नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली को दहलाने वाले लाल किले के पास कार बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ी सफलता मिली है। NIA ने इस मामले में नौवें आरोपी यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि यासिर खुद को मानव बम (सुसाइड बॉम्बर) बनाने की तैयारी कर रहा था और उसने आत्मघाती हमले की शपथ ली थी। यह खुलासा दिल्ली की सुरक्षा के लिए बड़ा झटका है और आतंकी साजिश की गहराई को दिखाता है।
धमाका क्या हुआ था?
10 नवंबर 2025 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास एक कार में जोरदार धमाका हुआ था। इस हमले में 11 से 15 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। धमाके को अंजाम देने वाला मुख्य आतंकी डॉ. उमर उन नबी था, जो कार चला रहा था और धमाके में खुद भी मारा गया। जांच से पता चला कि यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें वाहन में विस्फोटक भरकर सुसाइड अटैक किया गया।
यासिर की भूमिका और गिरफ्तारी
यासिर अहमद डार जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का रहने वाला है। NIA ने उसे नई दिल्ली से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यासिर इस साजिश में सक्रिय रूप से शामिल था। वह मारे गए आतंकी उमर उन नबी और अन्य आरोपी मुफ्ती इरफान से लगातार संपर्क में था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यासिर ने भी आत्मघाती हमले (सेल्फ-सैक्रिफिशियल ऑपरेशन) करने की शपथ ली थी। वह खुद को मानव बम बनाकर बड़ा हमला करने की तैयारी कर रहा था। कोर्ट ने यासिर को 26 दिसंबर तक NIA की हिरासत में भेज दिया है, ताकि उससे और पूछताछ की जा सके।
जैश-ए-मोहम्मद का कनेक्शन
यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा हुआ है। जांच में पता चला कि यह एक ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ था, जिसमें ज्यादातर पढ़े-लिखे लोग जैसे डॉक्टर शामिल थे। ये लोग अपनी नौकरियों का इस्तेमाल छिपकर आतंकी गतिविधियां चलाने के लिए कर रहे थे। विदेशी हैंडलर पाकिस्तान और खाड़ी देशों से इनको निर्देश दे रहे थे। पहले की योजना में ड्रोन से हमास स्टाइल अटैक और छोटे रॉकेट बनाकर सीरियल ब्लास्ट करने का प्लान था, लेकिन बाद में कार बम का सहारा लिया गया।
अब तक कितने गिरफ्तारियां?
यासिर इस मामले में नौवां आरोपी है जो गिरफ्तार हुआ। इससे पहले NIA ने कई डॉक्टरों, एक मुफ्ती और अन्य लोगों को पकड़ा है। इनमें डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद और जसीर बिलाल वानी जैसे नाम शामिल हैं। जसीर ने ड्रोन MODIFY करने और रॉकेट बनाने में मदद की थी। NIA ने फरीदाबाद, श्रीनगर और अन्य जगहों पर छापे मारकर डिजिटल डिवाइस और सबूत जब्त किए हैं।
साजिश कितनी पुरानी थी?
जांच से पता चला कि यह साजिश 2023 से चल रही थी। आतंकियों ने दो साल से ज्यादा समय लगाकर प्लान बनाया। पहले ड्रोन और रॉकेट से हमले की तैयारी थी, लेकिन बाद में कार बम चुना गया। कुछ आरोपी विदेश गए थे, जहां उन्हें बम बनाने की ट्रेनिंग मिली। यह मॉड्यूल कश्मीर से दिल्ली तक फैला हुआ था और बड़े हमलों की फिराक में था।
NIA की कार्रवाई और आगे की जांच
NIA इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। एजेंसी राज्य पुलिसों के साथ मिलकर काम कर रही है। सभी आरोपियों से आमना-सामना कराया जा रहा है। विदेशी लिंक और पैसे के स्रोत की भी जांच हो रही है। NIA का कहना है कि पूरे नेटवर्क को खत्म करने तक कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष :
दिल्ली ब्लास्ट की यह साजिश देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा सबक है। पढ़े-लिखे युवाओं का आतंकवाद की ओर रुझान चिंता की बात है। NIA की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा खतरा टल गया है, लेकिन यासिर जैसे लोगों का मानव बम बनने की तैयारी दिखाती है कि आतंकी संगठन नए तरीके अपना रहे हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, और ऐसे मॉड्यूल को जड़ से खत्म करना जरूरी है। आम नागरिकों को भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देनी चाहिए, ताकि देश सुरक्षित रहे। यह घटना याद दिलाती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है और एकजुटता से ही हम जीत सकते हैं।



