूटी चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी है, लेकिन कई लोग एक ही हेलमेट को सालों तक इस्तेमाल करते रहते हैं। उन्हें लगता है कि जब तक हेलमेट बाहर से सही दिख रहा है, तब तक बदलने की जरूरत नहीं। जबकि लंबे समय तक इस्तेमाल करने से अंदर की गद्दी दब सकती है और हेलमेट सिर पर पहले की तरह फिट नहीं बैठता। इससे हादसे के समय मिलने वाली सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। जानते हैं कि हेलमेट कब बदलना चाहिए और नया खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
हेलमेट कितने साल बाद बदलना चाहिए?
ब्रिटेन के परिवहन विभाग की हेलमेट सुरक्षा संस्था SHARP के मुताबिक कई हेलमेट बनाने वाली कंपनियां 3 से 5 साल के बीच हेलमेट बदलने की सलाह देती हैं। वहीं Snell Memorial Foundation सामान्य इस्तेमाल के बाद हर 5 साल में हेलमेट बदलने की सलाह देती है। हालांकि यह कोई पक्की एक्सपायरी डेट नहीं है। सही समय हेलमेट की हालत, इस्तेमाल और कंपनी के निर्देशों पर निर्भर करता है। हेलमेट खरीदते समय उसके बनाने की तारीख देखें और कंपनी के निर्देश जरूर पढ़ें। अगर हेलमेट इससे पहले खराब हो जाए या हादसे में जोरदार टक्कर झेल चुका हो तो साल पूरे होने का इंतजार न करें।
हेलमेट खराब होने पर कैसे पहचानें?
हेलमेट बाहर से सही दिख रहा हो, तब भी उसके अंदर के हिस्से खराब हो सकते हैं। अंदर लगा फोम टक्कर के समय सिर पर लगने वाले झटके को कम करने में मदद करता है। समय के साथ गद्दी दब सकती है, जिससे हेलमेट सिर पर ढीला बैठने लगता है। अगर बाहरी हिस्से में दरार या टूट-फूट दिखे तो इस्तेमाल बंद कर दें। अंदर की गद्दी दब जाने पर भी जांच करवाएं। ठोड़ी के नीचे बांधने वाली पट्टी या लॉक खराब हो जाए तो हेलमेट सिर पर ठीक से नहीं टिकेगा। अगर पहनने पर हेलमेट आगे-पीछे या अगल-बगल खिसकता है तो उसकी फिटिंग सही नहीं है।
हादसे के बाद हेलमेट क्यों बदलना चाहिए?
बाइक या स्कूटी से हादसा होने पर अगर हेलमेट को जोरदार टक्कर लगी है तो उसे बदल देना चाहिए। बाहर से सही दिखने के बावजूद अंदर का हिस्सा खराब हो सकता है। ऐसे नुकसान का पता सिर्फ देखकर लगाना आसान नहीं होता। Snell Memorial Foundation भी हादसे में इस्तेमाल हुए हेलमेट को बदलने की सलाह देती है। सामान्य ऊंचाई से हाथ से गिरने पर हर बार हेलमेट बदलना जरूरी नहीं होता। लेकिन अगर वह काफी ऊंचाई से गिरा हो, किसी सख्त सतह से जोर से टकराया हो या खराब होने का शक हो तो कंपनी के निर्देश देखें।
नया हेलमेट खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
नया हेलमेट खरीदते समय सिर्फ रंग, डिजाइन या कीमत न देखें। यह भी देखना जरूरी है कि वह सुरक्षा के तय नियमों के मुताबिक बना हो। भारत में बाइक और स्कूटी चलाने वालों के हेलमेट के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सुरक्षा से जुड़े नियम तय किए हैं। इनमें हेलमेट की मजबूती और टक्कर के समय मिलने वाली सुरक्षा शामिल है। इसलिए नया हेलमेट लेते समय उस पर ISI मार्क जरूर देखें। हेलमेट सिर पर ठीक से फिट होना चाहिए और ठोड़ी के नीचे बांधने वाली पट्टी का लॉक भी सही होना चाहिए। खरीदने से पहले बनाने की तारीख देखें और भरोसेमंद दुकान से ही लें। जरूरत पड़ने पर BIS Care ऐप से प्रमाणन की जानकारी भी जांच सकते हैं।
हेलमेट की देखभाल कैसे करें?
हेलमेट की सफाई करते समय कंपनी के बताए तरीके अपनाएं। तेज केमिकल या ऐसे क्लीनर का इस्तेमाल न करें जिससे उसके हिस्से खराब हो सकते हैं। हेलमेट को ऐसी जगह रखें जहां उसके गिरने या किसी भारी चीज से टकराने का डर न हो। लंबे समय तक तेज गर्मी में रखने से भी बचें। सही देखभाल से हेलमेट की उम्र और सुरक्षा दोनों बेहतर रह सकते हैं।
हेलमेट सिर्फ नियम पूरा करने के लिए नहीं, बल्कि सिर की सुरक्षा के लिए होता है। अगर आपका हेलमेट पुराना हो चुका है या हादसे में इस्तेमाल हो चुका है तो नया खरीदने में देरी न करें।
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