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JAMA Blood Group: इंसानों में मिला 49वां ब्लड ग्रुप, गलत रक्त चढ़ने का खतरा होगा कम

20 सितंबर 2026
JAMA Blood Group Photo-AI

New Delhi: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने मानव रक्त समूहों से जुड़ी एक अहम खोज की है। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूजन (ISBT) ने JAMA को मानव का 49वां ब्लड ग्रुप सिस्टम मान्यता दी है। यह खोज ब्रिटेन और इस्राइल के वैज्ञानिकों की संयुक्त रिसर्च के बाद सामने आई है। ISBT ने सितंबर 2026 में JAMA को आधिकारिक तौर पर 49वें ब्लड ग्रुप सिस्टम के रूप में मान्यता दी।

इस्राइली महिला मरीज के खून से शुरू हुई जांच

वैज्ञानिकों को इस नए ब्लड ग्रुप सिस्टम का पता एक इस्राइली महिला मरीज और उसके भाई के रक्त के नमूनों की जांच के दौरान चला। शोधकर्ता एक ऐसे दुर्लभ एंटीबॉडी की जांच कर रहे थे, जो मरीज के रक्त प्लाज्मा में मौजूद था और सामान्य रक्त कोशिकाओं के साथ प्रतिक्रिया कर रहा था।

शोध में सेरोलॉजिकल टेस्टिंग और जेनेटिक सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि मरीज और उसके भाई में F11R जीन का एक विशेष आनुवंशिक बदलाव मौजूद था। इस बदलाव के कारण JAMA सिस्टम से जुड़े महत्वपूर्ण एंटीजन की अनुपस्थिति पाई गई।

F11R जीन और JAM-A प्रोटीन क्या है?

 JAMA Blood Group सिस्टम का संबंध F11R (F11 receptor) जीन से है। यह जीन Junctional Adhesion Molecule-A यानी JAM-A नामक प्रोटीन से जुड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार JAMA सिस्टम में फिलहाल एक high-prevalence antigen शामिल है, जो अधिकांश लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं पर पाया जाता है।

शोध में F11R c.644G>A (p.Arg215Gln) आनुवंशिक बदलाव की पहचान की गई। मरीज और उसके भाई में इस बदलाव की दोनों प्रतियां मौजूद थीं, जिसके कारण संबंधित एंटीजन उनकी रक्त कोशिकाओं में अनुपस्थित था।

Rare Blood Group Discovery Photo-AI

दुर्लभ मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

आम तौर पर रक्त चढ़ाने से पहले ABO और Rh जैसे प्रमुख ब्लड ग्रुप की जांच की जाती है। लेकिन कुछ दुर्लभ ब्लड ग्रुप एंटीजन के मामले में केवल सामान्य ब्लड ग्रुप मिलान पर्याप्त नहीं हो सकता। यदि किसी व्यक्ति में कोई खास एंटीजन मौजूद नहीं है और उसके शरीर में उसके खिलाफ एंटीबॉडी बन जाती है, तो उस एंटीजन वाले रक्त की ट्रांसफ्यूजन से गंभीर ट्रांसफ्यूजन रिएक्शन का जोखिम हो सकता है।

JAMA की खोज से ऐसे दुर्लभ मरीजों की पहचान और उनके लिए उपयुक्त रक्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। शोध में यह भी पाया गया कि संबंधित एंटीबॉडी लाल रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स दोनों से जुड़ सकती है, इसलिए इसका महत्व केवल RBC ट्रांसफ्यूजन तक सीमित नहीं है।

DNA टेस्ट से मिलेगी पहचान

इस खोज का एक महत्वपूर्ण संभावित लाभ यह है कि भविष्य में जेनेटिक टेस्टिंग के जरिए JAMA-नेगेटिव व्यक्तियों की पहचान की जा सकेगी। इससे दुर्लभ मरीजों के लिए उपयुक्त रक्त और प्लेटलेट्स खोजने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य रक्त चढ़ाने से होने वाली हर समस्या अब पूरी तरह खत्म हो जाएगी। यह खोज खास तौर पर उन दुर्लभ मरीजों की पहचान और सुरक्षित ट्रांसफ्यूजन प्रबंधन में उपयोगी हो सकती है जिनमें JAMA से संबंधित एंटीजन अनुपस्थित है।

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कवरेज: Manpreet Singh, News Media Kiran

Manpreet Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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