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Hyderabad News: हैदराबाद में सरोगेसी की आड़ में शिशु बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, डीएनए रिपोर्ट से हुआ सच उजागर, दंपति ने अपनाने से किया इनकार

हैदराबाद के फर्टिलिटी सेंटर में शिशु बिक्री का खुलासा, 8 गिरफ्तार, DNA टेस्ट से धोखे का पर्दाफाश

Hyderabad News: हैदराबाद पुलिस ने एक बड़े शिशु बिक्री रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके बाद एक दो महीने के मासूम बच्चे का भविष्य अनिश्चित हो गया है। इस मामले में पुलिस ने 27 जुलाई को आठ लोगों को गिरफ्तार किया। इन पर धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप हैं। बच्चे को अस्थायी रूप से अमीरपेट के सरकारी शिशु विहार में रखा गया है, लेकिन उसका भविष्य अभी साफ नहीं है।

Hyderabad News: फर्टिलिटी सेंटर ने की धोखाधड़ी

सिकंदराबाद के यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी सेंटर पर आरोप है कि इसने एक दंपति को झूठ बोलकर बच्चा दिया। क्लिनिक की मुख्य आरोपी डॉ. नम्रता ने दंपति को बताया कि बच्चा उनका जैविक पुत्र है। दंपति ने सरोगेसी के नाम पर क्लिनिक को करीब 35 लाख रुपये दिए। दूसरी ओर, असम से आए जैविक माता-पिता को उनके नवजात शिशु के बदले केवल 90,000 रुपये दिए गए। लेकिन डीएनए जांच में सच्चाई सामने आई कि बच्चा दंपति का नहीं है। इसके बाद दंपति ने बच्चे को लेने से इनकार कर दिया और पुलिस में शिकायत दर्ज की।

बच्चे का भविष्य, क्या होगा आगे?

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शिशु विहार के अधिकारियों का कहना है कि बच्चा तब तक उनके पास रहेगा, जब तक पुलिस जांच पूरी नहीं हो जाती। केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) के नियमों के अनुसार, जांच के बाद एक सार्वजनिक नोटिस जारी होगा। इसमें जैविक माता-पिता या रिश्तेदारों को बच्चे पर दावा करने के लिए दो महीने का समय दिया जाएगा। उन्हें वैध दस्तावेज और स्थिर घर का सबूत देना होगा।

अगर कोई दावा नहीं करता तो?

अगर दो महीने में कोई दावा नहीं करता, तो किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चे को गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित किया जाएगा। इसके बाद बच्चा CARA के नियमों के अनुसार नए माता-पिता को गोद देने के लिए उपलब्ध होगा।

धोखे का शिकार हुआ दंपति

तेलंगाना स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दंपति को लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है। बच्चे के चेहरे के लक्षण उनके से अलग हैं, क्योंकि वह दूसरे क्षेत्र के माता-पिता का है। इस वजह से दंपति ने बच्चे को अपनाने से मना कर दिया।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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